पाकिस्तान में इस्लामिक देशों के जुटने के मायने क्या हैं?

तालिबान शासन के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

इमेज स्रोत, @IslamicEmiirate

इमेज कैप्शन, तालिबान शासन के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

अफ़ग़ानिस्तान में गहराते मानवीय संकट और ढहती अर्थव्यवस्था को लेकर इस्लामिक देश रविवार को पाकिस्तान की संसद में जुटने जा रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर इसे अब तक की सबसे बड़ी बैठक बताया जा रहा है.

ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के विदेश मंत्रियों के परिषद के इस 'असाधारण सत्र' में मुस्लिम देशों के अलावा अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, जापान, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस समेत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं.

पाकिस्तान की संसद में इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा है

इमेज स्रोत, @SMQureshiPTI

इमेज कैप्शन, पाकिस्तान की संसद में इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शनिवार को ट्वीट किया कि OIC का यह सत्र अफ़ग़ान लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए है.

सऊदी अरब के प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान ने इस सम्मेलन की मेज़बानी का प्रस्ताव दिया था.

सत्र की शुरुआत से पहले इमरान ख़ान ने ट्वीट किया है, "OIC सदस्यों, पर्यवेक्षकों, दोस्तों, साझेदारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करता हूँ."

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

इसके बाद इमरान ख़ान ने कहा कि 'OIC के विदेश मंत्रियों के परिषद का यह असाधारण सत्र अफ़ग़ान जनता के साथ एकजुटता दिखाने की अभिव्यक्ति और अफ़ग़ानिस्तान में गंभीर होती मानवीय स्थिति पर हमारी सामूहिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए है.'

इसके साथ ही इमरान ख़ान ने कहा है कि वो सम्मेलन को लेकर उत्सुक हैं.

तालिबान शासन के विदेश मंत्री पहुँचे

इस्लामाबाद रवाना होने से पहले तालिबान शासन के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी

इमेज स्रोत, @IslamicEmiirate

इमेज कैप्शन, इस्लामाबाद रवाना होने से पहले तालिबान शासन के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पाकिस्तान पहुँच चुके हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में ख़राब होती मानवीय स्थिति और गहराते आर्थिक संकट पर हो रही इस बैठक पर मुत्तक़ी ने काबुल में पत्रकारों से कहा कि इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान के आर्थिक और मानवीय हालात पर चर्चा होगी.

इसके साथ ही मुत्तक़ी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य में दूसरे देशों से बनने वाले संबंधों पर भी बात होगी. उन्होंने कहा कि यह बैठक अफ़ग़ानिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया से 'इस्लामी अमीरात के संबंधों पर इसका सकारात्मक असर होगा.'

मुत्तक़ी ने कहा, "यह पहली बार है जब अफ़ग़ानिस्तान को लेकर इस्लामी देश इस तरह की कोई बैठक कर रहे हैं. दुनिया से हमारी ख़ास मांग ये है कि अफ़ग़ानिस्तान को मानवीय सहायता मुहैया कराने के साथ-साथ राजनीतिक समर्थन भी दिया जाए. हम अपने भविष्य के रिश्तों को लेकर भी बात करेंगे."

OIC के जवाब में भारत की बैठक?

एस जयशंकर आज ही मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एस जयशंकर आज ही मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे

इस्लामाबाद में आज जहाँ मुस्लिम देशों का जमावड़ा लगने जा रहा है, वहीं भारत में मध्य एशिया के मुस्लिम बहुल देशों के विदेश मंत्री दिल्ली में बैठक करने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि एक प्रकार से यह पाकिस्तान प्रायोजित OIC की बैठक का जवाब है.

इंडिया-सेंट्रल एशिया डायलॉग की एकदिवसीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर करने जा रहे हैं. इस बैठक में शामिल होने के लिए कज़ाख़स्तान, किर्गीज़ रिपब्लिक, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री दिल्ली आ रहे हैं.

