युद्ध के डर से उत्तर कोरिया के पड़ोसी घबराए

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- Author, देवांशु गौड़
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्र की मीडिया में दो सवालों को हवा दे दी है. पहला ये कि क्या युद्ध होगा और क्या किया जाना चाहिए?
चीन में सशस्त्र संघर्ष की संभावना को लेकर आशंका जताई जा रही है. सरकारी अख़बार चाइना डेली गुरुवार को कहा कि उत्तर कोरिया की धमकियों को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए.
अख़बारों में ये बहस जारी है कि ऐसे किसी संघर्ष को कैसे टाला जाए और इसे रोकने की सारी कोशिशें अगर नाकाम हो जाती हैं तो क्या किया जाएगा?
पिछले हफ्ते चीन ने अपने समझौता फॉर्मूले की अपील फिर से दोहराई.

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संघर्ष की सूरत में...
इस फॉर्मूले के तहत उत्तर कोरिया को अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकना है और बदले में अमरीका और दक्षिण कोरिया को उस इलाके में अपना सैन्य अभ्यास स्थगित करना था.
मीडिया में भी इस समझौता फॉर्मूले की गूंज फिर से सुनी गई.
चाइना डेली ने कहा, "केवल प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया को आसानी से काबू में नहीं किया जा सकता." अख़बार के मुताबिक तनाव में कमी लाने के लिए इस तरह का कोई समझौता अच्छी शुरुआत हो सकता है.
लेकिन अगर कोई संघर्ष हो गया तो? शुक्रवार को कम्यूनिस्ट पार्टी के अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने चीन की रणनीति पर अपनी रिपोर्ट में रोशनी डाली है.
चीन की तटस्थता...
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर उत्तर कोरिया गुआम पर हमला करता है तो चीन तटस्था की राह पर चलेगा लेकिन अख़बार आगे कहता है कि अगर अमरीका और दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया पर हमला करते हैं तो चीन इसे रोकने के लिए दखल देगा.
लेकिन इस बीच रूस में युद्ध के खतरे की आशंका को कमतर कर के आंका जा रहा है.
रूस के प्रभावशाली बिज़नेस अख़बार वेडोमोस्टी ने विश्लेषक व्लादीमिर ख्रुश्तालेव के हवाले से लिखा है, "इस बात पर ध्यान देना अहम है कि उत्तर कोरिया ने अमरीकी सामुद्रिक सीमा से 30-40 किलोमीटर की दूरी पर हमला करने की धमकी दी है. इसे युद्ध की सीधी घोषणा की तरह है."
उत्तर कोरिया का संभावित हमला
अख़बार का कहना है कि अगर ऐसा कोई युद्ध होता है तो इसे भड़काने की जिम्मेदारी अमरीका पर जाएगी.
अख़बार आगे लिखता है, "उत्तर कोरिया के संभावित हमले को रोकने के लिए अमरीका पहले ही हमला कर सकता है. इस फैसले की बुनियाद उत्तर कोरिया से मिले इंटेलीजेंस इनपुट की गलत व्याख्या भी सकती है और ये भी हो सकता है कि उत्तर कोरिया हकीकत में ऐसे किसी हमले की योजना काम नहीं कर रहा हो."
हालांकि दक्षिण कोरिया की मीडिया में बेचैनी का एहसास ज्यादा है. दक्षिण कोरिया के प्रभावशाली अख़बार हैंक्योरेह का कहना है कि अगर जरा सी भी गलती हुआ तो एक युद्ध भड़क सकता है.
दक्षिण कोरिया की रजामंदी
एक अन्य अखबार चोसोन इल्बो का कहना है कि अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच जारी विवाद में दक्षिण कोरिया हाशिये पर है.
अखबार ने उम्मीद जताई है कि किसी भी अमरीकी योजना में दक्षिण कोरिया की रजामंदी ली जाएगी.
ऐसी ही बातें जापानी मीडिया में भी कही जा रही हैं. असाही शिम्बुम अखबार का कहना है कि दोनों पक्षों की बयानबाज़ी के कारण युद्ध का खतरा बढ़ गया है.
उधर, जापान के रक्षा मंत्री इट्सुनोरी ओनोडेरा ने कहा है कि जापान गुआम की तरफ बढ़ने वाले किसी भी उत्तर कोरियाई मिसाइल का रास्ता बीच में रोकेगा. उनका कहना है कि जापान जो भी करेगा, वो बचाव की कार्रवाई होगी.
जापान के रवैये से ऑस्ट्रेलिया भी सहमत दिखता है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने कहा है कि अगर अमरीका पर हमला होता है तो उनका देश उत्तर कोरिया के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होगा.
इस बीच गुआम के गवर्नर एडी बाज़ा काल्वो ने शांत रहने की अपील की है. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा है, "मैं गुआम के लोगों को फिर से भरोसा दिलाना चाहता हूं कि फिलहाल हमारे द्वीप पर कोई खतरा नहीं है."
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