नेपाल विदेश में रह रहे अपने लोगों से मदद मांगने को क्यों है मजबूर?

नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा

दक्षिण एशिया में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था बड़े ही कठिन दौर से गुज़र रही है. वहीं इसी कड़ी में एक और दक्षिण एशियाई और भारत के बेहद क़रीबी देश का नाम जुड़ता नज़र आ रहा है.

नेपाल की अर्थव्यवस्था में हालिया दिनों में काफ़ी गिरावट दर्ज की गई है और श्रीलंका की तरह ही नेपाल में भी इसके लिए विदेशी मुद्रा भंडार को ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

विदेशी मुद्रा की कमी से निपटने के लिए देश के वित्त मंत्री ने विदेश में रह रहे नेपाली लोगों से देश के बैंक अकाउंट में विदेशी मुद्रा जमा करने की अपील की है.

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद तेज़ी से बढ़ते तेल के दामों और खाद्य वस्तुओं के आसमान छूते दामों ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है.

कोरोना महामारी का नेपाल पर श्रीलंका की ही तरह काफ़ी बुरा असर पड़ा है क्योंकि इससे उसका पर्यटन उद्योग चौपट हो गया जिसके कारण विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई और उसका व्यापार घाटा भी काफ़ी बढ़ गया.

नेपाली मुद्रा

इस समस्या से निपटने के लिए नेपाल ने काफ़ी एहतियाती क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं. बीती 12 अप्रैल को नेपाल ने ग़ैर-ज़रूरी सामानों जैसे कार, कॉस्मेटिक्स और सोने के आयात को सीमित कर दिया था.

वहीं देश के केंद्रीय बैंक के गवर्नर को उनके पद से हटा दिया गया था. नेपाल के वित्त मंत्री का कहना है कि उन्हें 'हैरत' है कि इस मुद्दे की तुलना श्रीलंका के संकट से की जा रही है.

विदेश में रह रहे नेपाली कैसे कर सकते हैं मदद

नेपाल की कुल जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा विदेशों में रह रहे नेपाली लोगों से आता है. मध्य जुलाई से मध्य फ़रवरी के बीच उसमें भी 5.8 फ़ीसदी से लेकर 4.53 फ़ीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है.

नेपाल की अर्थव्यवस्था दुनिया की ऐसी पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जो विदेशों से पैसे भेजने वाले नागरिकों पर निर्भर है. पूरी दुनिया में तक़रीबन 30 से 40 लाख नेपाली प्रवासी रहते हैं.

इस बीच जानकारों का मानना है कि विदेशों में रह रहे नेपाली नेपाल को विदेशी मुद्रा भेजकर अर्थव्यवस्था की समस्याओं के समाधान में मदद कर सकते हैं.

उनका कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट नेपाल की अर्थव्यवस्था में कमी का एक अहम कारण है.

रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक़, नेपाल के वित्त मंत्री जनार्दन शर्मा ने कहा कि नेपाल विदेश में रह रहे लोगों से कह रहा है कि वो घरेलू बैंकों में फ़ंड्स जमा करें ताकि वित्तीय प्रणाली में तरलता बनी रहे और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके.

वित्त मंत्री जनार्दन शर्मा

इमेज स्रोत, TWITTER/JANARDAN SHARMA

इमेज कैप्शन, वित्त मंत्री जनार्दन शर्मा

नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक नारा बहादुर थापा का अनुमान है कि निवेश योग्य पूंजी की कमी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ सकता है.

उन्होंने कहा, "विदेशी मुद्रा की कमी देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रभावित कर सकती है. अगर विदेशों में रहने वाले नेपाली अपने खातों में पैसा जमा करें तो ऐसे समय में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सकता है."

पैसे कैसे भेज सकते हैं?

थापा का कहना है कि विदेश में काम करने वाले नेपाली अपने नेपाली खाते में डॉलर भेजकर विदेशी मुद्रा के दबाव में सुधार कर सकते हैं.

