ओला-उबर के सामने 'काली पीली' टैक्सी कहां है?

इरफ़ान ख़ान
    • Author, समीर हाशमी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई

दोपहर के वक़्त जब काम थोड़ा कम होता है तो टैक्सी चालक इरफ़ान ख़ान आम तौर पर लंच ब्रेक लेते हैं.

लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों से उनकी दिनचर्या बदल गई है और इसका कारण है स्मार्टफ़ोन.

वो एक नया मोबाइल ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, जो ख़ासकर मुंबई की काली पीली टक्सियों को बुक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

ये ऐप भी उबर और ओला ऐप जैसा ही है, जिसे सवारियां अपने स्मार्टफ़ोन से बुक कर सकती हैं. इस पर बुकिंग करने वालों को ड्राइवर की सारी जानकारी मिलती है और ये टैक्सियां भी जीपीएस से लैस होती हैं.

उबेर ऐप

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ख़ान को उम्मीद है कि ऐप उनकी आमदनी में इजाफ़ा करेगी. शहरी इलाक़ों में लोग उबर और ओला जैसी सेवाओं को तरजीह दे रहे हैं जिससे काली पीली टैक्सी चलाने वालों की आमदनी आधी से भी ज़्यादा गिर चुकी है.

ख़ान पिछले 20 सालों से काली पीली टैक्सी चला रहे हैं, लेकिन सवारियां मिलना इतना मुश्किल कभी नहींं था.

ख़ान के दूसरे साथी भी इसी तरह की मुश्किल का सामना कर रहे हैं. यही कारण है कि उनके जैसे टैक्सी चालक कामकाज को चालू रखने के लिए तकनीक का सहारा लेने की कोशिश कर रहे हैं.

मुंबई टैक्सी

ख़ान कहते हैं, "ये तकनीक का ज़माना है, इसलिए बाज़ार में टिके रहने के लिए हमें इसे अपनाने की ज़रूरत है."

तक़रीबन आधी शताब्दी से ज़्यादा समय से मुंबई की काली पीली टैक्सियां शहर का अभिन्न हिस्सा रही हैं.

ऐप आधारित टैक्सी सेवा कंपनियों के आने से पहले, सवारियां स्थानीय आवाजाही के लिए मुख्य रूप से ऑटोरिक्शा और टैक्सी पर निर्भर थीं.

मुंबई एनवायरन्मेंट सोशल नेटवर्क के अनुसार, पांच साल पहले भारत की आर्थिक राजधानी में क़रीब 55,000 काली पीली टैक्सियां थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घट कर 35 से 40 हज़ार है.

काली पीली टैक्सी के लिए ऐप 9211 को डिज़ाइन करने वाले मलय कोठारी कहते हैं, "लोगों को बाहर निकल कर सड़क पर टैक्सी खोजने की बजाय, फ़ोन से ही कैब बुक कराना ज़्यादा आसान लगने लगा है."

उबर

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वर्तमान में इस ऐप को 2,000 ड्राइवर इस्तेमाल कर रहे हैं और मलय को उम्मीद है कि यह आंकड़ा अगले महीने तक 5,000 तक पहुंच जाएगा.

250 टैक्सी ड्राइवरों का एक समूह इस ऐप से बुक कराने पर बांद्रा और बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स से पिकअप पर 20 प्रतिशत की छूट भी दे रहा है.

अंतरराष्ट्रीय कार्पोरेशन के निवेश के चलते ऐप आधारित सेवाओं का बहुत तेजी से प्रसार हो रहा है और उनके ऐप के साथ जुड़ी टैक्सियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है.

बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए वो भारी भरकम छूट भी दे रही हैं ताकि अधिक से अधिक लोग उनकी सेवा लें.

पिछले एक साल में उबर ने भारत में एक अरब डॉलर का निवेश किया है. उसका दावा है कि उसके एक तिहाई ड्राइवर उसके ऐप से जुड़ने से पहले काली पीली टैक्सी या ऑटोरिक्शा चलाते थे.

