रूस-यूक्रेन युद्ध: चीन ने दिया पीस प्लान, ज़ेलेन्स्की बोले- शी जिनपिंग से मिलना चाहता हूं

वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की

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    • Author, जॉर्ज राइट और जारोस्लाव लुकीव
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध को ख़त्म करने की चीन की पेश की गई योजना के बारे में चर्चा करने के लिए वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात करना चाहते हैं.

यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के छेड़े गए 'विशेष सैन्य अभियान' के एक साल पूरे होने पर मौक़े पर बात करते हुए ज़ेलेन्स्की ने कहा कि चीन की ये योजना बताती है कि वो इस मामले में शांति के रास्ते खोज रहा है.

उन्होंने कहा, "मैं वाकई इस पर यकीन करना चाहता हूं कि चीन रूस को हथियार सप्लाई नहीं करेगा."

चीन ने शुक्रवार को 'चाइनाज़ पोज़िशन ऑन पॉलिटिकल सेटलमेन्ट ऑफ़ द यूक्रेन क्राइसिस' नाम का एक पेपर पेश किया है, जिसमें उसने यूक्रेन में शांति को लेकर बात की है और कहा है कि बातचीत के ज़रिए ही इस मुश्किल का हल निकाला जा सकता है.

12-सूत्र के इस दस्तावेज़ में कहीं भी ये नहीं कहा गया है कि रूस को यूक्रेन से अपनी सेना हटानी चाहिए. इसमें "एकतरफ़ा प्रतिबंधों" की कड़ी आलोचना की गई है. माना जा रहा है कि चीन ने इसके ज़रिए पश्चिमी मुल्कों की तरफ इशारा किया है.

चीन के अधिकारियों ने अब तक शी जिनपिंग से मुलाक़ात करने की ज़ेलेन्स्की की पेशकश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इस बीच रूस ने चीन के इस पीस प्लान का स्वागत किया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि "हम चीन के नज़रिये से सहमत हैं".

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इसी सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि चीन रूस को हथियार सप्लाई करने के बारे में विचार कर रहा है. हालांकि उनके इस आरोप को चीन से कड़ाई से खारिज किया है.

इसके बाद शुक्रवार को एक बार फिर अमेरिकी मीडिया में ख़बर छपी कि चीनी सरकार रूस को ड्रोन और गोलाबारूद देने के बारे में विचार कर रहा है.

इस सप्ताह शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एबीसी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में शामिल हुए. जब उनसे चीन के पीस प्लान के बारे में पूछा गया उन्होंने कहा, "रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस पर बहुत खुश हैं, ऐसे में ये अच्छा कैसे हो सकता है?"

उन्होंने कहा, "मैंने इस योजना में ऐसा कुछ नहीं देखा जिससे इस बात का अंदाज़ा लगे कि इससे रूस के अलावा किसी और को कोई फ़ायदा होगा."

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: रूसी सैनिकों के कॉल रिकॉर्ड में चौंकाने वाली बातें

बीसीसी के वैश्विक मामलों के संपादक जन सिम्पसन कहते हैं कि ऐसा लग रहा है कि चीन रूस का साथ दे रहा है, हालांकि वो चाहेगा कि वो किसी तरह की एक पीस डील तक पहुंचे ताकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को इस मसले में अपनी साख बचाने का मौक़ा मिल सके.

चीन के इस 12-सूत्री पीस प्लान से पहले चीनी विदेश मंत्रालय के आला अधिकारी वांग यी ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरॉव से मुलाक़ात की थी.

बातचीत के बाद चीनी सरकार समर्थित समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि वांग यी ने कहा कि चीन रूस के साथ "राजनीतिक भरोसा बढ़ाना" चाहता है और "सामरिक मामलों में तालमेल मज़बूत करना" चाहता है.

पुतिन और वांग यी

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चीन ने अपने 12-सूत्री डॉक्यूमेन्ट में क्या कहा?

1- संयुक्त राष्ट्र ने चार्टर के अनुसार सभी देशों की संप्रभुता, उनकी आज़ादी और क्षेत्रीय अखंडता का उचित सम्मान किया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय क़ानून सभी के लिए एक समान हैं और इनका पालन करने में दोहरी मानसिकता को पूरी तरह खारिज करना चाहिए.

2- शीत युद्ध की मानसिकता छोड़नी होगी. किसी एक देश की सुरक्षा के लिए दूसरे देशों की सुरक्षा को दांव में नहीं लगाया जा सकता. दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए सभी पक्षों को एक साझा,समग्र, सहयोगी और टिकाऊ विजन पर चलना होगा.

3- दुश्मनी से किसी को फ़ायदा नहीं होगा. इसे रोकना होगा. संघर्ष और युद्ध से किसी का फ़ायदा नहीं होता. सभी पक्षों को वाजिब रवैया अपनाते हुए संयम दिखाना होगा ताकि इस तरह के संघर्ष की चिंगारी और न भड़के और हालात बेकाबू होने से बच जाए.

