रूस-यूक्रेन युद्ध: एक साल के उतार-चढ़ाव और क्या होगा आगे

रूस-यूक्रेन युद्ध

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

यूक्रेन पर रूस के हमले का पूरा एक साल हो गया है. रूस ने 24 फ़रवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद से रूस का यह सबसे बड़ा युद्ध है. हालांकि रूस इसे युद्ध नहीं बल्कि 'स्पेशल सैन्य ऑपरेशन' कहता है.

दोनों तरफ़ से हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं. एक करोड़ 80 लाख से ज़्यादा लोग यूक्रेन छोड़ कर चले गए हैं.

यूरोप में उर्जा संकट और अफ़्रीक़ा में खाने पीने के सामान की क़ीमत आसमान छू रही है.

पिछले एक साल के दौरान युद्ध में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले. इसके अलावा लोग यह भी जानना चाहते हैं कि इस एक साल का लेखा जोखा क्या रहा और आने वाले दिनों में क्या हो सकता है.

यहां इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की जाएगी.

लेकिन सबसे पहले जानते हैं कि पिछले एक साल में कब-कब निर्णायक मोड़ आया.

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बाइडन और ज़ेलेन्सकी

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फ़रवरी, 2022: रूसी सेना ने यूक्रेन पर हमला किया और उसके सैनिक यूक्रेन की राजधानी कीएव के बाहरी इलाक़ों तक पहुंच गए.

मार्च, 2022: रूसी सेना ने खेरसोन पर क़ब्ज़ा कर लिया और मारियुपोल की महीनों तक चली घेराबंदी शुरू कर दी.

अप्रैल, 2022: कीएव से रूसी सेना पीछे हटने को मजबूर हुई और बूचा शहर में युद्ध अपराध के कई मामले समाने आए. यूक्रेन ने मोस्कवा नामक ब्लैक सी बेड़ा ध्वस्त कर दिया जो कि रूस के लिए पहला बड़ा सैन्य झटका था यहा.

मई, 2022: अजोवस्टाल स्टील फ़ैक्ट्री के भीतर से लड़ रहे यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी सेना के आगे सरेंडर कर दिया. तीन महीने के भीषण युद्ध के बाद मारियुपोल का पतन हुआ और रूस ने यूक्रेन के लाइमन शहर पर भी क़ब्ज़ा कर लिया.

जून, 2022: पश्चिमी देशों के हथियार और अधिक मात्रा में यूक्रेन पहुंचने लगे. यूरोपीय यूनियन ने आधिकारिक तौर पर यूक्रेन और मॉलडोवा को सदस्य बनाने की दावत दी. रूस ने सेवेरोडोनेत्सक शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया.

जुलाई, 2022: रूस ने ओलेनिवका शहर पर मिसाइल हमला किया. मारियुपोल में पकड़े गए यूक्रेन के सैनिकों को यहां रखा गया था. इस हमले में 53 लोगों की मौत हुई थी. तुर्की और यूएन ने मिलकर यूक्रेन से अनाज के निर्यात को सुनिश्चित करवाया. रूस ने उनपर हमले नहीं किए.

अगस्त, 2022: रूसी एयर बेस क्राइमिया में विस्फोट हुआ. रूस के लिए यह बड़ा झटका था. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के विशेषज्ञों ने यूक्रेन के शहर ज़ापोरिज्जिया स्थित परमाणु पावर प्लांट का निरिक्षण किया. उन्होंने सेफ्टी ज़ोन का सुझाव दिया लेकिन अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ.

रूस-यूक्रेन युद्ध

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सितंबर, 2022: पुतिन ने तीन लाख रिज़र्व सेना को लामबंद करने का आदेश दिया. इसके अलावा यूक्रेन के चार जगहों (डोनेटस्क, लुहांस्क, खेरसोन, ज़ापोरिज्जिया) को रूस में विलय करने के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किया. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्सकी ने क़रीब 6000 वर्ग किलोमीटर इलाक़े को रूसी सेना से वापस लेने का दावा किया. सितंबर में ही पुतिन ने कहा था कि अपनी सीमा की रक्षा के लिए वो सभी संभव उपाय का इस्तेमाल करेंगे. कुछ लोग इसे पुतिन के परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी कह रहे थे.

