बांग्लादेश बॉर्डरः पांच दिन बाद लौटाया युवक का शव, परिवार ने लगाए आरोप

भारत बांग्लादेश बॉर्डर

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भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर भारतीय इलाके में बांग्लादेशी युवक की मौत का मामला तूल पकड़ रहा है.

परिजन का आरोप है कि भटक कर भारतीय इलाक़े में पहुंच जाने पर युवक शाहिनुर रहमान शाहीन को गिरफ़्तार कर लिया गया और उसकी पिटाई की गई.

बांग्लादेश के उच्चायोग के हस्तक्षेप पर युवक की मौत के पांच दिन बाद शव सौंपा गया.

ये बताया जाता है कि गुरुवार की रात साढ़े दस बजे के करीब बेनापोल सीमा पर बांग्लादेश की बॉर्डर गार्ड फोर्स बीजीबी और बेनापोल पोर्ट थाना पुलिस को शव सौंपा गया था.

शव परिवार को सौंपे जाने के दौरान बीजीबी, आव्रजन पुलिस और मृतक के परिजन मौजूद थे.

परिजन का आरोप है कि शरीर पर चोट के कई निशान हैं और इससे लगता है कि उसे टॉर्चर किया गया था. आरोप लगाने के बावजूद पीड़ित के परिवार ने कोई मामला दर्ज नहीं कराया है.

उधर, बीएसएफ़ का दावा है कि शाहीन की मौत बीमार पड़ने से हुई.

बेनापोल चेकपोस्ट आईसीबी बीजीबी कैंप कमांडर सूबेदार नजरूल इस्लाम ने मीडिया को बताया कि बीएसएफ़ ने दोनों देशों के प्रशासन और उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद शव को पोर्ट पुलिस को सौंपा.

शाहिनुर रहमान शाहीन

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परिजन का आरोप

मृतक के परिजन के मुताबिक 11 दिसंबर को शाहीन बिना पासपोर्ट वीज़ा के बांग्लादेश के पुटखली बॉर्डर से भारत में दाखिल हुए.

उनका आरोप है कि उस दिन घोनरमठ कैंप में पेट्रोलिंग कर रहे बीएसएफ़ जवानों ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और पिटाई की.

बाद में उन्हें घुसपैठ के आरोप में बनगांव थाने को सौंप दिया गया.

गिरफ़्तारी की ख़बर लगते ही शाहीनुर रहमान के बड़े भाई अगले दिन 12 दिसंबर को भारत गए और हिरासत में शाहीन से मुलाकात की.

उन्होंने दावा किया कि तब शाहीन पूरी तरह स्वस्थ थे.

शाहीन से मिलने के बाद वो 13 दिसंबर को वापस लौट गए. तीन दिन बाद 16 दिसंबर को रिश्तेदारों को ख़बर मिली कि शाहीन की मौत हो गई है.

परिजन का कहना है कि भारतीय पुलिस ने भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों को फ़ोन पर मौत की ख़बर भेजी.

शाहीन के चचेरे भाई आज़ाद हुसैन ने कहा, 'पहले तो हमें यकीन ही नहीं हुआ कि उनकी मौत हो गई है. बड़े भाई उन्हें पूरी तरह स्वस्थ देख कर आए थे.'

परिजन ने शव पाने के लिए कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त का दरवाजा खटखटाया तब गुरुवार को शव सौंपा गया.

बंग्लादेश

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शरीर पर चोट के निशान

भारतीय पुलिस ने पीड़ित परिवार को बताया कि हिरासत में शाहीन को उच्च रक्तचाप हो गया था. बाद में एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई.

हालांकि, शाहीन के शरीर पर चोट के कई निशान थे और परिवार का आरोप है कि उन्हें 'टॉर्चर करके मारा गया.'

हुसैन ने कहा, 'शरीर में ऐसी कोई जगह नहीं जहां जख़्म न हों. शरीर को नहलाने वालों ने भी देखा कि कितने जख़्म हैं. उस पर पोस्टमार्टम के कट के निशान भी थे.'

शाहिनुर रहमान शाहीन को शुक्रवार को एक बजे दफनाया गया. उनके परिवार में उनकी पत्नी और पांच साल का बेटा है.

