स्वामी राज्यसभा में भाजपा के पिंच हिटर

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
उनका प्रवेश हुआ, उनका भाषण हुआ और आशानुसार उनकी खूब चर्चा हुई.
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी संसद में पार्टी के नए हीरो हैं. विवादों पर पनपने वाले स्वामी राज्य सभा में अपने प्रथम भाषण में ही विवादास्पद साबित हुए लेकिन उनकी सेहत पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा.
राज्य सभा में प्रवेश के पहले ही दिन सदन में आने वाले दिनों की एक झलक मिल गई. अब राज्य सभा के सत्रों को बोरिंग कहने वाले सुब्रमण्यम स्वामी के प्रवेश के बाद ऐसा नहीं कहेंगे.

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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर के सौदे में रिश्वत के इलज़ाम में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधा हमला किया.
उनके भाषण शुरू होने के एक मिनट के अंदर ही हंगामा शुरू हो गया. सत्र को दो बार स्थगित करना पड़ा.
कहा जा रहा है कि उन्हें राज्य सभा में लाने के पीछे दो कारण थे- कांग्रेस और सोनिया गांधी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना और राज्य सभा में वित्त मंत्री और सदन के लीडर अरुण जेटली के पर काटना. मतलब ये कि एक तीर से दो शिकार करना.
राज्य सभा में स्वामी के पहले हफ्ते के प्रदर्शन से ये दोनों उद्देश्य पूरे होते दिखाई देते हैं.

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अपना दोस्त बताने वाले स्वामी असल में राजीव की विधवा सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी के पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं.
नेशनल हेरल्ड में कथित भ्रष्टाचार के मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अदालत तक लाने वाले कोई और नहीं सुब्रमण्यम स्वामी हैं. अदालत में मुक़दमा अब भी जारी है.
पिछले साल बीबीसी से एक विशेष इंटरव्यू के दौरान उन्होंने ये दावा किया था कि कांग्रेस नेता और गांधी परिवार के दिन अब पूरे हो गए हैं. उन्होंने परिवार के खिलाफ एक मुहिम छेड़ने की कोशिश की बातें कही थीं.
गांधी परिवार के खिलाफ स्वामी अदालत तो गए. लेकिन जो कुछ वो अदालत में नहीं कर सकते, वो परिवार के खिलाफ संसद में कर सकते हैं.
इसलिए जब उनके 'घनिष्ठ मित्र' नरेंद्र मोदी ने एक लंबे समय तक नज़र अंदाज़ करने के बाद उन्हें राज्य सभा की सदस्यता का निमंत्रण दिया तो उन्होंने इसे फ़ौरन स्वीकार कर लिया.

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स्वामी प्रधानमंत्री को खुद अपने शब्दों में वर्ष 1972 से जानते हैं. उस समय मोदी आरएसएस के एक मामूली प्रचारक थे. हारवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले स्वामी उस समय ही एक जानीमानी हस्ती थे.
स्वामी से इतनी निकटता है तो प्रधानमंत्री को ये खूब मालूम होगा कि उनके मित्र और अरुण जेटली में हमेशा ठनी रहती है. राज्य सभा में जेटली बीजेपी के अकेले अच्छे स्पीकर माने जाते हैं. लेकिन इस सत्र में अब तक स्वामी छाए रहे हैं.
सुब्रमण्यम स्वामी अपने सार्वजनिक जीवन में कई वजहों से चर्चा में रहे हैं. कभी प्रतिभाशाली गणितज्ञ के तौर पर मशहूर रहे स्वामी को कानून का जानकार और एक आर्थिक विशेषज्ञ भी माना जाता है.
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में वो उन्हें जेल भी भिजवा चुके हैं. पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने विदेश में जमा किए गए काले धन को देश वापस लाने की मुहिम भी छेड़ रखी है.

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स्वामी का सहारा लेना जोखिम से भरा भी साबित हो सकता है. उनके क़रीबी लोगों के अनुसार वो किसी की नहीं सुनते, केवल अपनी सुनते हैं.
राज्य सभा में उनके भाषणों के दौरान भी ये महसूस हुआ कि उनके शब्द जितने अपने हैं उतनी ही उनकी सोच भी. वो आर्डर लेने के आदी नहीं हैं.
जानकारों के अनुसार उन्होंने पार्टी के आला हाईकमान को भरोसा दिलाया है कि वो पार्टी के हित को आगे बढ़ाने का काम करेंगे.
इस समय राज्य सभा में भाजपा को एक ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत थी जो ट्वेंटी-20 के शब्दों में पिंच हिटर जैसा हो. स्वामी ने एक हफ्ते में खुद को पिंच हिटर साबित कर दिया है.
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