नागरिकता संशोधन बिल क्या भारत और बांग्लादेश के बीच फूट की वजह बनेगा?- नज़रिया

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- Author, वीना सीकरी
- पदनाम, बांग्लादेश में भारत की पूर्व राजनयिक
बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने अपना भारत का दौरा रद्द कर दिया है.
उनका भारत नहीं आने को नागरिकता संशोधन बिल यानी कैब से जोड़ कर देखा जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि विरोध में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने ऐसा फ़ैसला लिया है.
यहां स्पष्ट करना ज़रूरी है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन भारत बाइलैटरल विजिट पर नहीं बल्कि मल्टीलैटेरल विजिट पर आ रहे थे.
वो किसी कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे थे और उस कार्यक्रम का विषय कुछ और था.
एक समाचार एजेंसी के मुताबिक विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने अपना दौरा रद्द करने की वजह देश के अंदरूनी हालात को बताया है.
उन्होंने यह भी कहा है कि उनके राज्य मंत्री और विदेश सचिव देश में नहीं हैं, ऐसे में उनका भारत आना संभव नहीं है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री के भारत न आने को नागरिकता संशोधन बिल यानी कैब से जोड़ना ठीक नहीं है.
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कंफ्यूजन
इससे पहले, मोमिन नागरिक संशोधन बिल यानी कैब को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर नाराजगी जता चुके हैं.
शाह ने संसद में कहा था कि बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न हो रहा है.
इस पर मोमिन ने कहा, ''जो वे हिंदुओं के उत्पीड़न की बात कह रहे हैं, वो ग़ैर-ज़रूरी और झूठ है. पूरी दुनिया में ऐसे देश कम ही हैं जहां बांग्लादेश के जैसा सांप्रदायिक सौहार्द है. हमारे यहां कोई अल्पसंख्यक नहीं है. हम सब बराबर हैं."
मुझे लगता है कि मोमिन का यह बयान किसी कंफ्यूजन में आया था. अमित शाह ने साफ़ किया था कि हिंदुओं के उत्पीड़न की बात वो वर्तमान की सरकार के संदर्भ में नहीं कर रहे हैं.
यह कंफ्यूजन भारतीय और बांग्लादेश की मीडिया ने और बढ़ाया और इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस पर स्पष्टीकरण जारी किया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "कैब को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्री की टिप्पणी को लेकर कंफ्यूजन है. हमने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को लेकर जो कहा है, वो सैन्य शासन के लिए कहा गया था. ये मौजूदा सरकार पर टिप्पणी नहीं है."
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भारत और बांग्लादेश के बीच बेहतर रिश्ते हैं और नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान यह और मजबूत हुआ है.
इस बात का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने अपने कंफ्यूजन भरे बयान के बाद कहा, "हमें (बांग्लादेशियों को) उम्मीद है कि भारत ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे हमारे दोस्ताना संबंध ख़राब हों. ये मसला हमारे समाने हाल ही में आया है और हम इसे ध्यान से पढ़ेंगे और उसके बाद भारत के साथ ये मुद्दा उठाएंगे."
कई लोग भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान को "डैमेज कंट्रोल" की तरह देख रहे हैं, जो बिल्कुल ग़लत है.
दूसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि भारत ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को ख़राब करने की कोशिश की है. मुझे लगता है कि यह भी एक ग़लत धारणा है.
अमित शाह ने संसद में यह स्पष्ट किया था कि बांग्लादेश की वर्तमान शेख हसीना सरकार का कैब से कोई लेना-देना नहीं है.

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मजबूत रिश्ते
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की तारीफ करते रहे हैं. बीते अक्टूबर के महीने में दोनों की मुलाकात हुई थी और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए थे.
सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि क्या कैब दोनों देशों के बीच के कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित करेगा.
मेरे ख्याल में द्विपक्षीय और कूटनीतिक रिश्ते कैब से प्रभावित नहीं होंगे. अगर कोई बात होगी भी तो दोनों देश के नेता मिलते रहते हैं, भारत यह स्पष्ट करेगा कि कैब बांग्लादेश के ख़िलाफ़ बिल्कुल नहीं है. हमारे संबंध उनके साथ बेहतर हैं और आने वाले समय में यह और अच्छा होगा.
और भारतीय सरकार भी नहीं चाहेगी कि इस रिश्ते में कोई बाधा आए. यह भारत का आंतरिक मामला है और जो लोग बांग्लादेश से पहले ही भारत आ चुके हैं, यह मामला उनसे जुड़ा है.
यह परेशानी दशकों से चली आ रही थी और कैब उन्हीं परेशानी को हल करने की कोशिश करेगा.
1947 और 1971 के समय बांग्लादेश से हिंदुओं का पलायन हुआ और उसके बाद भी वे आते रहे हैं. उनको स्थायित्व देना ही कैब का मकसद है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है.

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इतिहास
भारत के सहयोग से ही बांग्लादेश अपने अस्तित्व में आया.
नवंबर के महीने में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना पश्चिम बंगाल आई थीं. उस वक्त उन्होंने कहा था कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में भारत की ओर से दिए गए योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा था कि वह चाहती हैं कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते दोस्ताना और गर्मजोशी भरे बने रहें.
दोनों देशों के बीच इस तरह का विश्वास और भरोसा है तो जाहिर सी बात है न सिर्फ भारत बल्कि बांग्लादेश भी इसे गंवाना नहीं चाहेगा.
दोनों देशों के बीच न सिर्फ कूटनीतिक और राजनीतिक बल्कि व्यापारिक रिश्ते भी मजबूत हुए हैं और इसका प्रभावित हो पाना मुश्किल है.
(बीबीसी संवाददाता अभिमन्यु कुमार साहा से बातचीत पर आधारित)
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