वर्तमान में विदेशों में रहने वाले नेपाली जो पैसा भेजते हैं उन पर उन्हें 12.03 फ़ीसदी तक ब्याज मिलता है. नेपाला में जमा राशि पर ब्याज दर 11.03 फ़ीसदी है. अगर कोई अब विदेशी मुद्रा भेजता है तो उसे पांच प्रतिशत तक की अतिरिक्त ब्याज दरों की पेशकश की जा सकती है.

थापा के मुताबिक़, इस तरह जमा की गई राशि से देश में विदेशी मुद्रा की कमी पूरी हो जाएगी और पैसा जमा करने वाले को भी इसका फ़ायदा होगा.

डॉलर

नेपाल के केंद्रीय बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर चिंतामणि शिवकोटी कहते हैं, "इसी राशि को विदेश में जमा करने पर ब्याज दर एक या आधे प्रतिशत तक सीमित है. जापान जैसे देश में ब्याज दर नकारात्मक है अगर आप इसे नेपाल में रखते हैं, तो आपको आकर्षक ब्याज दर मिलती है."

"इसलिए, नेपाल में पैसा रखने से उनकी आय में वृद्धि होगी और तरलता की कमी को कम करने में मदद मिलेगी."

दोनों पूर्व अधिकारी नेपाल को धन भेजने के लिए औपचारिक माध्यमों का उपयोग करने की आवश्यकता पर सहमत हैं.

विदेश में रह रहे नेपाली और क्या कर सकते हैं

कहा जाता है कि लंबे समय से विदेश में रह रहे नेपालियों को भी देश की यात्रा से लाभ होगा.

थापा समझते हैं कि ख़र्च के लिए वो जो विदेशी मुद्रा लाते हैं, उससे मदद मिलेगी.

नेपाली मुद्रा

इमेज स्रोत, Getty Images

उन्होंने कहा, "इसी तरह नेपाल को विदेशों में बढ़ावा दिया जा सकता है. इस तरह का प्रचार नेपाल में पर्यटन और निवेश को प्रेरित कर सकता है. अगर नेपाल में तत्काल कोई संकट नहीं है, तो भी यह दबाव के समय में मदद कर सकता है."

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक मंदी से नेपाल का अछूता रहना स्वाभाविक नहीं है.

शिवकोटि समझते हैं कि जब दुनिया भर में कीमतें बढ़ रही हैं तो नेपाल जैसे आयात-केंद्रित देश अधिक दबाव में हैं.

नेपाल में कैसे शुरू हुई समस्या

भारत और चीन के बीच बसी 'लैंडलॉक्ड कंट्री' नेपाल की आबादी 2.9 करोड़ है जो ईंधन समेत अपनी बहुत सी ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है.

रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी हुई और उसके बाद नेपाल की सरकारी तेल कंपनी नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

दूसरी ओर खाने की चीज़ों जैसे की सोयाबीन और पाम ऑयल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई. इसने देश की वार्षिक उपभोक्ता मूल्य आधारित महंगाई को मार्च के मध्य में 7.1 फ़ीसदी बढ़ा दिया जो कि बीते तीन सालों से औसतन 5.18 फ़ीसदी थी.

बढ़ते दामों और बढ़ते आयात बिल ने व्यापार घाटे पर असर डाला जिससे देश की विदेशी मुद्रा भंडार पर भी काफ़ी असर पड़ा.

नेपाल के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, मध्य फ़रवरी तक बीते सात महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार 16 फ़ीसदी गिरकर 9.59 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. इससे नेपाल में यह भी डर आ गया है कि उसके सामने विदेशी क़र्ज़ों के भुगतान का संकट भी खड़ा हो सकता है.

ऐसा अनुमान है कि नेपाल के पास अभी जितनी विदेशी मुद्रा बची है उससे सिर्फ़ छह महीनों का आयात बिल ही भरा जा सकता है.

कॉपी - मोहम्मद शाहिद

ये भी पढ़ें..

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)