नेपाल की सीमा में अतिक्रमण कर रहा है चीन: रिपोर्ट

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- Author, माइकल ब्रिस्टोव
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
नेपाल सरकार ने पहली बार आधिकारिक रूप से दावा किया है कि चीन उसके इलाक़े में हस्तक्षेप कर रहा है. दोनों देशों की आपस में साझी सीमा है. बीबीसी को नेपाल सरकार की एक लीक रिपोर्ट मिली है जिसमें चीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है.
यह रिपोर्ट पिछले साल सितंबर में तब अधिकृत की गई थी जब दावे किए जा रहे थे कि पश्चिमी नेपाल के हुमला ज़िले में चीन अतिक्रमण कर रहा है.
नेपाल में चीनी दूतावास ने अतिक्रमण के दावों को ख़ारिज किया है. वहीं नेपाल सरकार ने बीबीसी के सवालों का अभी कोई जवाब नहीं दिया है.
अभी तक साफ़ नहीं है कि यह रिपोर्ट प्रकाशित क्यों नहीं की गई. हाल के वर्षों में नेपाल की सरकार ने भारत से रिश्तों को संतुलित करने के लिए चीन से रिश्ते सुधारने की कोशिश की थी.
इस रिपोर्ट के नतीजों से चीन से साथ सुधरते रिश्तों पर असर पड़ सकता है. नेपाल और चीन के बीच सरहद हिमालय पर्वत से क़रीब 1,400 किलोमीटर लगा है.
सीमा का निर्धारण
1960 के दशक की शुरुआत में दोनों देशों के बीच कई संधियों पर हस्ताक्षर से हुए थे. दोनों देशों की सीमा जहाँ लगती है, वे सुदूरवर्ती इलाक़े हैं और वहाँ पहुँचना बहुत आसान नहीं होता है.
ज़मीन पर सीमा का निर्धारण पिलर (खंभों) से किया गया है. ऐसे में कई बार नेपाल और चीन के इलाक़ों को समझना मुश्किल हो जाता है.

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हुमला ज़िले में संभावित चीनी अतिक्रमण की रिपोर्ट आने के बाद नेपाल की सरकार ने एक टास्कफ़ोर्स भेजने का फ़ैसला किया था. कुछ लोगों का दावा है कि चीन ने नेपाल के इलाक़े में कई इमारतों का निर्माण किया है. टास्कफ़ोर्स में पुलिस और सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे.
टास्कफ़ोर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सुरक्षाबलों ने नेपाली क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ बंद कर दी थीं. इस इलाक़े का नाम लालुंगजोंग है. यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है क्योंकि यह कैलाश पर्वत के पास है.
यह हिन्दुओं और बौद्धों के लिए पवित्र स्थल है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन नेपाली किसानों के चारागाह को सीमित कर रहा है.
कुछ इलाक़ों में यह भी पाया गया है कि चीन एक बॉर्डर पिलर के पास बाड़ बना रहा है और नेपाली इलाक़े में एक नहर के साथ रोड बनाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन टास्कफ़ोर्स ने पाया कि चीनी इमारतों को नेपाली इलाक़े में बनाने की बात कही जा रही थी, वे इमारतें चीन के इलाक़े में ही बनी हैं.
जाँचकर्ताओं ने पाया कि नेपाल के स्थानीय लोग अक्सर सीमा से जुड़े मुद्दों पर बात करने के लिए अनिच्छुक दिखते हैं क्योंकि इनमें से कई सीमा पार कर चीनी बाज़ार तक जाते हैं. रिपोर्ट में सिफ़ारिश की गई है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेपाली सेना की चौकी होनी चाहिए.
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेपाल और चीन को सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए निष्क्रिय पड़े तंत्र को फिर से सक्रिय करना चाहिए.
मानचित्र विशेषज्ञ और नेपाल सर्वे डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख बुद्धिनारायण श्रेष्ठ ने कहा कि सीमा के पास रह रहे लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि वे कहाँ हैं. नेपाली सीमा की सुरक्षा ये लोग ही ठीक से कर सकते हैं.
चीन अतिक्रमण से इनकार कर रहा है. यह अभी साफ़ नहीं है कि नेपाल के सीमाई इलाक़े पर नियंत्रण का इरादा क्यों है. कहा जा रहा है कि सुरक्षा एक कारण हो सकता है. ऐतिहासिक रूप से सीमा पर आवाजाही रही है. इनमें तीर्थयात्री और व्यापारी भी शामिल रहे हैं. लेकिन चीन लगातार इन आवाजाही को रोक रहा है.
पूर्व नेपाली राजनयिक विजय कांत कर्ण काठमांडू में एक थिंक टैंक के लिए काम करते हैं. उनका कहना है कि चीन शायद भारत को लेकर चिंतित हो. दोनों क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी हैं और दोनों के आपस में सीमा विवाद भी हैं.
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विजयकांत ने कहा, ''ऐसा लग रहा है कि वे बाहरी बलों की घुसपैठ को लेकर चिंतित हैं. ऐसे में वे नेपाल से लगी सीमा पर आवाजाही बंद करना चाहते हैं.''
चीन शायद विपरीत दिशा से आवाजाही को लेकर भी चिंतित है. नेपाल से चीन की ओर से तिब्बत की सीमा लगती है. तिब्बत से कई लोग चीनी दमन के कारण भागते हैं.
नेपाल में क़रीब 20 हज़ार तिब्बती शरणार्थी रहते हैं. कई तिब्बती भारत से भी नेपाल आते हैं. हाल के वर्षों में चीन ने तिब्बतियों के भागने के रास्ते बंद किए हैं.
नेपाल में चीनी अतिक्रमण की रिपोर्ट्स पिछले दो सालों से हैं. इन रिपोर्ट्स को लेकर राजधानी काठमांडू में विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं. हालिया प्रदर्शन पिछले महीने ही हुआ था.
नेपाल में चीनी दूतावास ने इसे लेकर पिछले महीने एक बयान जारी किया था.
चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा था, ''नेपाल से कोई सीमा विवाद नहीं है. उम्मीद है कि नेपाल के लोग फ़र्ज़ी रिपोर्ट से भ्रमित नहीं होंगे.''
हालांकि चीनी दूतावास ने इस अप्रकाशित रिपोर्ट को लेकर कुछ नहीं कहा है.
ऐसा कहा जा रहा है कि नेपाल सरकार ने बीजिंग के साथ सीमा विवाद उठाया है लेकिन ये नहीं बताया कि चीन ने क्या जवाब दिया.

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