भारत टैक्सी

अपनी संख्या में इजाफ़ा करने के लिए कंपनी काली पीली टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को नई कारें ख़रीदने के लिए आसाम क़िस्तों पर क़र्ज़ दे रही है.

उबर इंडिया के जनरल मैनेजर शैलेश सावलानी कहते हैं, "हमारा लक्ष्य है अपने प्लेटफ़ार्म के लिए अधिक से अधिक ड्राइवर हासिल करना."

उबर ने महाराष्ट्र सरकार से एक क़रार किया है जिसके तहत वो अगले पांच सालों में पूरे प्रदेश में 75,000 नौकरियों और ट्रेनिंग के अवसर पैदा करेगा.

सावलानी के अनुसार, इस परियोजना के लिए 60,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

टैक्सी

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बीती जुलाई में दिल्ली में 90,000 ऑटोरिक्शा और 15,000 पीली रंग की टैक्सियों के चालकों ने हड़ताल कर दी थी.

उनका आरोप था कि ओला और उबर जैसी सेवाएं उनकी रोज़ी रोटी छीन रही हैं.

इनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार एक नई नीति बना रही है जिसके तहत टैक्सी के रूप में चलने वाली कैब के किराए को तय किया जाएगा.

किराए की ऊपरी सीमा तय होगी, जिससे 'सर्ज प्राइसिंग' पर रोक लगेगी.

असल में हाई ट्रैफ़िक के समय में उबर और ओला जैसी कंपनियां अपना किराया बढ़ा देती हैं, जिसे वो सर्ज प्राइसिंग कहती हैं.

पिछले 10 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐप आधारित टैक्सी सेवा देने वालों को निर्देश दिया कि वो सवारियों से आधिकारिक तौर पर तय किराए से अधिक न वसूलें.

मुंबई में काली पीली टैक्सी यूनियनें भी ऐसी ही मांग कर रही हैं.

उबेर टैक्सी

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उनका दावा है कि उनके किराए प्रशासन की ओर से निर्धारित हैं, जबकि ऐप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता कम किराया लेते हैं और इसकी भरपाई के लिए व्यस्त समय में अधिक किराया वसूलते हैं.

मुंबई टैक्सी एसोसिएशन के सचिव डीए साल्यान कहते हैं, "सभी के लिए एक समान नीति की ज़रूरत है ताकि समान अवसर उपलब्ध कराया जा सके."

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सहमति बनाने के लिए ऐप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनियों, टैक्सी यूनियनों के साथ एक बैठक की है.

टैक्सी यूनियनों ने सरकार को धमकी दी थी कि अगर वो ऐप कंपनियों के नियमन को लेकर नीति नहीं बनाती हैं तो वो हड़ताल पर चले जाएंगे.

लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो मानते हैं कि केवल नीति बनाना ही इस समस्या का हल नहीं है और पारम्परिक टैक्सियों को बेहतर मेंटनेंस से अपनी सेवा में सुधार लाना होगा.

ख़ान कहते हैं, "अधिकांश टैक्सियों में आपको सीटें फटी हुई और विंडो हैंडल टूटे मिलेंगे. ये बदलने की ज़रूरत है नहीं तो कस्टमर नहीं आएंगे."

टैक्सी

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कुछ का मानना है कि ऐप आधारित सेवाओं का मुक़ाबला करने के लिए काली पीली टैक्सी में ऐसी लगाना होगा.

लेकिन ऐसा करने के लिए, टैक्सी चालकों का कहना है कि किराए बढ़ाने की ज़रूरत पड़ेगी.

फिलहाल काली पीली टैक्सी ड्राइवर बाज़ार में बने रहने के लिए केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें काम मिलता रहे.

हालांकि इनमें से अधिकांश लोग मानते हैं कि हड़ताल और ऐप आधारित टैक्सी सेवा के लिए नीति बनने से उन्हें केवल कुछ दिनों की ही मोहलत मिलेगी और ये लंबे समय तक टिके रहने की गारंटी नहीं है.

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