बेवकूफ़ी की ब्रांडिंग में चालाकी का धंधा

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

कोई भला अपने होटल का नाम बेवकूफ़ क्यों रखना चाहेगा. आप कहेंगे बेवकूफ़ ही होगा कोई.

दरअसल ऐसा है नहीं, झारखंड के गिरिडीह में इस समय बेवकूफ़ नाम से 5 होटल हैं- बेवकूफ़ होटल, महाबेवकूफ़ होटल, बेवकूफ़ नंबर वन होटल, श्री बेवकूफ़ होटल, श्री बेवकूफ़ रेस्टोरेंट.

ये सभी होटल 200 मीटर के दायरे में हैं और अधिकतर फ़ायदे में चल रहे हैं. साफ़ है कि बेवकूफ़ यहां का बड़ा ब्रांड है.

ब्रांड बेवकूफ़ और गोपी राम

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इमेज कैप्शन, हम बेवकूफ़ नंबर वन हैं, जनाब. असली हमीं हैं, बाकी सब नकली. प्रदीप कुमार चलाते हैं गिरिडीह का पहला 'बेवकूफ़ होटल'.

सन 71 की सर्दियों में गोपी राम ने यहां पहला बेवकूफ़ होटल खोला.

सस्ता और स्वादिष्ट भोजन परोसने के कारण होटल चल निकला. उन्होंने शादी नहीं की थी.

गोपी राम के भतीजे ही उनके वारिस हैं. अब गोपी राम जिंदा नहीं हैं. लेकिन, उनका होटल- बेवकूफ़ होटल अभी जमा हुआ है.

हम पहले बेवकूफ़ हैं

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बेवकूफ़ होटल को चलाने वाले प्रदीप कुमार कहते हैं, "मेरे चाचा इनोवेटिव थे. उन्होंने बेवकूफ़ नाम सिर्फ इसलिए रखा, क्योंकि यह अलग था. यह दिमाग में बस जाता था. जब होली के मौके पर महामूर्ख सम्मेलन हो सकते हैं, तो बेवकूफ़ ब्रांड क्यों नहीं?"

लोकप्रियता का आलम यह कि इसके बाद इस नाम से 7 और होटल खुल गए. इनमें से दो बंद हो चुके हैं.

बुरा नहीं लगता

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इमेज कैप्शन, 'श्री बेवकूफ़ होटल' के सामने खड़े किशोर भदानी. इनका दावा है कि सबसे पहले इनके पुरखों ने ही खोला था 'बेवकूफ़ होटल'.

इन सभी पांच होटलों में भीड़ लगी रहती है. मैं दिन के खाने के समय पहुंचा तो तीस से अधिक लोग जमे थे.

यहां 35 रुपये में शाकाहारी और 80 रुपए में मांसाहारी खाना मिलता है.

मेरी मुलाकात यहां डोमचांच के अर्जुन मेहता व राजू से हुई. खाने का मज़ा उठाते हुए वह कहते हैं, "सिर्फ नाम बेवकूफ़ है. खाना ठीक है, इसलिए यहीं खाते हैं. इसमें कुछ बुरा नहीं लगता."

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इमेज कैप्शन, ''श्री बेवकूफ़' रेस्टोरेंट के मालिक अशोक भदानी के बेटे नीरज ने मुंबई में इसका ब्रांच खोला. उन्हें लगता है कि बेवकूफ गिरिडीह का आत्मिक शब्द बन चुका है.

गिरिडीह-हजारीबाग रोड पर स्थित इस होटल के बगल में है बेवकूफ़ नंबर-1 होटल.

इसके मालिक शंभू प्रसाद साह का दावा है कि असली बेवकूफ़ तो वही हैं. मतलब ये कि अब लड़ाई बेवकूफ़ कहलाने पर हो रही है.

मुंबई में खुली था ब्रांच

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इमेज कैप्शन, 'महाबेवकूफ़ होटल' का बटेर खाने लोग कई दूसरे जिलों से आते हैं.

श्री बेवकूफ़ रेस्टोरेंट चलाने वाले अशोक भदानी के बेटे नीरज ने मुंबई के लिंक रोड पर बेवकूफ़ होटल खोला. वहां भी भीड़ उमड़ने लगी.

अशोक भदानी ने बताया कि मुंबई का व्यवसाय ठीक चल रहा था लेकिन चंदा उगाही के कारण वह होटल बंद करना पड़ा.

अशोक भदानी की बेटी अमेरिका में डॉक्टर हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च इसी बेवकूफ़ नाम के होटल से निकला है.

चुनौतियां भी हैं

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गिरिडीह के ब्रांड बेवकूफ़ को चुनौतियां भी मिल रही हैं. मॉल कल्चर बढ़ रहा है और अब लोग रेस्टोरेंट में जाना चाहते हैं.

यह ट्रेडिशनल है, क्यों नहीं कर देते माडर्न?

जवाब- सर यही तो पहचान है, बेवकूफ़.

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