यह सम्मेलन तीसरी बार आयोजित किया जा रहा है और इसमें क्षेत्र में व्यापार और कनेक्टिविटी के अलावा अफ़ग़ानिस्तान में हो रहे बदलावों पर चर्चा होगी.

इसके साथ ही ईरान में चाबहार बंदरगाह को लेकर भारत और मध्य एशिया के रूट को लेकर चर्चा गंभीर करने पर भी विमर्श होगा.

भारत में मध्य एशियाई देशों की यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन पाकिस्तान में 57 देशों वाले OIC के विदेश मंत्रियों की बैठक है और यह मध्य एशियाई देश OIC के भी सदस्य हैं.

इन मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों ने OIC की बैठक में जाने की जगह भारत आने को तरजीह दी है. यह दिखाता है कि भारत के इन मध्य एशियाई देशों के साथ अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर किस स्तर का सहयोग है.

मध्य एशियाई देशों और भारत की यह बैठक पिछली दफ़ा तब हुई थी जब अफ़ग़ानिस्तान पर 'ट्रॉयका प्लस' (अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान) की इस्लामाबाद में बैठक हुई थी.

पाकिस्तान क्यों कर रहा मेज़बानी?

शाह महमूद क़ुरैशी

इमेज स्रोत, @SMQureshiPTI

इस साल अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद देश के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

वहीं, देश की ख़राब होती स्थिति के बीच तालिबान दुनिया से अपनी मान्यता चाहता है ताकि उसकी बंद की गईं बैंकिंग संपत्तियों को दोबारा जारी किया जाए.

अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था अब तक विदेशी मदद पर ही टिकी थी और तालिबान के क़ब्ज़े के बाद वो विदेशी मदद भी बंद हो गई है. OIC की इस बैठक का एक अहम मुद्दा अफ़ग़ानिस्तान को आर्थिक सहायता मुहैया कराना भी है.

लेकिन इन सबके बीच पाकिस्तान अपनी हैसियत को और बढ़ाकर पेश करना चाहता है.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार 'द न्यूज़ इंटरनेशनल' में राजनीतिक टिप्पणीकार ज़ुनैरा इनाम ख़ान लिखती हैं कि पाकिस्तान असहनीय होती स्थिति को समझ रहा है क्योंकि कड़ाके की सर्दी में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को खाने की कमी और 30 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार बन सकते हैं.

OIC के महासचिव हुसैन ब्राहिम ताहा के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

इमेज स्रोत, @SMQURESHIPTI

इमेज कैप्शन, OIC के महासचिव हुसैन ब्राहिम ताहा के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

वो लिखती हैं, "पाकिस्तान ने 50,000 टन गेहूं और दवाइयां अफ़ग़ानिस्तान भेजी हैं लेकिन यह अफ़ग़ान लोगों की ज़रूरत के सागर में एक बूंद की तरह है. 90 के दशक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अपनाई गई त्याग की नीति ने अफ़ग़ान लोगों या इस क्षेत्र को कोई लाभ नहीं दिया था. केवल बातचीत और प्रोत्साहन देकर ही तालिबान को अपने वादों पर क़ायम रखा जा सकता है जो उन्होंने मानवाधिकारों को लेकर किए थे."

"अफ़ग़ानिस्तान संकट को नज़रअंदाज़ करने से गृह युद्ध, अशांति, अकाल और बीमारियां बढ़ेंगी और लोग पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए उमड़ेंगे. यह पाकिस्तान जैसे देशों पर भारी असर डालेगा जहां पर पहले से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी मौजूद हैं. यह सबसे मुख्य कारण है जो पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय देशों से अफ़ग़ानिस्तान संकट का हल निकालने के लिए मुखर है."

"OIC के सत्र का लक्ष्य व्यापक रूप से अफ़ग़ानिस्तान की समस्याओं और उसका समाधान खोजने के लिए है. इस बैठक का लक्ष्य केवल मदद का वादा करने का नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने का भी है कि अफ़ग़ान लोगों तक मदद पहुंचे. इसका लक्ष्य है कि मानवीय मदद की कोशिशों में OIC आगे रहे."

