रूस-यूक्रेन संकट से दूर लैटिन अमेरिका में कैसे अपने पांव पसार रहा है चीन

चीन और लैटिन अमेरिका

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इमेज कैप्शन, वेनेजुएला सहित लैटिन अमेरिका के कई देशों में चीन ने अपनी पैठ बीते कुछ सालों में काफ़ी बढ़ाई है
    • Author, पास्कल फ़्लेचर
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

एक तरफ जब दुनियाभर की नज़रें रूस और यूक्रेन तनाव पर हैं, तो दूसरी तरफ़ चीन भौगोलिक रूप से अमेरिका के बेहद क़रीब लातिन अमेरिका में अपने पांव मज़बूत कर रहा है.

नेटो के मुद्दे को लेकर रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने हज़ारों सैनिक तैनात कर दिए हैं और आशंका जताई जा रही है वो कभी भी यूक्रेन के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इस तनाव के चलते दुनिया भर की, ख़ास कर पश्चिमी मुल्कों की नज़रें यूक्रेन पर टिकी हैं.

इस तनाव के बीच लातिन अमेरिकी देशों की स्थानीय मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि अमेरिका के दक्षिण में बसे मुल्कों में बीते हफ़्तों में चीनी कूटनीतिज्ञों और व्यापारियों के दौरे बढ़े हैं.

ऐसी भी ख़बरें हैं कि कई केंद्रीय और दक्षिण अमेरिकी देशों की सरकारों ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट रोड इनिशिएटिव में शामिल होने के समझौते किए हैं. साथ ही स्थानीय मीडिया में लातिन अमेरिकी देशों के नेताओं के चीन दौरों के बारे में भी लिखा जा रहा है.

हाल में अर्जेंटीना और इक्वाडोर के राष्ट्रपतियों ने अमेरिका के कूटनीतिक बहिष्कार को नज़रअंदाज़ कर शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की.

बढ़ती नज़दीकी

अर्जेंटीना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए क़र्ज़ के भुगतान को लेकर अमेरिकी मदद के लिए चर्चा कर रहा है. इस बातचीत के बीच अर्जेंटीना के वामपंथी राष्ट्रपति अलबर्टो फर्नांन्डेज़ ने फ़रवरी की शुरूआत में रूस और चीन का दौरा किया.

उनके ये दौरे विवादों में रहे. अपने दौरे के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अमेरिका पर देश की "निर्भरता कम करने" को लेकर चर्चा की.

इक्वाडोर के राष्ट्रपति गुलेर्मो लासो मेन्डोज़ा भी नशे का कारोबार कर रहे गिरोहों से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद चाहते हैं. वो भी क़र्ज़ को लेकर चीन के साथ बातचीत कर रहे हैं.

केंद्रीय अमेरिका से अमेरिका की तरफ़ बड़ी संख्या में जाने वाले प्रवासी, यहां फैला नशे का कारोबार और भ्रष्टाचार अमेरिकी विदेश नीति के सिरदर्द बना हुआ है. ऐसे में हाल के दिनों में चीन ने वामपंथी शासन वाले निकारागुआ को ताइवान के साथ पारंपरिक तौर पर कूटनीतिक रिश्ते तोड़ने को मजबूर किया.

चीन ने अल साल्वाडोर और होन्डुरास के साथ भी अपने संबंध मज़बूत किए हैं. कुछ जानकारों की राय में अमेरिका का पारंपरिक 'बैकयार्ड' कहे जाने वाले इलाक़े में चीन अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

चीन और लैटिन अमेरिका

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इमेज कैप्शन, चीन ने लातिन अमेरिकी देशों से अपने संबंधों को बेहतर करने के लिए कोविड-19 वैक्सीन दान में देने की रणनीति का सहारा लिया

वैक्सीन, धन और तकनीक का सहारा

अधिकतर मामलों में चीन ने इन मुल्कों को अपने देश में बनी कोविड-19 वैक्सीन दान की है और उनकी अन्य ज़रूरतें पूरी की हैं. इससे इन मुल्कों के साथ चीन के बेहतर और मज़बूत कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बनने का रास्ता साफ़ हुआ है.

इस तरह के भी संकेत मिले हैं कि चीन ने अमेरिका और कुछ लातिन अमेरिकी मुल्कों के नेताओं के बीच मानव अधिकारों और गणतंत्र को लेकर जारी कूटनीतिक तनाव का फ़ायदा उठाया है.

उदाहरण के तौर पर अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले ने उनके कुछ नागरिकों पर अमेरिका के लगाए आर्थिक प्रतिबंध को 'बेतुका' बताया था. अमेरिका का आरोप था कि इक्वाडोर के सरकारी अधिकारियों और अपराधी संगठनों के बीच सौदेबाज़ी हुई है.

