भारत की चीन पर निर्भरता इस हद तक क्यों बढ़ रही है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने पाँच फ़रवरी को हैदराबाद के एक मंदिर में रामानुजाचार्य की 216 फ़ीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया था.
इसे मोदी सरकार ने 'समता की मूर्ति' नाम दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पर तंज़ करते हुए 9 फ़रवरी को ट्वीट कर कहा, ''स्टैचू ऑफ इक्वालिटी चीन में बनी है. नया भारत क्या चीन पर निर्भर है?''
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस मूर्ति को चीन के एरोसन कॉर्पोरेशन ने बनाया है. राहुल गांधी को जवाब मोदी सरकार में संस्कृति मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने दिया.
रेड्डी ने कहा कि सरकार इस मूर्ति के निर्माण में शामिल नहीं थी. रेड्डी ने कहा कि यह एक निजी पहल थी और आठ साल पहले शुरू की गई थी. रेड्डी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के पहले से मूर्ति बन रही थी.
इस विवाद को छोड़ भी दें तो वो सारी बातें पुरानी हो गई हैं कि चीन भारत में लक्ष्मी, दुर्गा की मूर्ति से लेकर पतंग का मांझा तक बेचता है.
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चीन का विकल्प नहीं
दुश्मन पर कई मामलों में निर्भर होना कूटनीति में कमज़ोरी मानी जाती है. चीन को अगर भारत अपना दुश्मन मानता है तो यह भी एक कड़वा सच है कि भारत चीन पर काफ़ी हद तक निर्भर है.
दुनिया के कई देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें भारत भी शामिल है. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है.
तीन अगस्त 2017 को डोकलाम संकट पर तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि देश अब सामरिक क्षमता से नहीं जाने जाते बल्कि अब देश आर्थिक क्षमता से जाने जाते हैं. सुषमा स्वराज ने कहा था कि भारत की जो आर्थिक क्षमता बढ़ रही है, उसमें चीन से बहुत बड़ा निवेश आता है.
सुषमा स्वराज ने कहा था, ''मई 2014 से पहले चीन का निवेश 116 अरब डॉलर था जो आज बढ़कर 160 अरब डॉलर हो गया है. चीन ने भारत में भारी निवेश किया है और उनका रिस्क यहाँ ज़्यादा है.''
सुषमा स्वराज जो बात 2017 में कह रही थीं ठीक उससे अलग क़दम मोदी सरकार ने अप्रैल 2020 में एलएसी पर तनाव बढ़ने के बाद उठाया. इनमें चीनी निवेश पर निगरानी बढ़ाई गई. लेकिन इसके बावजूद भारत का चीन से आयात कम नहीं हुआ.

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रिकॉर्ड व्यापार
कोविड महामारी में सप्लाई चेन बाधित हुआ तो चीन पर निर्भरता और बढ़ गई. पिछले महीने व्यापार का डेटा जारी हुआ तो पता चला कि 2021 में भी चीन से भारत का आयात बढ़ा है. चीन से भारत का व्यापार तब बढ़ रहा है, जब दोनों देशों में तनाव है. बढ़ते व्यापार को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि दोनों मुल्कों के बीच सब कुछ सामान्य हो गया है.
चाइना जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ कस्टम (जीएसी) ने जनवरी में भारत से व्यापार का डेटा जारी किया था. इस डेटा के अनुसार, 2021 में भारत का चीन के साथ व्यापार 125.6 अरब डॉलर पहुँच गया.
यह पहली बार है, जब चीन के साथ व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुँचा है. इसमें भारत ने 97.5 अरब डॉलर का आयात किया है और निर्यात महज़ 28.1 अरब डॉलर का है. आयात और निर्यात दोनों रिकॉर्ड हैं.
2019 की तुलना में 2020 में चीन से भारत का व्यापार महामारी के कारण कम हुआ था. भारत का चीन से आयात लगातार बढ़ रहा है. भारत के लिए व्यापार घाटा एक पुरानी चिंता है और यह ख़त्म होने के बजाय बढ़ रही है.