शाहीन की मां ने कहा, ''मेरे बेटे को जेल में डाल देते. उन्होंने उसे इतनी सज़ा क्यों दी? मेरा दिल रो रहा है. मैं अब क्या करूंगी? मैं अपने पोते और बहू को कैसे पालूंगी?"

हालांकि भारतीय पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम करा लिया था, लेकिन पुलिस या बीजीबी को इस बारे में कोई जानकारी नहीं कि रिपोर्ट में क्या है.

प्रताड़ना के आरोप लगाने के बावजूद पीड़ित के परिवार ने कोई मामला दर्ज नहीं कराया है.

हुसैन ने कहा, "मेरा भाई पहले ही जा चुका है. उसके साथ अन्याय हुआ. लेकिन हमारे पास मांगने के लिए कुछ नहीं है. हमें न्याय नहीं चाहिए. यह और बात है कि हमें अपने भाई का शव मिला. क्या आप हमें इंसाफ़ देंगे?"

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बीएसएफ को विरोध पत्र

वहीं, बीएसएफ ने बीजीबी को सूचित किया कि शाहिनुर रहमान शाहीन को वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण गिरफ़्तार किया गया था और घोनरमठ कैंप में गश्त कर रहे बीएसएफ जवानों ने बनगांव पुलिस को सौंप दिया था.

शाहीन को 16 दिसंबर की सुबह उत्तर चौबीस परगना ज़िले के बनगांव अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बीएसएफ़ का दावा है कि 17 दिसंबर की सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई.

21वीं बटालियन के कमांडिंग आफ़िसर लेफ्टिनेंट कर्नल तनवीर रहमान ने कहा, "बांग्लादेशी युवक को बीएसएफ़ ने बिना पासपोर्ट पकड़ा है, ऐसी कोई ख़बर बीजीबी को बीएसएफ़ ने तुरंत नहीं दी."

उन्होंने कहा कि हम एक विरोध पत्र सौंप चुके हैं कि बीएसएफ़ ने बीजीबी को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी?

उन्होंने कहा, "सीमा के दोनों ओर दो फौजें हैं. लेकिन वहां बांग्लादेशी नागरिक को हिरासत में लिया गया, वह बीमार हो गया, उसे जेल भेज दिया गया और वह मर भी गया, लेकिन हमें कुछ नहीं बताया गया. लेकिन बीएसएफ़ हमसे कह रही है कि उन्होंने अपने क़ानून के मुताबिक कार्रवाई की है.''

पीड़ित परिवार

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कठोर कार्रवाई नहीं की गई

लेकिन शाहिनुर रहमान शाहीन के शरीर पर इतने घाव कैसे हुए, उन्हें बीएसएफ़ ने, पुलिस ने या जेल में कहां टॉर्चर किया गया, इस बारे में बीएसएफ़ की तरफ से कोई सफ़ाई नहीं दी गई.

बीबीसी बांग्ला ने बार-बार इस संबंध में बीएसएफ़ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

पीड़ित के शरीर पर चोटों के बारे में न तो पुलिस और न ही बीजीबी स्पष्ट रूप से कुछ बता पाई.

अगर सीमा पर किसी बांग्लादेशी नागरिक को मार दिया जाता है, गोली मारी जाती है या टार्चर किया जाता है तो बीजीबी एक फ्लैग मीटिंग बुलाती है और विरोध का पत्र भेजा जाता है और अगर कोई पकड़ा जाता है तो प्रत्यर्पण की प्रक्रिया की जाती है.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सीमा पर हत्या और प्रताड़ना की ऐसी घटनाएं बार-बार होने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है क्योंकि इस संबंध में कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है.

बेनापोल के पुटखली यूनियन के चेयरमैन अब्दुल गफ़्फ़ार सरदार ने उम्मीद जताई कि सीमा पर ऐसी हत्याओं और टॉर्चर को रोकने के लिए सरकार ध्यान देगी.

उन्होंने कहा, ''इस तरह से बीएसएफ़ हमारे लोगों को ग़लत तरीक़े से बार-बार मारेगी. सरकार को इसका ख्याल रखना होगा. जब भारतीय लोग हमारी ओर आते हैं, तो हम उन्हें रोक कर उन्हें सूचित करते हैं. उनके पास पासपोर्ट नहीं होता है तो उसे जेल भेज दिया जाता है और फिर ज़मानत पर बाहर आता है और वे मार रहे हैं. ये कैसा इंसाफ़ है?"

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