बीते दिनों में लातिन अमेरिका को निशाना बनाकर चीनी सरकारी मीडिया पर स्पैनिश और पुर्तगाली भाषा में संदेश भेजे गए हैं और इस इलाक़े में काम कर रहे चीनी कूटनीतिज्ञों के सोशल मीडिया अकाउंट पर अधिक जानकारी साझा की गई है.

साथ ही स्थानीय मीडिया में चीन को लेकर काफ़ी ख़बरें प्रकाशित हुई हैं. इनमें एक तरह ये देखा जा रहा है कि पश्चिमी गोलार्ध में चीन न केवल रणनीतिक रूप से अहम साझेदार के रूप में उभर रहा है बल्कि आर्थिक रूप से भी बड़ा खिलाड़ी बन कर सामने आ रहा है.

नौ फ़रवरी को ब्राज़ील के गाज़ेटा दो पोवो नाम के एक अख़बार में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार दोनों मुल्कों के बीच साल 2021 में व्यापार "ऐतिहासिक रिकॉर्ड" तक पहुंच गया.

वहीं आठ फ़रवरी को पेरू के एल पेरूआनो नाम के एक अख़बार में लिखा गया कि 2021 में लातिन अमेरिका के साथ चीन का व्यापार 450 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है जो अपने आप में "एक नया रिकॉर्ड" है.

एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी में जनवरी 2022 में हुई एक स्टडी में कहा गया कि स्थानीय नेताओं की मानें तो लातिन अमेरिका में ख़ासकर अर्थव्यवस्था और तकनीक के मामले में चीन का प्रभाव "काफ़ी अधिक है."

अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ

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इमेज कैप्शन, अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ

'कौन दोस्त, कौन दुश्मन?'

चीन बार-बार कहता रहा है कि वो 'बिना शर्त' मदद देने के लिए तैयार है भले ही वो कोविड वैक्सीन के रूप में हो या फिर ढांचागत सुधारों के लिए हो. अमेरिका का कहना है कि चीन किसी भी तरह से अपने भू-राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा करना चाहता है और इसके लिए पैसों का इस्तेमाल कर रहा है.

अल साल्वाडोर के मामले को इसी की मिसाल कहा जा रहा है. अमेरिकी सरकार गणतांत्रिक प्रक्रिया न अपनाने के लिए अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले की आलोचना करती रही है. इस आलोचना के बीच बुकेले ने घोषणा की कि साल 2021 के ख़त्म होने से पहले चीन देश में एक नेशनल स्टेडियम बनाएगा, जो उसकी तरफ़ से दान होगा.

इस बारे में ट्वीट कर उन्होंने पूछा, "दोस्त कौन है? वो इंसान जो आपको स्टेडियम, लाइब्रेरी, कन्वेन्शन सेंटर, बंदरगाह और पानी का प्लांट बना कर देता है या फिर वो जो आपको प्रतिबंधों की लिस्ट में शामिल कर आप पर प्रतिबंध लगाता है और आपके विरोधियों का वित्तपोषण करता है.''

साल्वाडोर की स्थानीय मीडिया के अनुसार विश्लेष्कों का कहना है कि बुकेले अमेरिका को उकसाने के लिए चीन की तरफ "हाथ बढ़ा" रहे हैं जो व्यापार के मामले में उसका सबसे बड़ा सहयोगी रहा है.

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लातिन अमेरिकी की ब्राज़ील, चिली, अर्जेंटीना जैसी कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चीन पहले ही द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिका से आगे बढ़ चुका है. पेरू और वेनेज़ुएला के मामले में भी ऐसा ही कुछ है. वहीं कोलंबिया, इक्वाडोर और अन्य जगहों पर चीन ने अभी अपनी पैठ बढ़ाना शुरू ही किया है.

ऐसा लगता है कि चीन का वाणिज्यिक पैंतरा अपनी विदेश नीति में दूसरों के साथ 'मल्टी लैटरल' संबंधों का विकास करना है. इसके लिए वो अमेरिका और उससे जुड़ी वित्तीय संस्थाओं पर मुल्कों की निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है, जैसा कि अर्जेंटीना के मामले में हो रहा है.

साथ ही क्यूबा, निकारागुआ और वेनेज़ुएला जैसी वामपंथी रुझान वाली सरकारों वाले देशों में पहले से मौजूद अमेरिका विरोधी भावना को बल देना है, जिसे अमेरिका ख़तरनाक मानता है.

चीन 'कम्युनिटी ऑफ़ लैटिन अमेरिकन एंड कैरीबियन स्टेट्स' (सीईएलएसी) जैसे क्षेत्रीय संगठनों के साथ भी अपने रिश्ते मज़बूत कर रहा है, जो 'मल्टी लैटरलिज़्म' (बहुपक्षीयता) पर यक़ीन करते हैं. इस संगठन का नेतृत्व फ़िलहाल अर्जेंटीना कर रहा है.

