श्रीलंकाई नागरिक की हत्या पर पाकिस्तानी पूछ रहे- हम क्या बन गए हैं?

सियालकोट

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पाकिस्तान के पंजाब के सियालकोट शहर में एक श्रीलंकाई नागरिक को ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डालने के बाद पूरी दुनिया के साथ-साथ पाकिस्तान में भी इसकी निंदा हो रही है.

एक ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इसे पाकिस्तान के लिए 'बेहद शर्मनाक दिन' बताया है तो वहीं दूसरी ओर इस मुल्क के लोग कह रहे हैं कि 'हम क्या बन गए हैं?'

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को सियालटकोट की एक फ़ैक्ट्री में काम करने वाले श्रीलंका के नागरिक प्रियांथा कुमारा को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला बाद में उनके शव को जला दिया.

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सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो और तस्वीरों के ट्रेंड होने के बाद राजनेताओं, राजनयिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी इस घटना पर ग़ुस्सा और ग़म ज़ाहिर किया है और देश में बढ़ते कट्टरवाद को लेकर सरकार को ध्यान देने को कहा है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने इमरान ख़ान के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा है कि यह बहुत दुखद दिन है.

उन्होंने लिखा, "मैं प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान सरकार की तुरंत कार्रवाई की सराहना करता हूँ. सियालकोट की घटना वाक़ई बहुत दुखद और शर्मनाक है और यह किसी भी तरह से धार्मिक नहीं है. इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो मॉब लिंचिंग की जगह विचारात्मक न्याय का सिद्धांत स्थापित करता है."

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'हम क्या हो गए हैं?'

पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़ारी ने ट्वीट करके घटना को 'भयानक और निंदनीय' बताया है.

उन्होंने लिखा, "भीड़ की हिंसा को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता है जबकि राज्य के पास हर तरीक़े के अपराधों से निपटने के लिए क़ानून मौजूद है. पंजाब सरकार की कार्रवाई मज़बूत और स्पष्ट होनी चाहिए."

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पाकिस्तान की मशहूर अभिनेत्री माहिरा ख़ान ने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से जवाब मांगा है.

उन्होंने ट्वीट किया, "शर्मनाक!! मैं बेहद ग़म और ग़ुस्से में हूं!! इमरान ख़ान आपसे न्याय और इससे होने वाले हमारे देश को ख़तरे को लेकर जवाब की उम्मीद है."

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पाकिस्तान की पत्रकार यूसरा असकरी ने इस घटना पर अफ़सोस जताते हुए ट्वीट में सवाल पूछा है, 'हम क्या हो गए हैं?'

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प्रसिद्ध इस्लामी स्कॉलर मौलाना तारिक़ जमील ने ट्वीट करके इस घटना की निंदा की है.

उन्होंने लिखा है, "सियालकोट में रसूल के नाम की आड़ में विदेशी को ज़िंदा जला देने की घटना बेहद अफ़सोसजनक है. सिर्फ़ आरोप के नाम पर क़ानून हाथ में लेना इस्लाम के ख़िलाफ़ है. इस्लाम में हिंसा और उग्रवाद की कोई जगह नहीं है. इस्लामी विद्वान कट्टरवाद को रोकने के लिए सकारात्मक भूमिका अदा करें."

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भारत और आरएसएस का किया ज़िक्र

पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता उसामा खिलजी ने ट्वीट किया है कि "सरकारी अधिकारियों समेत पाकिस्तानी आरएसएस के धार्मिक कट्टरवाद और उसकी भारत सरकार से नज़दीकी और मुसलमानों के ख़िलाफ़ उनकी भीड़ की हिंसा की निंदा करते रहे हैं. वैसी ही दिक्क़त पाकिस्तान में है और ये टीएलपी को बढ़ावा और माफ़ी देने के कारण सरकारी नीतियों की वजह से है. इसे देखिए."

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पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक आसिफ़ दुर्रानी ने ट्वीट किया है कि हर पाकिस्तानी का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए जो सियालकोट में हुआ है.

"अगर धार्मिक कट्टरपंथी इस तरह से व्यवहार करने लगेंगे तो आप नियम-क़ानून के बारे में भूल जाइये. ये आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीय फ़ासीवादियों से बिल्कुल भी अलग नहीं हैं."

