गुआम पर क्यों हमला करना चाहता है उत्तर कोरिया?

गुआम

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फ़ीफ़ा वर्ल्डकप 2018 के क्वालिफ़ाइंग राउंड में कई मैचों की हार के बाद भारतीय फुटबॉल टीम ने अमरीकी पैसेफ़िक क्षेत्र के द्वीप गुआम को हराकर नवंबर 2015 में जीत का स्वाद चखा था.

भारत से क़रीब सात हज़ार किलोमीटर दूर ये छोटा अमरीकी द्वीप गुआम अब उत्तर कोरिया के निशाने पर है.

उत्तर कोरिया ने कहा है, ''हम अमरीकी पैसेफ़िक क्षेत्र के द्वीप गुआम में मिसाइल हमले पर विचार कर रहे हैं.'' उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की धमकी के कुछ ही घंटों बाद एक सैन्य बयान जारी किया है.

उत्तर कोरिया

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ऐसे में सवाल ये कि क्यों उत्तर कोरिया के निशाने पर है गुआम?

अमरीका से गुआम की दूरी क़रीब 11 हज़ार किलोमीटर जबकि उत्तर कोरिया से दूरी 3430 किलोमीटर है. यानी गुआम तक पहुंचने की स्थिति में उत्तर कोरिया ज़्यादा नज़दीक नज़र आता है.

हाल ही में अमरीकी सेना ने गुआम में सैन्य अभ्यास किया था. गुआम में अमरीकी सामरिक बमवर्षक विमानों के ठिकाने हैं.

उत्तर कोरिया

यहां अमरीका के एयरफ़ोर्स और नौसेना का एयरबेस है. ये द्वीप 541 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. ये द्वीप अमरीका के लिए सामरिक तौर पर काफ़ी महत्वपूर्ण है.

इस द्वीप की आबादी क़रीब एक लाख 63 हज़ार है. इस द्वीप के एक चौथाई हिस्से में अमरीका का मिलिट्री बेस कैंप है.

अमरीका आने वाले वक़्त में यहां अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल इस द्वीप में छह हज़ार सैनिक तैनात हैं.

गुआम की अहमियत इस बात से समझिए कि इस एक द्वीप की मदद से अमरीका की पहुंच दक्षिणी चीन सागर, कोरिया और ताइवान तक है.

गुआम ऐसी जगह पर है, जहां से दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे पर अमरीका महत्वपूर्ण क़दम उठा सकने की स्थिति में है.

गुआम

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उत्तर कोरिया की गुआम पर दी ये धमकी एक तीर से दो शिकार है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां हमला करना अमरीका की सैन्य ताक़त को कमज़ोर करना है. दूसरा गुआम में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो चाहते हैं कि अमरीका गुआम छोड़े.

हालांकि, गुआम में रहने वाले लोगों को भी अमरीकी नागरिक होते हैं. हालांकि ये राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट नहीं डाल सकते हैं.

अमरीका नौसेना इस द्वीप पर पहली बार 1898 में क़दम रखा था. दिसंबर 1941 तक इस द्वीप में अमरीका का कब्ज़ा रहता है लेकिन पर्ल हार्बर के अटैक के बाद जापान ने महज़ दो दिन में इस द्वीप पर कब्ज़ा कर लिया था.

अमरीकी सेना

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जापान का गुआम में कब्ज़ा हिंसात्मक रहा. तीन साल तक जापान के इस द्वीप में शासन के दौरान क़रीब एक हज़ार लोगों को मार दिया गया था.

1944 में अमरीका ने इस द्वीप को फिर से अपने अधिकार में ले लिया था. ऐसे में, उत्तर कोरिया की धमकी छोटे से इस द्वीप पर अमरीकी जंग के इतिहास को दोहराने के संकेत ही दे रहा है.

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