इस संगठन ने चीन की बेल्ट रोड इनिशिएटिव के साथ तो क़रार किया ही है बल्कि वेनेज़ुएला और क्यूबा के नेतृत्व वाली अमेरिका विरोधी एएलबीए के साथ भी समझौता किया है.

चीन और लैटिन अमेरिका

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इमेज कैप्शन, शिन्हुआ ने स्पैनिश भाषा में 'लिबेरोअमेरिका' (अमेरिका से आज़ादी) नाम का सेक्शन शुरू किया है

चीनी मीडिया और कूटनीतिज्ञ

अपनी स्पैनिश भाषा की सेवा में चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने 'लिबेरोअमेरिका' (अमेरिका से आज़ादी) नाम का सेक्शन शुरू किया है जिसमें लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों में चीन की कूटनीतिक कोशिशों की रिपोर्ट छापी गईं.

सात फ़रवरी को पीपल्स डेली स्पैनिश में एक लेख छपा जिसमें अर्जेन्टीना के चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने की बात की गई थी.

इसमें चीनी-लातिन अमेरिकी जानकार के हवाले से कहा गया था कि ब्राज़ील, मेक्सिको और कोलंबिया जो अब तक बेल्ट एंड रोड परियोजना का हिस्सा नहीं बने हैं वो भी इस मौक़े का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.

नौ फ़रवरी को चीन के सीजीटीएन एस्पानोल ने इक्वाडोर के राष्ट्रपति के चीन के साथ 2022 में एक "व्यापारिक समझौता" करने की संभावना पर चर्चा की गई थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन अपने देश में बनी साइनोवैक कोविड-19 वैक्सीन की 25 लाख डोज़ देने की योजना बना रहा है.

ताइवान और शिन्जियांग के मामले में मानवाधिकारों के हनन के पश्चिम के आरोपों के बीच चीनी दूतावास और कूटनीतिज्ञ लातिन अमेरिकी मुल्कों के साथ बेहतर होते अपने रिश्तों के बारे में छोटी से छोटी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं.

अर्जेंटीना में मौजूद चीनी दूतावास ने छह फ़रवरी को ट्वीट किया कि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति फ़र्नान्डेज़ चीन दौरे पर जाने वाले हैं. अर्जेन्टीना की स्थानीय मीडिया में उनके ट्वीट की कड़ी आलोचना हुई.

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'सैनिक बाद में, पहले व्यापारी'

लातिन अमेरिका के इलाक़े में चीन को ऐसे खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है जो ख़ुद को कूटनीति और व्यापारिक तौर पर पेश कर रहा है. हालांकि अमेरिका की चेतावनी है कि इसके बाद चीन के साथ सैन्य समझौते भी संभव हैं.

अर्जेन्टीना के स्तंभकार मारियो वीनफ़ील्ड वामपंथी विचारधारा से जुड़ी 'पैजीना 12' अख़बार में लिखते हैं.

छह फ़रवरी को एक लेख में उन्होंने कहा कि यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी मुल्कों के बीच तनातनी बढ़ रही है, लेकिन इसके बीच चीन ख़ुद को रूस से "अलग कर" पाने में कामयाब रहा है और "वो व्यापार के ज़रिए अपने पैर पूरे विश्व में पसार रहा है".

उनकी दलील थी कि अर्थव्यवस्था और इसमें छिपी संभावनाओं के मामले में चीन रूस के मुक़ाबले कहीं बड़ा है. उन्होंने लिखा, "वो पहले व्यापारी हैं और सैनिक बाद में. अमेरिका के लिए चीन फ़िलहाल सबसे बड़ी चुनौती है."

चीन के अलावा रूस और ईरान के साथ भी अमेरिका के तनाव को देखते हुए एक विश्लेषक ने लिखा कि ये तीनों अमेरिका को चुनौती देते हैं. निकारागुआ की विपक्ष के समर्थन वाली वेबसाइट 'हेक्टर शमीस' ने एक लेख लिखा जिसमें कहा कि चीन ढांचागत विकास और प्राकृतिक खनिजों पर ज़ोर दे रहा है.

उन्होंने लिखा, "ईरान ूर्जा, अवैध गतिविधियों और हिज़बुल्लाह के ज़रिए इस्लामी चरमपंथियों के साथ संबंधों पर ध्यान दे रहा है. रूस व्यापार और निवेश के मामले में न तो चीन से प्रतिस्पर्द्धा कर सकता है, न ही रूस से. उसकी अर्थव्यवस्था दोनों के मुक़ाबले छोटी है, लेकिन वो पुरानी उपनिवेशवादी नीतियों को जानता है और सैन्य इंफ़्रास्ट्रक्चर बना सकता है."

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