अमरीका में काले लोगों की गुलामी की कहानी कहता जूनटींथ त्योहार

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जूनटींथ अमरीका का एक पुराना त्योहार है जो देश में दो दशकों से ज़्यादा समय की दास प्रथा ख़त्म होने का प्रतीक है.
इसकी शुरुआत 19 जून, 1866 से हुई थी.
अमरीकी मानवाधिकार संस्थाओं जैसे नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ कलर्ड पीपल (एनएएसीपी) ने जूनटींथ को आधिकारिक राष्ट्रीय त्योहार घोषित कराने के लिए लंबे समय तक पैरवी की.
इतनी कोशिशों के बावजूद अभी तक इसे राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया है.
लेकिन, इस साल हो रहे नस्लवाद विरोधी प्रदर्शन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित फ़ैसले का मतलब है कि इस वक़्त लोग पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक हैं.

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कैसे बना जूनटींथ?
ये नाम जून और नाइनटींथ (19) को मिलाकर बना है. ये वो तारीख़ है जब अमरीका में दास प्रथा का अंत हुआ था. इसे मुक्ति दिवस और स्वतंत्रता दिवस के रूप में भी जाना जाता है.
राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मुक्ति प्रस्तावना जारी की थी जिसने सभी दासों को औपचारिक रूप से दो साल पहले ही मुक्त कर दिया गया था. लेकिन इसे हकीकत बनने में समय लगा.
टेक्सास संघीय राज्यों में से एक था. दासों को रखने वाले एक राज्यों का समूह जो गृह युद्ध में अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ लड़े. टेक्सास सेना के सामने आत्मसमर्पण करने वाला और अफ़्रिकी अमरीकियों को दासता से मुक़्त करने वाला आख़िरी राज्य था.
जब तक यूनियन जनरल गॉर्डन ग्रेंजर ने गैल्वेस्टन शहर में दस्तावेज़ पढ़ा, तब तक युद्ध समाप्त हो गया था और संघीय राज्यों से सहानुभूति रखने वाले एक शख़्स ने थिएटर में अब्राह्म लिंकन की हत्या कर दी थी.

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जूनटींथ राष्ट्रीय अवकाश क्यों नहीं?
वर्तमान में 50 राज्यों में से 46 और डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया, जूनटींथ को आधिकारिक तौर पर मनाते हैं लेकिन नागरिक अधिकारों के संगठनों की सालों की पैरवी के बावजूद ये तारीख राष्ट्रीय अवकाश नहीं बन पाई.
पिछले कुछ दिनों में ऐपल, नाइकी और ट्विटर सहित कई कंपनियों ने इस दिन को अवकाश घोषित कर दिया है. इसके अलावा इस सूची में अमरीकी फ़ुटबॉल गवर्निंग बॉडी और नेशनल फ़ुटबॉल लीग भी शामिल है.
पिछले कुछ वर्षों में सैन फ्ऱांसिस्को फ़ोर्टी-नाइनर्स (49ers) के पूर्व खिलाड़ी कोलिन केपरनिक को परेशान करने के लिए एनएफ़एल की आलोचना की गई थी. केपरनिक ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के समर्थन में राष्ट्रगान के दौरान घुटनों पर बैठ गए थे.
न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार और अमरीका में गुलामी के इतिहास पर एक पुरस्कृत सीरिज़ की लेखक निकोल हेना-जोन्स, जूनटींथ को राष्ट्रीय समर्थन के लिए आवाज़ उठाने वालों में से एक थीं.
उन्होंने 11 जून को ट्वीट किया था, “अमरीका के पास हमारे आज़ादी के आदर्शों की विरोधी एक व्यवस्था के ख़त्म होने को लेकर एक मुक्ति दिवस नहीं है. हमने जो किया और हम कौन हैं, इसे पहचान मिलना अब भी बाकी है. जूनटींथ को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया चाहिए."

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डोनाल्ड ट्रंप और जूनटींथ विवाद
11 जून को जब अमरीका में बड़ी संख्या में नस्लवाद विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे, तब राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 जून को टुलसा शहर में रैली की घोषणा की. वह पहले ये रैली मार्च में करने वाले थे लेकिन कोरोना वायरस के कारण रोक लग गई.
इस तारीख़ के अलावा ट्रंप ने रैली के लिए जो जगह चुनी उसे लेकर भी हंगामा हुआ. टुलसा वो जगह है जहां 1921 में अश्वेत लोगों के साथ अमरीकी इतिहास का सबसे भयानक नरसंहार हुआ था.
ट्रंप ने कुछ दिनों बाद अपना विचार बदल दिया और रैली की तारीख़ को 20 जून कर दिया. उन्होंने कहा कि रैली के लिए जानबूझकर ये तारीख़ नहीं चुनी गई थी और वह इस दिन के सम्मान में रैली को स्थगित कर देंगे. लेकिन, रैली की जगह टुलसा ही बनी हुई है.
यह ओक्लाहोमा के सबसे बड़े शहरों में से एक है, जहां ट्रंप को 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में 65 फ़ीसदी से अधिक वोट मिले थे.

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जूनटींथ और 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन का संबंध
हाल के वर्षों में एक्टिविस्ट इस तारीख़ को लेकर जागरुकता बढ़ा रहे हैं. इसमें 'ब्लैक लाईव्स मैटर' आंदोलन के ज़रिए राष्ट्रव्यापी घटनाओं को प्रचारित किया गया है.
एक अमरीकी कॉमेडी सिरीज़ 'ब्लैक-इश' भी जूनटींथ थीम पर आधारित है. इसमें अमरीका की उच्च-मध्यम वर्गीय परिवार की ज़िंदगी को दिखाया जाता है.
जूनटींथ को राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर खुले तौर पर मान्यता देने की वकालत करने वाला इसका एक एपिसोड अक्टूबर 2017 में दिखाया गया था. इस एपिसोड को इस साल फिर से चलाया गया.
वर्तमान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और व्यवस्थित नस्लवाद को लेकर बढ़ती जागरुकता ने जूनटींथ के महत्व को और बढ़ा दिया है. शुक्रवार (19 जून) को और सप्ताहांत में पूरे अमरीका में सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

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क्या अमरीकी सरकार ने गुलामी के लिए मांगी माफ़ी ?
पूर्व अमरीकी राष्ट्रपित बिल क्लिंटन ने 1998 में अफ़्रिका की यात्रा के दौरान दास व्यापार के लिए माफ़ी मांगी थी. 10 साल बाद अमरीकी संसद ने एक माफ़ी जारी की जिसमें दशकों से काले अमरीकियों के ख़िलाफ़ अलगाव के क़ानून भी शामिल थे.
इसके बाद अमरीकी सीनेट इस कदम का पालन किया. लेकिन, कई लोगों के लिए इस माफ़ी से ख़ास फायदा नहीं हुआ.
अमरीका में दासों के वंशजों के लिए मुआवज़े की मांग होती है, लेकिन इस मुद्दे पर लोगों की राय काफ़ीी बंटी हुई है. पिछले साल हुए एक सर्वेक्षण में 74 फ़ीसदी काले अमरीकी इसके समर्थन में थे जबकि 85 फ़ीसदी गोरे अमरीकियों ने इसका विरोध किया था.
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