भूटान-चीन में हुए अहम समझौते पर क्या कह रहा है चीनी मीडिया?

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चीन और भूटान के बीच गुरुवार को कई वर्षों से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक 'थ्री-स्टेप रोडमैप' के समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तख़त हुए हैं. इस समझौते को भारत के लिए एक बड़ी चिंता की बात बताया जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर चीन का मीडिया इसे एक बहुत बड़ी सफलता बता रहा है. भूटान और चीन ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए गुरुवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
चीन के सहायक विदेश मंत्री वू जांगखाओ ने चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा है कि MoU 'सीमा निर्धारण को लेकर बातचीत की रफ़्तार तेज़ करने और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को स्थापित करने में मदद करने में अर्थपूर्ण भागीदारी निभाएगा.'

इस बयान में भूटान के विदेश मंत्री का भी बयान शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भूटान 'MoU लागू करने के लिए चीन के साथ काम करेगा और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.'
भूटान के विदेश मंत्री ने भी इस समझौते पर एक प्रेस रिलीज़ जारी की है लेकिन दोनों ही पक्षों ने इस बातचीत को लेकर कोई रोडमैप नहीं जारी किया है कि वो क्या चर्चा करेंगे.
हालांकि, चीन का सरकारी मीडिया इस MoU को सीमा बातचीत में पहली बड़ी 'सफलता' बता रहा है. चीन और भूटान के बीच 1984 से अब तक 20 से अधिक राउंड की बातचीत हो चुकी है.
भारत के लिए यह चिंता की बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि चार साल पहले डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर चीन-भारत और भूटान आने सामने आ चुके हैं.
अब चीन का सरकारी मीडिया इस समझौते की तारीफ़ करते हुए कह रहा है कि इससे 'भारत के कारण पैदा हुआ गतिरोध टूटेगा.'

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क्या कह रहा है चीन का मीडिया
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने बाक़ायदा भारत का नाम लेते हुए शीर्षक लिखा है, "चीन-भूटान सीमा वार्ता पर MoU- 'भारत के कारण पैदा गतिरोध टूटेगा, राजनयिक संबंधों का मार्ग मज़बूत करेगा."
इस लेख में विभिन्न विश्लेषकों के हवाले से बताया गया है कि इस समझौता ज्ञापन का ऐतिहासिक महत्व है जो कि दोनों पक्षों की संयुक्त कोशिशों और सहयोग का परिणाम है.
ग्लोबल टाइम्स विशेषज्ञों के हवाले से लिखता है कि '2017 में डोकलाम में सीमा गतिरोध के समय जैसा हुआ वैसा अब करने की भारत से बहुत कम संभावनाएं या कारण हैं क्योंकि यहां पर चीन और भूटान के बीच अब महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं. लेकिन भूटान और चीन के बीच बातचीत जब महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंचेगी तो वो (भारत) इसमें बाधा पैदा कर सकता है.'
साउथ ईस्ट एशिया और ओसियानिया रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ कंटेंपरेरी इंटरनेशनल रिलेशंस रिसर्च अकेडमी ऑफ़ चाइना में साउथ एशिया के डिप्टी डायरेक्टर वांग शीडा अख़बार से कहते हैं कि यह MoU 'एक मील का पत्थर है और गतिरोध तोड़ने में मदद करेगा.'

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वो कहते हैं, "सीमा मामला चीन और भूटान के लिए बेहद ख़ास है क्योंकि इसका संबंध सिर्फ़ भूटान से ही नहीं बल्कि यह भारत-चीन संबंधों पर भी नकारात्मक असर डालता है."
"अगर चीन और भूटान सीमा विवाद को सुलझाने में प्रगति करते हैं तो भारत के पास सीमाई इलाक़ों में मुश्किलें पैदा करने के बहुत कम ही कारण बचेंगे."
डोकलाम और भारत-भूटान संबंधों का भी ज़िक्र
चीन के ग्लोबल टाइम्स अख़बार ने भूटान पर भारत का बेहद क़रीबी होने की बात भी विस्तार से लिखी है और साथ ही डोकलाम में गतिरोध पैदा करने के लिए भारत को ज़िम्मेदार बताया है.
अख़बार लिखता है कि भूटान उन दो देशों में से एक है, जिसके ज़मीनी सीमा विवाद आज तक चीन के साथ सुलझे नहीं हैं और भूटान हमेशा से भारत के प्रभाव में रहा है.
ग्लोबल टाइम्स के एक दूसरे लेख में लिखा गया है कि 'भूटान के चीन के साथ राजनयिक रिश्ते नहीं हैं और न ही उसके किसी भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के साथ राजनयिक रिश्ते स्थापित हैं.
यह बहुत अजीब है और यह सिर्फ़ भारत के कारण है जो लंबे समय से भूटान को नियंत्रित करता रहा है और उसका उस पर प्रभाव है, उसने (भारत ने) विदेश संबंध स्थापित करने से रोके रखा है.'

