असम के चुनाव में अब नज़रें मोदी पर

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
देश के जिन चार राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले है उनमें भाजपा की अगर कहीं पकड़ थोड़ी मजबूत है, तो वो राज्य है असम.
असम का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी बना हुआ है.
केंद्रीय मंत्रियों के लगातार असम दौरे के बीच 19 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोकराझाड़ की एक रैली से चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे.
बाद में प्रधानमंत्री गुवाहाटी में युवाओं की एक रैली को भी संबोधित करेंगे.
भाजपा नेताओं का दावा है कि कांग्रेस, असम गण परिषद से लेकर तमाम दलों को छोड़कर जिस तरह लोग उनकी पार्टी में आ रहे हैं, उससे साफ़ पता चलता है कि भाजपा असम में मजबूत स्थिति में है.
लेकिन कांग्रेस और एआईयूडीएफ का दावा है कि दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में हार के अलावा देश के कई राज्यों मे छोटे-बड़े चुनावों के परिणामों से पता चलता है कि ‘मोदी मैजिक’ अब नहीं चलने वाला.

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असम कांग्रेस के प्रवक्ता रिपून बोरा ने बीबीसी से कहा, "मोदी के आगमन को लेकर कांग्रेस बिल्कुल डरी हुई नहीं है क्योंकि देश को अब यह पता चल चुका है कि मोदी झूठ बोलते हैं. लोकसभा चुनाव से पहले मोदी ने लोगों से जो वादे किए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं किया. बिहार चुनाव से पहले मोदी ने सवा लाख करोड़ रूपए का विशेष पैकेज देने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? उससे पहले जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ के लिए 50 हज़ार करोड़ देने की घोषणा की थी. बाद में केवल एक हज़ार करोड़ ही दिया गया."
कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी अब चाहे जितनी बार असम आएं उनका कोई असर यहां के लोगों पर पड़ने वाला नहीं है.

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एआईयूडीएफ के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी के कोकराझाड़ में रैली करने के फ़ैसले से पता चलता है कि वे सांप्रदायिक दिशा में काम रहें हैं, क्योंकि 2012 में असम में सबसे बड़ा दंगा कोकराझाड़ में ही हुआ था.
धुबड़ी से लोकसभा सांसद अजमल प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हैं, "पिछले क़रीब दो साल में मोदी सरकार ने कितने बांग्लादेशियों को असम से बाहर निकाला है, जबकि लोकसभा चुनाव से पहले एक रैली में मोदी ने कहा था कि 16 मई 2014 के बाद एक भी बांग्लादेशी यहां नहीं दिखेगा."
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेशियों को बाहर करने की जगह, बांग्लादेश से भूमि समझौता कर असम की जमीन बांग्लादेश को दे दी गई.
भाजपा के असम प्रभारी महेंद्र सिंह ने विपक्ष के इन आरोपों को नकारते हुए बीबीसी से कहा, "पूरे भारत में मोदी जी का जादू जिस तरीके से पहले चल रहा था, आज भी उसी तरीके से चल रहा है. मोदी के आने की ख़बर से पूरे असम में एक लहर पैदा हो गई है और आनेवाले चुनाव में पार्टी को इसका बड़ा फायदा होगा."

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उनका कहना है कि सीमा पार से घुसपैठ और असम में गायों की तस्करी पर भी रोक लगी है.
उन्होनें कहा कि मोदी ने एक साल के अंदर असम के उन पिछड़े इलाक़ों में ट्रेनें चला दी हैं, जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती थी.
महेंन्द्र सिंह के मुताबिक़, "कोकराझाड़ में हिंसा के बाद जो कार्रवाई की गई, उसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. असम में ऑपरेशन ऑल आउट से लेकर म्यांमार में घुसकर कार्रवाई करने तक सभी बातें लोगों के सामने है."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकास कार्यक्रमों की पूरी दुनिया में चर्चा है और भाजपा विकास के मुद्दे पर ही असम का चुनाव लड़ने जा रही है.

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राजनीतिक विश्लेषक तथा गुवाहाटी हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हाफ़िज़ राशिद अहमद चौधरी ने कहा, "लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने रैलियो में भाषण देने का जो अंदाज अपनाया था, लोग अब उससे उब गए हैं. विपक्षी पार्टियां उन पर वादा नहीं निभाने के लगातार हमले कर रही हैं. ऐसे में मोदी अगर असम में ज़्यादा घोषणाएं भी करेंगे तो उससे यह नहीं माना जाएगा कि लोग भाजपा के पक्ष में वोट डालेंगे".
उन्होनें कहा कि दुनिया के बड़े देशों में अपने भाषण से मोदी कितनी भी वाहवाही हासिल कर लें, लेकिन जहां आम आदमी का मसला है, किसानों की बात है, तो जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझना होगा.

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उनका कहना है कि मोदी विदेशों में बड़ी बातें कर रहें है, लेकिन जब देश में किसी अहम मुद्दे पर बोलने की बात आती है तो वो दिल्ली में होते हुए भी नहीं बोलते हैं.
भाजपा असम में बांग्लादेशी घुसपैठ को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है.
लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल की एक रैली में मोदी ने कहा था कि 16 मई 2014 के बाद एक भी अवैध बांग्लादेशी नागरिक यहां की जमीन पर दिखाई नहीं देगा. असम विधानसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियां प्रचार रैलियों में मोदी के भाषण को बेअसर बनाने के लिए इन बातों के आधार पर रणनीति तैयार कर रही हैं.

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असम की 126 सीटों में मिशन 84 से ज़्यादा पर जीत का दावा करने वाली भाजपा, असम गण परिषद समेत कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने के लिए सारे दांव आजमाने में लगी है.
इस अटकलों की चर्चा भी यहां खूब है कि बोडो पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन करने के बदले में इस क्षेत्र के विकास के लिए एक हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जा सकता है. जानकार मान रहे हैं कि कोकराझाड़ की रैली में प्रधानमंत्री इस पैकेज की घोषणा कर सकते हैं.
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