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पूरी दुनिया निर्भर
लेकिन बात केवल भारत की नहीं है. पूरी दुनिया की निर्भरता चीन पर बढ़ी है. विली शिह हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल में प्रोफ़ेसर हैं. उन्होंने अमेरिका और चीन सप्लाई चेन मुद्दे पर ख़ूब लिखा है.
उन्होंने 24 अप्रैल 2020 को 'द अटलांटिक' के एक लेख में कहा था, ''मैन्युफ़ैक्चरिंग के मामले में दुनिया चीन पर निर्भर है. यह केवल मेडिकल आपूर्ति तक ही सीमित नहीं है बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, फ़र्नीचर, खिलौना और अन्य तमाम चीज़ों का चीन आधा ट्रिलियन का निर्यात करता है. अगर आप चीन से टकराने की चाहत रखते हैं तो नतीजों के लिए भी तैयार रहना चाहिए.''
अगर प्रतिशत में देखें तो पिछले साल की तुलना में चीन और भारत के बीच आयात-निर्यात दोनों बढ़ा है, लेकिन व्यापार घाटा भारत का है. व्यापार घाटे का मतलब है कि भारत चीन से ज़्यादा ख़रीद रहा है और कम बेच रहा है. भारत का चीन से आयात 46.2 प्रतिशत बढ़ा है जबकि निर्यात भी 34.2 फ़ीसदी बढ़ा है.
चीन से भारत इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल मशीनरी के अलावा कई तरह के केमिकल ख़रीदता है. ये केमिकल भारत के फ़ार्मा इंडस्ट्री के लिए अहम हैं. इसके अलावा ऑटो पार्ट्स और मेडिकल सप्लाई भी शामिल है.
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 2021 में इन सभी चीज़ों का आयात बढ़ा है. चीन से लैपटॉप और कंप्यूटर, ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर के अलावा एसिटिक एसिड का आयात रिकॉर्ड बढ़ा है. वहीं भारत मुख्य रूप से चीन को चावल, सब्ज़ियां, सोयाबीन, फल, कॉटन और सी फ़ूड बेचता है. भारत चीन को तैयार माल नहीं बेचता है.
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले अंग्रेज़ी दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत की फ़ार्मा इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और अन्य मटीरियल 50 से 60 फ़ीसदी चीन से आते हैं. जीएसी के अनुसार, 2021 में भारत चीन का 15वां बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा है.
पिछले पाँच सालों का डेटा देखें तो पता चलता है कि भारत का चीन से व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. 2017 में चीन से भारत का व्यापार घाटा 51 अरब डॉलर था जो 2021 में 69.4 अरब डॉलर पहुँच गया.

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सीमा पर तनाव लेकिन व्यापार में कमी नहीं
भारत का चीन से आयात तब बढ़ रहा है, जब दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव है. अप्रैल 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत ने चीन से स्पष्ट रूप से कहा था कि सीमा पर तनाव के साथ बाक़ी संबंध सामान्य नहीं रह सकते.
चीन से निवेश में कमी आई क्योंकि मोदी सरकार ने कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं. भारत ने 5G ट्रायल से चीनी कंपनियों को बाहर किया और 200 से ज़्यादा ऐप पर बैन लगाए. भारत स्थित चीन की स्मार्टफ़ोन निर्माता कंपनी शाओमी के रेड ब्रैंड पर असर हुआ. चीनी कंपनियों ने इसे लेकर आपत्ति भी जताई थी.
जेएनयू में सेंटर फ़ॉर चाइनीज़ स्टडीज के प्रोफ़ेसर बीआर दीपक ने बीबीसी हिन्दी से भारत की चीन पर बढ़ती निर्भरता को लेकर कहा था, ''भारत में चीनी मोबाइल का मार्केट बहुत बड़ा है. मोबाइल मार्केट में चीन का 55 से 56 फ़ीसदी का कब्ज़ा है. अब सैमसंग पीछे छूट गई है. चीन दिल्ली मेट्रो में भी लगा हुआ है. दिल्ली मेट्रो में एसयूजीसी (शंघाई अर्बन ग्रुप कॉर्पोरेशन) नाम की कंपनी काम कर रही है.''
बीआर दीपक ने कहा था, ''मेडिसिन के रॉ मटीरियल का आयात भी भारत चीन से ही करता है. इस मामले में भी भारत पूरी तरह से चीन पर निर्भर है. पिछले चार दशक में पश्चिमी तकनीक को चीन ने कॉपी किया और सस्ते में बेचा है.''
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में चीन से ट्रेड वॉर छेड़ा था, लेकिन इसके बावजूद 2021 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 755.6 अरब डॉलर का रहा. 2021 में दोनों देशों के व्यापार में 28.7 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसमें अमेरिका का निर्यात महज़ 179.53 अरब डॉलर ही है. चीन के कुल छह ट्रिलियन डॉलर के विदेशी व्यापार में केवल अमेरिका का योगदान 2021 में 12 फ़ीसदी रहा. अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं.
(कॉपी-रजनीश कुमार)
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