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चाइना इंस्टिट्यूट ऑफ़ कंटेपरेरी इंटरनेशनल रिलेशंस में इंस्टिट्यूट ऑफ़ साउथ एशियन स्टडीज़ के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वांग से अख़बार से कहते हैं कि 'चीन और भूटान के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत में देरी सिर्फ़ भारत के कारण होती रही है.'
"पिछले चरण की बातचीत के दौरान दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर एकमत होने के लिए सहमत थे लेकिन भारत को लगता है कि ये उसके हितों को कमज़ोर कर देगा, ख़ासकर के चीन-भूटान सीमा पर पश्चिमी सेक्शन में. भारत को लगता है कि इससे उसके सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ख़तरा पैदा हो जाएगा."
भारत को क्या है डर
भूटान चीन के साथ 400 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है और दोनों देशों ने विवाद को सुलझाने के लिए साल 1984 से अब तक 20 से अधिक दौर की सीमा वार्ता कर चुके हैं.

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जिन दो इलाक़ों को लेकर चीन और भूटान के बीच ज़्यादा विवाद है, उनमें से एक भारत-चीन-भूटान ट्राइजंक्शन के पास 269 वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा और दूसरा भूटान के उत्तर में 495 वर्ग किलोमीटर का जकारलुंग और पासमलुंग घाटियों का इलाक़ा है.
चीन भूटान को 495 वर्ग किलोमीटर वाला इलाक़ा देकर उसके बदले में 269 वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा लेना चाहता है. चीन जो इलाक़ा मांग रहा है, वो भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के क़रीब है.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे चिकन्स नैक भी कहा जाता है, वो भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वो पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचने के लिए भारत का मुख्य रास्ता है और अगर चीनी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के क़रीब आते हैं तो यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी के लिए ख़तरा बन सकता है.
चीन और भूटान के बीच 'थ्री-स्टेप रोडमैप' को लेकर क्या समझौता हुआ है इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है लेकिन वांग से ग्लोबल पोस्ट अख़बार से कहते हैं कि 'यह रोडमैप चीन-भारत सीमा बातचीत के सिद्धांतों के अनुरूप ही होगा.
इसका अर्थ है कि पहले दोनों के बीच सीमा निर्धारण के बुनियादी राजनीतिक सिद्धांतों को स्थापित किया जाएगा, इसके बाद ख़ास विवादों को निपटाया जाएगा, समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और नई सीमा निर्धारित कर दी जाएगी.'

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2017 में डोकलाम विवाद के बाद चीन ने रणनीतिक रूप से अहम भारत-चीन-भूटान ट्राइजंक्शन पर मौजूद डोकलाम पठार में अपनी उपस्थिति को मज़बूत किया है.
भारत और भूटान के विरोध के बावजूद चीन ने डोकलाम पठार में सड़कों का निर्माण किया है और पिछले साल चीनी मीडिया ने भूटान और चीन के बीच विवादित डोकलाम के क्षेत्र में नए बनाए गए गांवों की तस्वीरें भी साझा की थीं.
वहीं साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अख़बार से सिंगुआ यूनिवर्सिटी के चिएन फ़ांग ने कहा है कि इस समझौते के तहत 'पहले एक फ़्रेमवर्क बनाया जाएगा, इसमें ख़ास-ख़ास विवादित मुद्दों को एक-दूसरे के नक़्शों के साथ चर्चा के लिए रखा जाएगा और फिर उसके बाद इसके समाधान का चरण होगा.'
भारत ने इस समझौते पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है.
हालांकि इस समझौते पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, "हमने आज भूटान और चीन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने को नोट किया है. आप जानते हैं कि भूटान और चीन 1984 से सीमा वार्ता कर रहे हैं. भारत भी इसी तरह चीन के साथ सीमा वार्ता कर रहा है."
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