भारत के प्रस्ताव पर नेपाल और बांग्लादेश सहमत पर भूटान की चुप्पी- प्रेस रिव्यू

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वस्तुओं के मुक्त ट्रांसपोर्टेशन और यात्रियों के आने-जाने के लिए मोटर वीहीकल्स एग्रीमेंट (MVA) को लेकर भारत, नेपाल और बांग्लादेश के बीच बैठक हुई है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि इस उप-क्षेत्रीय समूह को बांग्लादेश-भूटान-इंडिया-नेपाल (BBIN) का नाम दिया गया है लेकिन अभी तक भूटान ने इसमें शामिल होने की हामी नहीं भरी है और इस समझौते को लागू करने के लिए अगले दौर की वार्ता होनी है.
वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दूसरे उप-क्षेत्रीय समूह BIMSTEC (बे ऑफ़ बंगाल इनीशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कॉपरेशन) के सम्मेलन में शामिल होने के लिए मार्च के आख़िर में कोलंबो जाने वाले हैं. इस समूह में बांग्लादेश, नेपाल और भूटान शामिल हैं.
फ़रवरी 2020 के बाद BBIN की पहली बार इन-पर्सन मीटिंग हुई है. कोविड-19 महामारी के बाद MVA पर हुई इस बैठक में विभिन्न देशों के अधिकारियों ने यात्रियों और वस्तुओं की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "बैठक के दौरान भारत, बांग्लादेश और नेपाल के बीच BBIN MVA पर एक समझौता ज्ञापन हुआ है. MVA पर भूटान ने सहमति नहीं दी है."
इसमें आगे बताया गया है कि "MVA को लागू करने से BBIN देशों के बीच न केवल अधिक से अधिक उप-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यह इन देशों के बीच यात्रियों और कार्गो प्रोटोकॉल में मदद करेगा."

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भूटान क्यों नहीं हो रहा शामिल
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 7 और 8 मार्च को हुई इस बैठक में भूटान ने अपने दूतावास की एक 'निगरानी टीम' को यहां भेजा था जबकि बांग्लादेश, भारत और नेपाल के प्रतिनिधिमंडल में डायरेक्टर जनरल या जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी इसका नेतृत्व कर रहे थे.
असली BBIN MVA पर जून 2015 में सभी चारों देशों ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन स्थिरता और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर भूटान ने इस पर आपत्ति दर्ज की थी और फिर भूटान की संसद ने इस पर आगे न बढ़ने का फ़ैसला किया था.
2017 में तोबगे शेरिंग की सरकार ने बाक़ी तीनों देशों को इस परियोजना पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी थी.
साल 2020 में भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग ने 'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भूटान का 'वर्तमान आधारभूत ढांचा' और 'कार्बन नेगेटिव' बने रहने की शीर्ष प्राथमिकता के कारण MVA में उसका इसमें शामिल होना संभव नहीं है.
अधिकारियों का कहना है कि नवंबर 2021 में हुई बैठक में इस पर आगे बढ़ने का फ़ैसला किया गया था और भारत को 'उम्मीद' थी कि भूटान इस परियोजना पर अपना विचार बदल सकता है. हालांकि भूटान की ओर से अब तक इस पर कोई नए संकेत नहीं मिले हैं.
सात साल पुरानी इस परियोजना की रफ़्तार काफ़ी धीमी है. हालांकि, बांग्लादेश-इंडिया-नेपाल रूट पर अब तक यात्री बसों और कार्गो ट्रकों के कई ट्रायल रन हो चुके हैं. अंतिम प्रोटोकॉल तय किए जाने से पहले अभी भी कई समझौते होने बाक़ी हैं.
यूपी चुनाव के परिणाम से पहले सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा

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समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह ईवीएम की हैंडलिंग को लेकर हंगामा किया है. वाराणसी में मंगलवार देर रात सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया.
दैनिक जागरण अख़बार सपा कार्यकर्ताओं के हंगामे पर लिखता है कि मेरठ में हस्तिनापुर के सपा उम्मीदवार का दूरबीन से स्ट्रॉन्ग रूम पर नज़र रखने का फ़ोटो वायरल हुआ है.
अख़बार लिखता है कि सोमवार को सपा नेता रामगोपाल यादव ने एक्ज़िट पोल को 'मॉनिटर्ड' बताकर उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को सावधानीपूर्वक मतगणना कराने और ख़ासतौर पर पोस्टल बैलट की गणना में सतर्कता का निर्देश दिया था.
मंगलवार को ट्वीट कर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि कार्यकर्ता कैमरे लेकर तैयार रहें.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनआईए से पूछा- वरवर राव को स्थाई ज़मानत क्यों नहीं

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से पूछा कि यलगार परिषद-माओवादी संबंध मामले में अभियुक्त कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को चिकित्सा के आधर पर स्थायी ज़मानत क्यों नहीं दी जानी चाहिए.
अमर उजाला अख़बार लिखता है कि वरवर राव कई बीमारियों से पीड़ित हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी.
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने अदालत को राव की चिकित्सा रिपोर्ट के हवाले से उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी दी. ग्रोवर ने राव के पार्किन्संस बीमारी से पीड़ित होने का हवाला भी दिया.
इस पर न्यायमूर्ति एस.बी. शुक्रे की पीठ ने एनआईए से राव को चिकित्सा के आधार पर स्थायी ज़मानत को लेकर सवाल किया.
पीठ ने राव को तलोजा जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया. राव वर्तमान में अस्थायी चिकित्सा ज़मानत पर हैं.
दो साल बाद रूटीन अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं शुरू होंगी

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कोरोना महामारी की वजह से लगभग दो साल से रूटीन उड़ान प्रभावित रही हैं अब लंबे समय के बाद 27 मार्च से रूटीन अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं शुरू होने जा रही हैं.
दैनिक हिंदुस्तान लिखता है कि मंगलवार को सरकार ने यह ऐलान किया है. सरकार ने 23 मार्च 2020 को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद से 37 देशों के लिए विशेष उड़ानें ही संचालित हो रही थीं.
उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "कोरोना के मामलों में कमी और स्टेकहोल्डर्स की राय को देखते हुए 27 मार्च से नियमित उड़ानें संचालित करने का फ़ैसला किया गया है. इस कदम के साथ मुझे विश्वास है कि यह क्षेत्र नई ऊंचाइयां छू पाएगा."
मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया कि तेज़ी से हो रहे वैक्सिनेशन की वजह से यह संभव हो पाया है.
बयान में कहा गया है, "26 मार्च 2022 रात 11:59 बजे तक ही नियमित उड़ानें रद्द रहेंगी. इसके बाद नियमित उड़ानों को इजाज़त दी जा रही है."
बता दें कि दुनियाभर में कोरोना के मामलों में लगातार कमी आ रही है. वैक्सिनेशन की वजह से कोरोना की तीसरी लहर भी अब काबू में है और ख़त्म होने की कगार पर है.
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