4- यूक्रेन में शांति के लिए बातचीत बेहद जरूरी है. यूक्रेन समस्या को खत्म करने के लिए बातचीत और विचार-विमर्श ही एक मात्र रास्ता है. इस समस्या को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए शांति की कोशिशों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

5- यूक्रेन युद्ध से पैदा मानवीय संकट को जितनी जल्दी हो सुलझाया जाए. इस मानवीय संकट को सुलझाने की दिशा में हर संभव कदम उठाना चाहिए. मदद के लिए सभी ऑपरेशनों को निष्पक्ष रहते हुए अंजाम दिया जाए. इन मुद्दों का राजनीतिकरण न हो.

6- युद्ध के दौरान नागरिकों और युद्धबंदियों की किसी भी कीमत पर रक्षा की जाए. संघर्ष में शामिल सभी पक्ष मानवता के अंतरराष्ट्रीय नियम का पालन करें और नागरिक ठिकानों पर हमले न करे. महिलाओं, बच्चों और युद्ध के शिकार लोगों की रक्षा हो. युद्धबंदियों के बुनियादी अधिकारों को संरक्षित किया जाए.

7- परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम होना चाहिए. चीन परमाणु संयंत्रों और शांतिपूर्ण कार्य के लिए लगाए गए सभी न्यूक्लियर प्लांट पर हमले के ख़िलाफ़ है. चीन सभी पक्षों से कन्वेंशन ऑफ न्यूक्लियर सेफ्टी समेत इस संबंध में सारे अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की अपील करता है.

8- चीन लड़ाई में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ है. परमाणु हथियारों का न तो इस्तेमाल हो और न ही परमाणु युद्ध लड़े जाएं. परमाणु हथियार इस्तेमाल करने या परमाणु हथियारों की धमकी भी न दी जाए. परमाणु हथियारों का प्रसार भी न हो.

9- यूक्रेन युद्ध से पैदा खाद्य संकट को देखते हुए अनाज के निर्यात में अड़चनों को ख़त्म किया जाना चाहिए. सभी पक्षों को रूस, तुर्की, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र की ओर से अनाज सप्लाई के लिए शुरू की गई ब्लैक सी इनिशिएटिव को लागू करना चाहिए.

10 - चीन इकतरफा प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ है. इकतरफा प्रतिबंधों और ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने के रणनीति से इस तरह का संकट हल नहीं हो सकता. इससे नई समस्याएं ही पैदा होती हैं. चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से मंजूर इकतरफा प्रतिबंधों का भी विरोध करता है.

11 - सभी पक्षों को ये समझना चाहिए कि मौजूदा आर्थिक व्यवस्था को बनाए रखने की ज़रूरत है और किसी को भी राजनीतिक कारणों से वैश्विक अर्थव्यवस्था का इस्तेमाल एक हथियार की तरह नहीं करना चाहिए. मौजूदा संकट का असर ऊर्जा, वित्त, अनाज के व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन पर न पड़े इसकी कोशिश की जानी चाहिए.

12- युद्ध के कारण जो तबाही हुई है उससे उबरने के लिए अंत्तरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह से स्थानों में ख़ास काम करने की ज़रूरत है. ज़रूरत पड़ने पर चीन इसमें साथ देने के लिए तैयार है और वो इसमें सकारात्मक भूमिका निभाएगा.

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वीडियो कैप्शन, यूक्रेन में पुतिन और रूस की मुसीबत जानिए

मुल्कों की प्रतिक्रिया

पश्चिमी मुल्कों की तरफ से चीन के इस पीस प्लान पर मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है.

पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन नेटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने कहा कि चीन "भरोसेमंद नहीं है" क्योंकि "उसने अब तक यूक्रेन पर हुए इस गैर-क़ानूनी हमले की आलोचना नहीं की है."

24 फ़रवरी 2022 को व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ विशेष सैन्य अभियान की घोषणा की थी.

शुरूआती दिनों में रूसी सेना ने यूक्रेन के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में बढ़त बना ली थी. लेकिन राजधानी कीएव पर हुए हमले का यूक्रेन ने डटकर जवाब दिया जिसके बाद के दिनों में हुए युद्ध में यूक्रेन कई हिस्सों से रूसी सेना को पीछे धकेलने में कामयाब रहा.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ये यूरोप में सबसे भीषण संघर्ष है और हाल के दिनों में ये और तेज हो गया है.

वहीं चीन के पीस प्लान देने के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन के क़रीबी दोस्त बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लूकाशेन्को ने कहा है कि वो चार दिन के चीन दौरे पर जाएंगे. उनका ये आधिकारिक दौरा फरवरी 28 से लेकर मार्च दो तारीख कर होगा.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: अमेरिका को जवाब देने के लिए एकजुट हो रहे रूस और चीन?

क्या बोले ज़ेलेन्स्की?

