यूक्रेन तनाव: रूस-बेलारूस के संयुक्त सैन्य अभ्यास को अमेरिका ने बताया 'तनाव बढ़ाने की कोशिश'

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यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका के बीच रूस और बेलारूस ने 10 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है. इस सैन्य अभ्यास को अमेरिका ने मौजूदा स्थिति के बीच 'तनाव को और बढ़ाने' की कोशिश बताया है.
शीतयुद्ध के बाद बेलारूस में रूस के सैनिकों की सबड़े बड़ी तैनाती
बेलारूस, रूस का क़रीबी सहयोगी है और यह यूक्रेन के साथ लंबी सीमा साझा करता है. इस सैन्य अभ्यास को अमेरिका ने 'उकसावा' जबकि यूक्रेन ने 'मनोवैज्ञानिक दबाव' बनाने की कोशिश करार दिया है.
ऐसा माना जा रहा है कि यह शीत युद्ध के बाद से बेलारूस में रूस की सबसे बड़ी तैनाती है.
रूस ने यूक्रेन पर हमले की किसी भी योजना से बार-बार इनकार किया है लेकिन उसने सीमा पर एक लाख से ज़्यादा सैनिकों की तैनाती भी कर रखी है. वहीं अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश यह आगाह कर रहे हैं कि हमला किसी भी समय हो सकता है. मॉस्को का कहना है कि वह यह स्वीकार नहीं कर सकता है कि पूर्व में सोवियत यूनियन का हिस्सा और रूस से गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रखनेवाला यूक्रेन एक दिन पश्चिमी गठबंधन नेटो में शामिल हो जाएगा.
रूस 2014 से ही पूर्वी यूक्रेन में सशस्त्र विद्रोहियों को समर्थन दे रहा है.
इस तनाव को कम करने के लिए यूरोप के कई देशों के बीच गुरुवार को राजनयिक बातचीत होने की संभावना है.

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संयुक्त सैन्य अभ्यास में क़रीब 30,000 रूसी सैनिकों के हिस्सा लेने की संभावना
अमेरिका ने कहा कि बेलारूस के साथ सैन्य अभ्यास में क़रीब 30,000 रूसी सैनिक हिस्सा ले सकते हैं. बेलारूस के नेता अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के क़रीबी सहयोगी हैं.
क्रेमलिन ने बेलारूस में 2020 के विवादित चुनाव को लेकर उपजे प्रदर्शन में लुकाशेंको का समर्थन किया था. क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इस संयुक्त अभ्यास को गंभीर बताते हुए कहा कि रूस और बेलारूस 'अप्रत्याशित ख़तरे का सामना कर रहे हैं.'
रूस के यूरोपीय यूनियन के राजदूत व्लादिमीर चिजोव ने हालांकि, बीबीसी को बताया कि उनके देश को अब भी यकीन है कि कूटनीति यूक्रेन संकट को कम करने में मददगार हो सकती है.
उन्होंने कहा कि रूस के सैनिक मौजूदा समय में बेलारूस में हैं और अभ्यास के बाद अपने स्थायी बेस लौट जाएंगे.

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मिन्स्क समझौते की हो रही चर्चा
तनाव कम करने के उद्देश्य से गुरुवार को वार्ता की उम्मीद है और इसमें रूस और यूक्रेन के राजदूत के साथ फ्रांस और जर्मनी के राजदूत भी शामिल होंगे. इसे नॉर्मेंडी क्वार्टलेट के नाम से जाना जाता है.
इस दौरान तथाकथित मिन्स्क समझौते पर फिर से चर्चा हो रही है- जिसमें पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष ख़त्म करने की मांग है. जिसे मौजूदा संकट को शांत कराने के आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
मिन्स्क समझौता, पूर्वी यूक्रेन में सेना और रूस समर्थक अलगाववादियों के बीच संघर्ष विराम की बात कहता है. यूक्रेन, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने 2014-15 में समझौतों को समर्थन किया था.
अमेरिका में फ्रांस के राजदूत फ़िलिप एटियेन ने ट्वीट किया है कि मिन्स्क समझौते को 'एक व्यवहारिक राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए' इस्तेमाल किया जा सकता है.
ब्रिटेन के पीएम कर रहे हैं ब्रसेल्स और वॉरसॉ की यात्रा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन नेटो सहयोगियों के समर्थन में गुरुवार को ब्रसेल्स और वॉरसॉ की यात्रा करने वाले हैं.
जॉनसन की यह यात्रा कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा है.
विदेश मंत्री लिज ट्रुस और रक्षा मंत्री बेन वालेस भी अपने रूसी समकक्षों से मिलने वाले हैं.
यात्रा से पहले ट्रुस ने कहा कि वह यूक्रेन में लोकतंत्र और स्वतंत्रता के पक्ष में हैं और उनका इरादा मॉस्को से कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील करने की है.
मॉस्को बार-बार 'एंग्लो-सैक्सन' देशों को यूक्रेन के आसपास तनाव बढ़ाने का दोषी बताता है और यूक्रेन में कठपुतली सरकार बिठाने की क्रेमलिन की योजना के ब्रिटेन के दावे को हवा-हवाई करार देता है.

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इसी बीच जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ स्कोल्ज़ बाल्टिक देशों एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया के नेताओं से गुरुवार को बर्लिन में मिलेंगे. ये ऐसे छोटे नेटो सदस्य देश हैं जिनकी सीमा रूस से लगती है और वे पूर्व में सोवियत यूनियन का हिस्सा थे.
उन्होंने डैनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ बुधवार को एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमारा काम यूरोप में सुरक्षा सुनिश्चित करना है और मेरा विश्वास है कि हम यह हासिल कर पाएंगे.''
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