अक्टूबर, 2022: यूक्रेन ने क्राइमिया के पुल को उड़ा दिया जो कि क्राइमिया को रूस से जोड़ता है. रूस ने पहली बार ईरान निर्मित ड्रोन से हमला किया.

नवंबर, 2022: रूस ने खेरसोन से पीछे हटने की घोषणा की, नेटो ने एक बार फिर यूक्रेन को मदद करते रहने का आश्वासन दिया.

दिसंबर, 2022: युद्ध शुरू होने के बाद से पहली ज़ेलेन्सकी यूक्रेन से बाहर निकले और अमेरिका का दौरा किया.

जनवरी, 2023: रूस ने यूक्रेन के निप्रो शहर में रिहाइशी बिल्डिंग पर मिसाइल दाग़ा जिसमें 45 आम नागिरक मारे गए.

फ़रवरी, 2023: अमेरिकी राष्ट्रपित जो बाइडन अचानक यूक्रेन पहुंचे और यूक्रेन को मदद करते रहने का यक़ीन दिलाया.

एक साल में क्या हासिल हुआ

पुतिन और शी

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किंग्स कॉलेज लंदन में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्यापक और फ़िलहाल ओआरएफ़ के वरिष्ठ फ़ेलो प्रोफ़ेसर हर्ष पंत कहते हैं कि एक साल के बाद कुछ ख़ासें बातें बिल्कुल स्पष्ट हैं जिन्हें देखा जा सकता है.

-यूक्रेन कुछ हफ़्तों तो लड़ेगा लेकिन फिर रूस के आगे आत्मसमर्पण कर देगा लेकिन इस युद्ध ने रूस की सैनिक क्षमता की कलई खोल दी है.

-रूस के सैनिक सामर्थ्य पर सवाल उठने लगे हैं और उसकी साख बचेगी या नहीं, यही आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी.

-युद्द के कारण वैश्विक ध्रुवीकरण हुआ है जिसमें पश्चिमी देश एक तरफ़ लामबंद हैं और दूसरी तरफ़ रूस और चीन के बीच रिश्ते मज़बूत हुए हैं.

-ग़रीब देशों पर खाद्य और तेल संकट बढ़ गया है.

भारत के पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुनायत कहते हैं-

-यह ना केवल रूस और यूक्रेन बल्कि पूरी दुनिया और ख़ासकर विकासशील देशों के लिए विनाशकारी युद्ध रहा है.

-इसने दूसरे शीत युद्ध की शुरुआत कर दी है जिसमें पश्चिमी देश भी बराबर के ज़िम्मेदार हैं.

-भारत समेत दुनिया भर के क़रीब दो-तिहाई देश किसी एक ख़ेमे में रहे बग़ैर भी अपना काम चला सकते हैं.

-वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने के कारण दुनिया वैकल्पिक रास्तों और व्यवस्था की तलाश में है.

-कई देश में अपनी राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार करने पर विचार कर रहे हैं. दुनिया के सुपर पावर का ख़ौफ़ अब कम हो गया है.

आगे क्या होगा

हर्ष पंत कहते हैं कि फ़िलहाल इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि युद्ध रुक जाए क्योंकि कोई भी पक्ष इस समय किसी निर्णायक स्थिति में नहीं है. रूस पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता और यूक्रेन घुटने टेकने के लिए तैयार नहीं है.

राजदूत अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच नहीं बल्कि रूस और पश्चिम और दुनिया के उभरते हुए दो अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर के बीच है."

वो आगे कहते हैं, "अगर दुनिया के सुपर पावर नहीं चाहते कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो तो उन्हें बातचीत शुरू का रास्ता तलाशना होगा. शक्तिशाली देशों की दिक़्क़त यह रही है कि वो ख़ुद भी उन क़ानूनों का पालन नहीं करते हैं जिन्हें वो ख़ुद बनाते हैं."

उनके अुसार, भविष्य बहुत ही अनिश्चित है लेकिन फिर भी कुछ उम्मीद बनी हुई है.

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