बच्चे की पैदाइश के लिए मां को 6 माह छुट्टी

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- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई से
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कामकाजी औरतों के गर्भवती होने पर मिलनेवाली छुट्टी को तीन माह से बढ़ाकर छह महीने करने का फ़ैसला किया है.
नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने उन औरतों को भी तीन माह का अवकाश देने का फ़ैसला किया है जो बच्चे गोद ले रही हैं या सरोगेसी के ज़रिए मां बन रही हों.
भारत में 1961 से ही ‘मेटरनिटी बेनेफ़िट क़ानून’ लागू है.
इसके तहत दस से ज़्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों को गर्भवती होने के बाद औरतों की नौकरी सुरक्षित रखनी होती है.
साथ ही उन्हें 12 हफ़्ते की छुट्टी लेने का हक़ है जिस दौरान उन्हें तन्ख्वाह समेत नौकरी से जुड़ी सारी सुविधाएं मिलती हैं.
इसके बावजूद कई सर्वे बताते हैं कि भारत में करीब 50 फ़ीसदी औरतें मां बनने के बाद नौकरी छोड़ देती है.
बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी ज़्यादातर मां की ही मानी जाती है और कई संस्थानों में क्रेश की सुविधाएं नहीं होती है.

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक भारत में 15 साल की उम्र से ज़्यादा की औरतों का सिर्फ एक-चौथाई ही कामकाजी है.
ये औसत दुनियाभर में सबसे कम में शुमार है.
बुधवार को कैबिनेट द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक औरतों की मदद के लिए मौजूदा कानून में संशोधन किए जा रहे हैं.
अब पहले दो बच्चों के जन्म पर गर्भवती औरतों को मिलने वाली छुट्टी 26 हफ़्ते तक बढ़ा दी गई है.
तीसरे या इससे अधिक बच्चे होने पर छुट्टी की अवधि 12 हफ़्ते ही होगी.
नए बिल में संस्थानों से ‘वर्क फ़्रॉम होम’ यानि घर से काम करने की सुविधा उप्लब्ध करवाने का आग्रह किया गया है.
साथ ही 50 से ज़्यादा कर्मचारियों के संस्थान में बच्चों के लिए क्रेश रखना बाध्यकारी कर दिया गया है.

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श्रम मंत्रालय चाहता है कि बिल को इसी संसद सत्र में मंज़ूरी दिलवाने की कोशिश की जाए.
बिल में ये संशोधन होने से लगभग 18 लाख कामकाजी महिलाओं को लाभ मिलेगा.
श्रम मंत्रालय चाहता है कि बिल को इसी संसद सत्र में मंज़ूरी दिलवाने की कोशिश की जाए.
मातृत्व अवकाश बिल में ये संशोधन होने से लगभग 18 लाख कामकाजी महिलाओं को लाभ मिलेगा.
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