'धर्म को बर्दाश्त कर सकते हैं, बढ़ावा नहीं दे सकते'

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पूर्व भाजपा नेता और सांसद राम जेठमलानी ने कहा है कि अंबेडकर के बनाए संविधान के मुताबिक 'धर्म को बर्दाश्त तो किया जा सकता है लेकिन उसे प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता है.'

राम जेठमलानी संसद में डॉक्टर बीआर अंबेडकर और संविधान पर जारी बहस के दौरान राज्यसभा में बोल रहे थे.

साल 2015 भारत के संविधान निर्माता के नाम पर जाने जाते भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती है.

हाल में ही ये बहस होती रही है कि धर्मनिरपेक्ष शब्द का संविधान में होना कितना ज़रूरी है या नहीं.

जेठमलानी ने कहा कि हालांकि धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान की प्रस्तावना में आपातकाल के दौरान जोड़ा गया, लेकिन धर्मनिरपेक्षता की भावना भारतीय संविधान में रची बसी है.

उनका कहना था, "अंबेडकर ने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष संविधान दिया था. धर्मनिरपेक्षता धर्म पर विज्ञान की, ज्ञान की अज्ञानता पर जीत है."

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