'पाक आर्मी चीफ़ का दो टूक जवाब जनता की आवाज़'

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- Author, ए कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ के इस बयान की उर्दू मीडिया में हर तरफ़ चर्चा है कि वो ‘दुश्मन की सब चालों को समझ चुके हैं’.
रोज़नामा ‘पाकिस्तान’ लिखता है कि 'आर्मी चीफ़ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ को जो स्पष्ट संदेश दिया है वो बहुत ज़रूरी था क्योंकि कुछ दिन पहले ही मोदी ने बलूचिस्तान को लेकर ज़हर उगला है.'
अख़बार लिखता है कि जनरल शरीफ़ ने कहा कि मोदी हो, रॉ हो या फिर कोई और ‘हम दुश्मन की चालों को अच्छी तरह समझ चुके हैं और हमारी सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं.’
अख़बार ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना की हर क़ीमत पर हिफ़ाज़त करने के आर्मी चीफ़ के संकल्प को सराहा है, लेकिन ये भी कहा कि पाकिस्तान के भीतर भी इस परियोजना के दुश्मन मौजूद हैं और ये सब रॉ के इशारे पर हो रहा है.
‘औसाफ़’ ने आरोप लगाते हुए लिखा है कि जब भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर बलूचिस्तान में दखलंदाजी करने की बात खुलेआम स्वीकार कर ली, तो उस वक्त देश की जनता उम्मीद कर रही थी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ मोदी को फोन कर सख़्त आपत्ति जताएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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अख़बार कहता है कि जब चीन-पाक आर्थिक कोरिडोर परियोजना को नाकाम बनाने समेत भारत की सारी साज़िशें सामने आ गई हैं तो किसी को जबाव देना ही था और आर्मी चीफ़ ने दो टूक जबाव दे दिया है.
रोज़नामा ‘दुनिया’ ने ‘भारत को आर्मी चीफ़ का दो टूक जबाव’ शीर्षक से लिखा है कि आर्मी चीफ़ ने जो कहा है वो पाकिस्तानी जनता के दिल की आवाज़ है.
अख़बार लिखता है कि वक़्त आ गया है कि भारत की आंखों में आखें डालकर बात की जाए और पाकिस्तान में उसकी दहशतगर्दी का जबाव बयानों से नहीं बल्कि ठोस कदमों से दिया जाए.
वहीं ‘नवा-ए-वक़्त’ ने पेशावर की क्रिश्चियन कालोनी और मरदान शहर में एक ही दिन हुए धमाकों में 14 लोगों की मौत और 70 के जख्मी होने पर संपादकीय लिखा है और दहशतगर्दों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
अख़बार कहता है कि कुछ हल्कों का ख़्याल है कि आर्मी चीफ़ की तरफ़ से मोदी और अन्य विरोधियों को मुख़ातिब करके दिए गए बयान और उससे पहले सैन्य प्रवक्ता आसिम बाजवा की लंबी ब्रीफिंग के जबाव में ये हमले हुए हैं.

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अख़बार की राय में दहशतगर्दी से निपटना पुलिस के बस का नहीं है बल्कि इसके लिए अर्धसैनिक बल पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना को जिन हिस्सों में भी ज़रूरी समझा जाए, तैनात किया जाए.
‘जंग’ लिखता है कि जनता की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वो गड़बड़ी फैलाने वालों पर नज़र रखे और उनकी निशानदेही और गिरफ़्तारी में सुरक्षाबलों की मदद करे.
वहीं ‘एक्सप्रेस’ ने अपने संपादकीय में भारत और अफ़ग़ानिस्तान पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िश रचने का आरोप लगाया है.
अख़बार कहता है कि जिस तरह पाकिस्तानी सेना दहशतगर्दों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर उन्हें नुक़सान पहुंचा रही है उससे उम्मीद पैदा होती है कि दहशतगर्दी का ख़ात्मा जल्द हो जाएगा.
रुख़ भारत का करें तो ‘सहाफ़त’ लिखता है कि पाकिस्तान और चीन के बीच अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता हुआ है जिसके तहत पाकिस्तान को 2028 तक आठ इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां दी जाएंगी.
अख़बार के मुताबिक़ बताया गया है कि ये सौदा पांच अरब अमरीकी डॉलर का है और चीन ने अब तक किसी के साथ इतना बड़ा रक्षा समझौता नहीं किया है.

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अख़बार कहता है कि चीन और पकिस्तान का ये समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले भारत और अमरीका के बीच अब तक के सबसे बड़े रक्षा समझौते की खबर सामने आई.
अख़बार ने जहां दुनिया में नए समीकरण बनने की बात कही है, वहीं ये भी लिखा है कि अमरीका और चीन सिर्फ अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं.
अख़बार की राय है कि चीन और अमरीका कब तक किसको इस्तेमाल करेंगे, इसका खाका उनकी सरकारों से ज़हन में बहुत साफ़ होता है और उसी के मुताबिक़ रक्षा समझौते होते हैं.
गोवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सुभाष वेलिंगकर को हटाए जाने पर ‘हिंदोस्तान एक्सप्रेस’ का संपादकीय है- आरएसएस में पहली बार बग़ावत.
अख़बार के मुताबिक वेलिंगकर को हटाए जाने के बाद लगभग 400 लोगों ने संगठन को छोड़ा है और आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने की बात कही है.
अख़बार कहता है कि गोवा की संघ की यूनिट अब ‘संघ गोवा’ हो गई है और 90 साल पुराने संगठन को पहली बार विभाजन का सामना करना पड़ रहा है.
अख़बार लिखता है कि संघ के जो कार्यकर्ता ख़ुद को बहुत संगठित समझते थे, अब उनकी एकता में दरार आ गई है, वहां भी अब सत्ता की जंग शुरू हो गई है.
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