सीमा पर गोलीबारी के बाद भारत-नेपाल को बातचीत करनी चाहिए?
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Author, सुरेंद्र फुयाल
पदनाम, काठमांडू से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत और नेपाल के बीच पुराने सीमा विवाद को लेकर तनाव चल ही रहा था कि अब सरलाही ज़िले से लगने वाली भारत-नेपाल सीमा पर गोलीबारी की घटना की ख़बर आई है. इस घटना में दो भारतीय नागरिकों के घायल होने की भी ख़बर है. इसके बाद अब भारत-नेपाल के रिश्तों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
इससे पहले शनिवार को नेपाल की संसद के निचले सदन ने देश के नए राजनीतिक नक्शे को पारित कर दिया है. इसके बाद भारत ने इस नक्शे को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि "न तो ये ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है और न ही इसका कोई मतलब है."
इस नक़्शे में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है. छह महीने पहले भारत ने अपना राजनीतिक नक्शा जारी किया था जिसमें इन जगहों को भारतीय सीमा का हिस्सा दिखाया गया था.
जानकार मानते हैं कि पहले से जारी सीमा विवाद के बीच गोलीबारी की ताज़ा घटना दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ा सकती है.
घटना को लेकर आ रही जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है. लेकिन स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक़, नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (सशस्त्र प्रहरी बल) ने शुक्रवार सुबह कथित तौर पर सीमा पार कर रहे भारतीय नागरिकों पर उस वक़्त गोलीबारी कर दी, जब भारतीय समूह ने उनसे एक सेल्फ लोडिंग राइफ़ल छीनने की कोशिश की. हालांकि इस कहानी का भारतीय पक्ष अब तक साफ़ नहीं है.
तो अब बड़ा सवाल ये है: सीमा के नज़दीक इस तरह की घटनाएं क्या भारत-नेपाल के रिश्तों को नुक़सान पहुंचाएंगी? क्या ये क़रीबी रिश्तों या 'रोटी और बेटी' के रिश्ते को नुक़सान पहुंचाएंगी, जिसे सीमा के दोनों तरफ के लोग सदियों से निभाते आए हैं.
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं, कि ऐसा हो सकता है. नेपाली सुरक्षाबलों द्वारा सीमा पर गोलीबारी की घटनाओं के बारे में लोगों ने कम ही सुना होगा. ठीक वैसे, जैसे भारतीय सुरक्षाबलों की तरफ से गोलीबारी की घटनाएं सुनने में नहीं आती.
हालांकि उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, सिक्किम तक फैली 1,880 किलोमीटर लंबी और ज़्यादातार खुली भात-नेपाल सीमा पर छोटे-मोटे तनाव की ख़बरें आती रहती हैं.
जनकपुर धाम में रहने वाले रिटायर्ड प्रोफेसर सुरेंद्र लाभा ने बीबीसी हिंदी से कहा, "सीमावर्ती सरलाही में जो कुछ भी हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो रिश्तों में और तनाव आएगा. लिपुलेख सीमा विवाद को लेकर पहले ही दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा है."
भारत की एसएसबी और नेपाल की एपीएफ़ (सशस्त्र प्रहरी बल) ने अपनी-अपनी तरफ गश्त बढ़ाई है. हाल के हफ़्तों में नेपाल ने सीमा पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. नेपाल ने हिमालय की सीमाओं की रक्षा के लिए विवादित और अक्सर कम सैन्य मौजूदगी वाले लिपुलेख के दार्चुला के दक्षिण में छांगरू और हुम्ला के लिमी में नई एपीएफ़ टीमें भेजी हैं.
कोविड-19 महामारी के बीच दोनों देशों के बीच प्रवासी मज़दूरों का मूवमेंट काफ़ी बढ़ा है. नेपाल में काम करने वाले भारतीय और भारत में काम करने वाले नेपाली सीमा पार करने की कोशिश करते देखे गए हैं. और हाल के वक़्त में सीमा पर तनाव भी काफ़ी आम हो गया है.
दोनों देशों ने कोविड-19 से निपटने के लिए लॉकडाउन लागू किया. इसके बाद ऐसी कई घटनाएं सामने आईं कि नेपाल और भारत दोनों के सुरक्षाबलों ने भीड़ को मैनेज करने के लिए या किसी को सीमा पार करने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया.
