कश्मीर में अब तक हुए बड़े प्रदर्शन

प्रदर्शन

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भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में एक मुठभेड़ में चरमपंथी बुरहान वानी की मौत की बाद बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इनमें 18 लोगों की मौत हो चुकी है.

बीबीसी ने बात की वरिष्ठ पत्रकार सुजात बुखारी से और जानने की कोशिश की, वहाँ किन मौकों पर बड़े प्रदर्शन हुए हैं.

मैं समझता हूँ कि 1947 के बाद से ही यहाँ की राजनीति काफ़ी उतार-चढ़ाव की रही है.

1947 में ही यहाँ काफ़ी तनाव पैदा हुआ था और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में लिया गया और वहां कश्मीर को लेकर प्रस्ताव पारित किया था.

सेना

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उसके बाद 1953 में शेख मुहम्मद अब्दुल्ला जो कि यहाँ प्रधानमंत्री हुआ करते थे, उन्हें ग़ैरकानूनी तरीके से पद से हटा दिया गया, उन्हें जेल भेजा गया तो उस पर कश्मीर में काफ़ी बवाल हुआ.

हम अपने बुज़ुर्गों से सुनते थे कि उसके बाद कई महीनों तक लोग सड़कों पर थे, बहुत प्रदर्शन हुए और लोग भी मरे. उसके बाद शेख साहब ने एक मोर्चा बनाया जो 22 साल तक चला. लोग बार-बार सड़कों पर आते थे और प्रदर्शन करते थे.

1964 में यहाँ एक बहुत बड़ा बवाल हुआ था और महीने भर से ज़्यादा दिन के लिए लोग सर्दियों में भी सड़कों पर बैठे रहे.

पथराव

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1984 में भी जब फ़ारुख़ अब्दुल्ला यहाँ के मुख्यमंत्री थे, तो उन्हें एक तरह से ग़ैरकानूनी तरीके से हटाया गया था और उनके बहनोई गुलाम मोहम्मद शाह को मुख्यमंत्री बनाया गया, क्योंकि फ़ारुख़ अब्दुल्ला के 16 विधायकों ने दलबदल की थी. उसके बाद भी यहाँ कहीं महीनों तक लोग सड़कों पर रहे, प्रदर्शन किया और कहा कि अब्दुल्ला साहब को गैरकानूनी तरीके से हटाया गया है.

1987 में कश्मीर में चुनाव हुए और उसमें बड़े पैमाने पर धांधलियाँ हुईं और इस हद तक धांधली हुए कि उस समय श्रीनगर के लाल चौक से चुनाव लड़ रहे मुहम्मद युसूफ शाह को हराया गया, जो अब सैयद सलाउद्दीन के नाम से जाने जाते हैं और एक चरमपंथी संगठन के मुखिया हैं.

फिर 1989-90 में ऐसा बवाल शुरू हुआ, जो आज तक जारी है और कई लोग मारे गए हैं.

यहाँ 1993 में भी एक बड़ी घटना हुई थी जब हज़रत बल में चरमपंथी छिपे हुए थे जिसे सेना ने घेरे में लिया, तो काफ़ी बवाल हुआ.

कश्मीर में 1995 में एक सूफ़ी संत की दरगाह में एक पाकिस्तानी चरमपंथी के छिपने के बाद जो घटनाएँ हुई, उससे काफ़ी बवाल हुआ.

युवक

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2008 में अमरनाथ की ज़मीन के विवाद के वक़्त भी काफ़ी बवाल हुआ था और कई महीनों तक प्रदर्शन हुए, जिसमें 70-80 लोग मारे गए थे.

यहाँ 2010 में एक कथित एनकाउंटर के बाद भी बवाल हुआ जिसमें क़रीब 130 लोग मारे गए.

2013 में अफ़जल गुरु की फांसी के बाद भी कश्मीर में बवाल हुआ, लेकिन वो बहुत बड़ा नहीं था.

लेकिन आज फिर से बुरहान वानी की मौत के बाद प्रदर्शन शुरू हुए हैं.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय के साथ बातचीत पर आधारित)

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