शुक्रवार को कीएव में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने कहा कि अगर हमारे सहयोगी "अपने वादों और समयसीमाओं का सम्मान करें" तो हम ये मान सकते हैं कि "जीत बेसब्री से हमारा इंतज़ार कर रही है."

पोलैंड ने कहा है कि उसने जर्मनी में बने लैपरर्ड-2 टैंक यूक्रेन को दिए हैं और इस तरह के और टैंक उस तक पहुंचाने की कोशिश में लगा हुआ है.

दूसरी तरफ जर्मनी ने कहा है कि वो लियोपार्ड टैंक यूक्रेन को देगा. इसके अलावा कनाडा और स्पेन ने भी यूक्रेन को टैंक देने का वादा किया है.

अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष में यूक्रेन को सबसे अधिक सैन्य मदद अमेरिका ने दी है. उसने वादा किया है कि वो यूक्रेन को 31 एम1 अब्राम्स टैंक भेजेगा. ब्रिटेन ने कहा है कि वो यूक्रेन को 14 चैलेन्जर 2 टैंक देगा.

ज़ेलेन्स्की ने कहा कि अफ़्रीका और लातिन अमेरिका मुल्कों के साथ यूक्रेन अच्छे से बात नहीं कर पाया है. उन्होंने कहा, "हमने बीते सालों में उनके साथ बहुत काम नहीं किया, इस पर हमने ध्यान नहीं दिया. मुझे लगता है कि ये बड़ी ग़लती थी."

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युद्ध के एक साल पूरे होने के एक दिन पहले फरवरी 23 को संयुक्त राष्ट्र आम सभा में रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाया गया. इसमें मांग की गई कि रूस जल्द से जल्द यूक्रेन से बाहर निकले.

प्रस्ताव के पक्ष में 141 वोट पड़े, इसके विरोध में 7 वोट पड़े.

लेकिन इसमें जिन मुल्कों ने वोट करने से इनकार कर दिया था उनमें से कई अफ़्रीका और लातिन अमेरिका से हैं.

यूएन में वोटिंग

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ज़ेलेन्स्की से जब ये सवाल किया गया कि उनके लिए युद्ध का सबसे बुरा वक्त कौन सा था उन्होंने कहा कि कीएव के बाहर बसे बूचा पर रूस का कब्ज़ा उनके लिए दुखी करने वाला था. युद्ध के शुरुआती दौर में रूसी सेना ने बूचा पर कब्ज़ा किया था, रूसी सेना पर यहां बड़ी संख्या में आम नागरिकों को मारने का आरोप लगा था.

बाद में यूक्रेन ने इसे छुड़ाने के लिए बड़ा अभियान छेड़ा और बीते साल अप्रैल में इसे रूसी सेना के कब्ज़े से आज़ाद कर लिया था.

इसके बारे में ज़ेलेन्स्की ने कहा, "मैंने वहां जो देखा वो दिल दहला देने वाला था."

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: ज़ख़्मों से कराहता यूक्रेन का बूचा शहर

रूस पर और प्रतिबंध लगाए गए

युद्ध शुरू होने के एक साल पूरे होने के मौक़े पर अमेरिका ने एक तरफ रूस पर और नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है, तो दूसरी तरफ यूक्रेन के लिए और मदद की घोषणा की है.

अपने ताज़ा प्रतिबंधों में अमेरिका ने रूस से जुड़े रूस में और दुनिया भर में मौजूद 100 लोगों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका ने कहा कि वो प्रतिबंधित सामान रूस तक पहुंचाने वाले सभी ज़रियों का रास्ता बंद करना चाहता है.

व्हाइट हाउस ने यूक्रेन के लिए कुल 12 अरब डॉलर की मदद का ऐलान किया है. इसके तहत रक्षा मंत्रालय दो अरब डॉलर मूल्य के गोलाबारूद और ड्रोन जैसे हथियार यूक्रेन को मुहैया करेगा जबकि विदेश मंत्रालय यूक्रेनी सरकार के बजट के लिए 10 अरब डॉलर की सहायता देगा.

यूक्रेन और उसके पड़ोसी मॉलडोवा के ऊर्जा ढांचों को मज़बूत करने के लिए अतिरिक्त 55 करोड़ डॉलर के पैकेज की घोषणा की है.

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मॉलडोवा यूरोप के सबसे ग़रीब मुल्कों में से एक है और युद्ध के कारण वो बुरी तरह प्रभावित हुआ है. यहां के नेताओं ने बार-बार चेतावनी दी है कि रूस यहां की सत्ता हथियाना चाहता है.

कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कीएव जाकर ज़ेलेन्स्की से मुलाक़ात की थी. ये एक सरप्राइज़ दौरा था.

शुक्रवार को यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है और सैन्य और नागरिक दोनों के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक को लेकर पाबंदियां लगाई हैं. ये दसवीं बार है जब संघ ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं.

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