हाल के हफ़्तों में, बारा, बर्दिया, झापा जैसे इलाक़ों में भारत-चीन सीमा पर तनाव की ख़बरें आईं हैं. वहां एपीएफ़ या एसएसबी ने लोगों की गतिविधियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया है.
11 मई को पूर्वी नेपाल के एपीएफ़ सुरक्षाबलों ने पूर्वी ज़िले झापा में भारतीय किसानों की भीड़ को रोकने के लिए हवा में गोलीबारी की थी. बताया जाता है कि वो किसान जबरन नेपाल की तरफ पड़ने वाले उन खेतों में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जहां उनकी फसलें लगी हैं.
बाद में स्थानीय स्तर पर भारत-नेपाल क्रॉस बॉर्डर बातचीत से इस मसले को सुलझा लिया गया था.
सरलाही के सीमावर्ती गांव से आने वाले नेपाली पत्रकार चंद्र किशोर शुक्रवार सुबह नारायणपुर बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुई घटना को लेकर चिंता जताते हैं और कहते हैं कि ऐसी घटनाएं दोनों देशों के बीच के क़रीबी रिश्तों को नुक़सान पहुंचा सकती हैं.
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'विवाद सुलझाने के लिए तंत्र विकसित हो'
चंद्र किशोर ने बीबीसी हिंदी से कहा कि गोलीबारी की ऐसी घटनाएं नेपाल-भारत के संबंधों पर शायद असर नहीं डालेंगी, लेकिन ये स्थानीय स्तर में या जनस्तर में रिश्तों पर बहुत बुरा असर डाल सकती हैं. दोनों तरफ के अधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षाबलों - एपीएफ़ और एसएसबी - को स्थानीय और क्रॉस बॉर्डर संवेदनशीलता के मामले में बेहतर तरीक़े से ट्रेन किया जाए.
वो कहते हैं, "इससे भी ज़रूरी ये है कि स्थानीय क्रॉस-बॉर्डर स्तर पर दोनों तरफ तंत्र और टेलिफ़ोनिक हॉटलाइन बनाई जाएं, ताकि दोनों तरफ के स्थानीय प्रतिनिधि मिलकर विवाद सुलझाने के लिए साझा तंत्र बना सकें. इसके साथ ही सीमा के दोनों तरफ के ज़िलाधिकारियों को भी आपस में बातचीत और सहयोग बनाए रखना चाहिए."
लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर बढ़ते विवाद के वक़्त में भारत-नेपाल के अब तक के रिश्ते सबसे ख़राब दौर में हैं. हालांकि दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश कोविड-19 की लड़ाई में साथ बने हुए हैं, इसके बावजूद भारत-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ते तनाव की वजह से नेपाल का फोकस अपनी सीमा सुरक्षा पर चला गया है.
8 मई को उत्तराखंड-गुंजी-लिपुलेख सड़क के उद्घाटन के कुछ वक़्त बाद नेपाल ने इतिहास में पहली बार दक्षिणी लिपुलेख के छांगरू गांव में एपीएफ़ की टुकड़ी भेजी.
नेपाल की सरकार ने अपने वार्षिक कार्यक्रम और नीति में सीमावर्ती इलाक़ों में एपीएफ़ सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ाने की योजना रखी है. ये ज़्यादातर वो सीमावर्ती इलाक़े होंगे, जो 1880 किलोमीटर भारत-नेपाल सीमा से लगते हैं. वहीं करीब दर्ज़न भर ऐसे हैं जो 1440 किलोमीटर लंबी चीन-नेपाल सीमा से लगते हैं.
रिटायर्ड प्रोफेसर सुरेंद्र लाभा मानते हैं कि बातचीत के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.
वो कहते हैं, "चाहे स्थानीय क्रॉस-बॉर्डर लेवल की बात हो या नेपाल और दिल्ली के बीच के अंतरराष्ट्रीय तनाव की बात, बातचीत के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. दोनों पक्षों को बातचीत को प्राथमिकता देनी होगी. नहीं तो स्थितियां और ख़राब होती जाएंगी."
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.