'पुराने अंदाज़' को ज़िंदा रख रहे उस्ताद

    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

उस्ताद रफ़ीउद्दीन साबरी जाने माने तबला वादक हैं. उनके पिता उस्ताद साघिर अहमद साबरी संगीतकार थे और नन्हें रफ़ीउद्दीन का रुझान तबले की ओर था.

माँ जब रसोई में खाना पका रही होतीं तो यह नन्हा कलाकार वहां रखे डब्बे बजाता रहता था, वालिद साहब ने जब यह देखा तो अपने दोस्त से तबला लाकर रियाज़ के लिए दिया.

आगे चलकर रफ़ीउद्दीन ने उस्ताद अब्दुल वाहिद खां साहब और उस्ताद नज़ीर अहमद ख़ां से तालीम ली और साबरी ऑल इंडिया रेडियो के ए ग्रेड कलाकार बने और देश विदेश में कई प्रस्तुतियां दीं.

कहा जाता है कि तबला हज़ारों साल पुराना वाद्य यंत्र है, पर एक जिक्र यह भी होता है कि 13वीं शताब्दी में भारतीय कवि और संगीतज्ञ उस्ताद अमीर ख़ुसरो ने पखावज के दो टुकड़े करके तबले का आविष्कार किया.

तबले के घरानों में दिल्ली घराना, लखनऊ घराना, फ़र्रुखाबाद घराना, बनारस घराना और पंजाब घराना मशहूर हैं.

रफ़ीउद्दीन साबरी

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इमेज कैप्शन, उस्ताद रफ़ीउद्दीन साबरी आल इंडिया रेडियो के टॉप ग्रेड आर्टिस्ट हैं. भारतीय शास्त्रीय गायन,वादन व नृत्य की संगति में तबले का विशेष रूप से प्रयोग होता है.
रफ़ीउद्दीन साबरी

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इमेज कैप्शन, तबले के दो भागों में विभाजित किया जाता है, दाहिना तबला जिसे दायां कहते हैं तथा बाएं तबले को बायां अथवा डग्गा कहा जाता है .
रफ़ीउद्दीन
इमेज कैप्शन, रफ़ीउद्दीन साहब का मानना है कि संगीत कार्यक्रम आयोजकों को तबला कलाकारों के एकल प्रदर्शन की ओर भी ध्यान देना चाहिए.
रफ़ीउद्दीन

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इमेज कैप्शन, तबले की थाप, संगीत व नृत्य में ताल देने का काम करती है.
रफ़ीउद्दीन

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इमेज कैप्शन, एक प्रतिभा संपन्न कलाकार होने के साथ ही वे एक कुशल गुरु भी हैं.
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इमेज कैप्शन, चालीस से अधिक शागिर्द उनसे अभी तबला वादन सीख रहे हैं.
रफ़ीउद्दीन

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इमेज कैप्शन, तबले के आविष्कार से पहले संगत के लिए पखावज व मृदंग का प्रयोग किया जाता था.
उस्ताद साबरी

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इमेज कैप्शन, सरल और सौम्य स्वभाव के उस्ताद साबरी मानते हैं कि हमें हर नेमत के लिए शुक्रमंद होना चाहिए और गुरु का सम्मान करना नहीं भूलना चाहिए.

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