"बढ़िया होता अगर सोच बदलती.."

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एक अरसे बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने गणवेश को हाफ़ ख़ाकी पैंट से बदलकर एक नई ड्रेस अपनाने का फ़ैसला किया है.
संघ ने रविवार को घोषणा की कि अब हाफ़ पैंट को बदलकर भूरे रंग की फ़ुल पैंट शामिल कर ली गई है.
मगर सोशल मीडिया पर लोग शनिवार से ही इस बारे में बात कर रहे हैं. ट्विटर पर #ChaddiNahiSochBadlo (चड्ढ़ी नहीं सोच बदलो), #RSS (आरएसएस) और #Khaki (खाकी) जैसे हैशटैग शनिवार रात से ही ट्रैंड कर रहे हैं.

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फ़रीदा पटेल लिखती हैं, “विदेशी कल्चर की निकर या पैंट क्यों? भारतीय धोती या लंगोट पहनें.”

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चौधरी साहब नाम के ट्विटर हैंडल का कहना है, “आरएसएस हीनता के संकट से ग्रस्त है, जिन्हें लगता है कि चड्ढी बदलने से ज़्यादा लोग इनसे जुड़ेंगे.”

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सिद्धार्थ तंवर लिख रहे हैं, “इनके अंग वस्त्र भी हैशटेग पर चल रहे है! छी-छी.”

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वीजी नाम के एक ट्विटर हैंडल ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए लिखा, “मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके रहते आरएसएस की चड्ढी उतर गई.”
सरल पटेल ने एक ट्वीट में लिखा है, “पुलिस अधिकारी बस्सी जैसे लोगों के लिए ख़ुशख़बरी है. अब वे पुलिस के यूनिफ़ॉर्म के साथ आरएसएस की यूनिफ़ॉर्म भी पहन सकेंगे.”

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बीएस बस्सी दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त थे और देशद्रोह के आरोप में जेएनयू छात्र नेता कन्हैया कुमार की गिरफ़्तारी को लेकर चर्चा में आए थे.

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उस्मान बेग़ ने लिखा, "आरएसएस अपनी वेशभूषा बदल रही है, बढ़िया होता अगर अपनी सोच बदलती. 90 साल लग गए निकर से पैंट तक आने में."
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