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पाकिस्तान के पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने ट्वीट किया है कि 'सियालकोट की मॉब लिंचिंग पर जो घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए. वे सरकार को अस्थिर करने के लिए भीड़ का इस्तेमाल करते थे और अब हम देख रहे हैं कि भीड़ के शासन से देश के विवेक को मिटाया जा रहा है. यह तो सिर्फ़ शुरुआत है, आगे देखिए.'

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शान नामक एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है, "वो 11 साल पहले पाकिस्तान आए थे और राजको इंडस्ट्री में जनरल मैनजर थे. उन्होंने बीएससी (प्रोडक्शन इंजीनियरिंग) किया था. उन्होंने पाकिस्तान की सेवा की और अपनी क्षमता का सबसे अच्छा योगदान दिया. आज उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. क्या दुर्भाग्य है. RIP प्रियांथा कुमारा."

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पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर ने इस घटना में कथित तौर पर शामिल रहे कुछ युवाओं का एक वीडियो ट्वीट किया है जो पैग़ंबर मोहम्मद के अपमान पर इस्लाम का हवाला दे रहे हैं.

हामिद मीर ने लिखा है, "ईशनिंदा के अभियुक्तों को अदालत से सज़ा दिलवाने की बजाय उसे ख़ुद सज़ा देने पर फ़ख़्र करने वालों को ये नहीं मालूम है कि इस्लाम में लाश का अपमान और उसे जलाने की कोई गुंजाइश नहीं है."

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पत्रकार हमज़ा अज़हर सलाम ने एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है, "तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान का नारा लगाते हुए श्रीलंकाई मैनेजर प्रियांथा कुमारा की हत्या की ज़िम्मेदारी लेने वाले एक शख़्स को पंजाब पुलिस ने गिरफ़्तार किया है."

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सियालकोट में क्या हुआ?

सियालकोट पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि मृतक की पहचान प्रियांथा कुमारा के रूप में हुई है. वह सियालकोट के वज़ीराबाद रोड स्थित एक निजी फैक्ट्री में एक्सपोर्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे.

सियालकोट में अस्पताल के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि बुरी तरह जले हुए शव को उनके पास लाया गया था. अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक "शरीर लगभग राख हो गया है."

सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर किए गए हैं जिनके सियालकोट के वज़ीराबाद रोड के होने का दावा किया जा रहा है.

इन वीडियो में एक व्यक्ति का जला हुआ शरीर देखा जा सकता है. कुछ वीडियो में भीड़ एक व्यक्ति को जलाते हुए दिख रही है.

घटना के चश्मदीद मोहम्मद मुबाशिर के मुताबिक, फ़ैक्ट्री में सुबह से ही अफवाहें चल रही थीं कि प्रियांथा कुमारा ने ईशनिंदा की है.

"यह अफ़वाह बहुत तेज़ी से फ़ैक्ट्री में फैल गई थी. कर्मचारियों ने फ़ैक्ट्री के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था."

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उन्होंने कहा कि विरोध के दौरान बड़ी संख्या में लोग फिर से फ़ैक्ट्री में घुस गए और प्रियांथा कुमारा को न केवल प्रताड़ित किया गया बल्कि उन्हें आग भी लगा दी गई.

पाकिस्तान की रेस्क्यू सर्विस 1122 के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें लगभग 11:35 बजे वज़ीराबाद रोड पर दंगा होने के बारे में फ़ोन आया था और कुछ देर बाद टीम मौक़े पर पहुँच गई थी.

उन्होंने कहा, "जब हम वहाँ पहुँचे, तब पुलिस बल छोटा था और मृतक को फ़ैक्ट्री के अंदर हिंसा का निशाना बनाया गया था."

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सहायता कर्मी के मुताबिक़ हम वर्दी में थे और लोग बहुत ग़ुस्से में थे. वो कहते हैं, "हमारे लिए किसी भी तरह से पीड़ित को कोई सहायता देना संभव नहीं था और न ही किसी के लिए हस्तक्षेप करना संभव था. इस दौरान वे पीड़िता को प्रताड़ित कर सड़क पर ले आए थे."

सहायता कर्मी का कहना है कि उन्हें लगता है कि सड़क पर लाए जाने के समय पीड़ित की पहले ही मौत हो चुकी थी.

वो कहते हैं, "ग़ुस्साए लोग उन्हें सड़क पर ले आए, आग लगा दी और नारेबाज़ी की. पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ की तुलना में पुलिसवालों की संख्या बहुत कम थी."

रेस्क्यू वर्कर के मुताबिक दोपहर क़रीब साढ़े बारह बजे पुलिस टीम जले हुए शव को अस्पताल लेकर पहुंची.

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