"चार महाद्वीपों में फैले 57 देश OIC के सदस्य हैं. यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है. OIC का सत्र दूसरे सदस्य देशों जैसे ईरान, तुर्की और सऊदी अरब की बात सुनने का एक मौक़ा भी देगा. माना जा रहा है कि इस बैठक से तालिबान को मान्यता शायद न मिले लेकिन मानवीय त्रासदी रोकने की दिशा में यह एक सही क़दम होगा."

अमेरिका के विशेष दूत थॉमस वेस्ट के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री (फ़ाइल फ़ोटो)

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, अमेरिका के विशेष दूत थॉमस वेस्ट के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री (फ़ाइल फ़ोटो)

पाकिस्तान की आलोचना भी

एक ओर जहाँ पाकिस्तान इस सम्मेलन के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान के मसले पर ख़ुद को चिंतित पक्ष की तरह पेश कर रहा है. वहीं कई लोगों का मानना है कि यह सिर्फ़ एक 'छलावा' है.

अफ़गानिस्तान के पूर्व उप-विदेश मंत्री महमूद सैकल ने ट्वीट किया है, "1980 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत क़ब्ज़े के बाद पाकिस्तान ने पहली बार OIC के विदेश मंत्रियों की काउंसिल का असाधारण सत्र आयोजित किया था. अब एक अधिक तटस्थ OIC सदस्य को अफ़ग़ानिस्तान पर पाकिस्तान के छद्म आक्रमण का 17वां सत्र आयोजित करना चाहिए था, जो कि OIC का संस्थापक सदस्य भी है."

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

"OIC सदस्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों की संख्या से एक चौथाई से अधिक हैं. सभी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 6 दिसंबर 2021 के फ़ैसले का सम्मान करने के लिए बाध्य हैं. इस फ़ैसले के दौरान अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधित्व को लेकर किए गए दावे को ख़ारिज कर दिया गया था."

"पाकिस्तान अपने प्रतिनिधि तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करने में हेरफेर करता है तो OIC अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ख़िलाफ़ खड़ा होगा. एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और गौरवान्वित अफ़ग़ानिस्तान के नेतृत्व को लेकर हमारा संघर्ष जारी रहेगा."

पाकिस्तान की विदेश नीति के लिए अहम

इमरान ख़ान

इमेज स्रोत, @IMRANKHAN

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन के रेज़िडेंट एडिटर फ़हद हुसैन लिखते हैं कि पाकिस्तान एक गति पैदा कर रहा है जो कि उसकी मुश्किल में फंसी विदेश नीति को भी आगे बढ़ा सकती है.

वो लिखते हैं कि OIC का यह सम्मेलन पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सौदा है क्योंकि एक मेज़बान होने के नाते पाकिस्तान इसके केंद्र में होगा और इससे जो कुछ हासिल होगा वो उसके श्रेय का दावा करेगा.

"यह मंच पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान में एक मुख्य खिलाड़ी होने के नाते उसकी प्राथमिकताएं दर्शाने का भी शानदार मौका देगा. इसके साथ ही यह रणनीति बनाने का भी मौका देगा जिससे वो इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के मुख्य संचालक के तौर पर दिखे."

"पाकिस्तान इस मंच के ज़रिए बहुत सी महत्वपूर्ण चीज़ें शुरू करने की अच्छी स्थिति में है. इसके साथ-साथ उसे अमेरिका और पश्चिमी देशों की उस नकारात्मक राय को बदलने में भी मदद मिलेगी जो उसको लेकर बनी हुई है कि उसने अमेरिका की हार में मदद की थी. इस राय के कारण पाकिस्तान के अमेरिका के साथ रिश्ते सुस्त पड़ गए हैं. अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत के साथ-साथ उनके रूसी समकक्ष भी इस बैठक में शामिल होंगे."

"उम्मीद है कि पाकिस्तानी अधिकारी इस मौक़े का इस्तेमाल अपनी कूटनीति को बेहतर करने के लिए करेंगे और इसके ज़रिए वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बनी नकारात्मक धारणा को नया रूप देंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)