पूर्वोत्तर में बाढ़ से तीन लाख लोग प्रभावित

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से असम में आई बाढ़ से हालात और ख़राब हो गए हैं.
राज्य के 13 ज़िलों के 611 गांवों में बाढ़ का पानी घुस आया है.
बचाव और राहत कार्य में जुटी असम सरकार ने कोकराझाड़, चिरांग, बंगाईगांव और डिब्रूगढ़ जिले में 124 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें बेघर हुए 84,779 लोगों को रखा गया है.
असम आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक तीन लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

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सड़कें टूटीं
पानी के तेज़ बहाव के कारण संपर्क मार्ग और सड़कें टूट गई हैं और राष्ट्रीय राजमार्ग 31 और 53 क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
कोकराझाड़ जिले में 187 गांव, धेमाजी जिले में 137 गांव और बंगाईगांव जिले में 113 गांव बाढ़ के कारण प्रभावित हुए है.
इनमें कई गांवों की स्थिति की काफी गंभीर बनी हुई है, जहां राहत कार्य के लिए सेना ने अपने जवानों को उतारा है.
बंगाईगांव ज़िले में बाढ़ के कारण गुरुवार को अधिकतर सरकारी कार्यालय बंद रहे, जबकि बंगाईगांव पुलिस अधीक्षक कार्यालय बाढ़ के पानी में डूब गया.
बाढ़ के कारण बिजनी और चापराकाटा रेलवे स्टेशन के बीच एक स्थान पर रेलवे पटरी क्षतिग्रस्त हो जाने से राजधानी सहित कई यात्री ट्रेनें बाधित हो गईं.
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने वृहस्पतिवार को बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई ट्रेनों को स्थगित कर दिया.

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विधायक बंधक
इस बीच सरकारी राहत और बचाव कार्य से नाराज़ लोगों ने गुरुवार को हालचाल पूछने आए 18 विधायकों का रास्ता रोक अपना विरोध जताया.
बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन राहत पहुंचाने के नाम पर पूरी तरह विफल हुआ है.
ये विधायक ज़मीनी स्तर पर स्थिति का जायज़ा लेने प्रभावित इलाक़ों के दौरे पर गए थे, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर शरण ले रखे पीड़ितों ने इनको घेर लिया.
विधायकों को स्थानीय पुलिस की मदद से बाहर निकला गया. कई विधायकों ने स्वीकारा कि बाढ़ के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है.

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राहत कार्य में परेशानी
कोकराझाड़ ज़िला उपायुक्त एमपी शर्मा ने बताया कि लगातार बारिश होने के कारण राहत कार्य में जुटे अधिकारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
एनडीआरएफ़, एसडीआरएफ़, सेना के जवान तथा ज़िला और पुलिस प्रशासन की टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं.
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार डिब्रूगढ़ और जोरहाट के निमाती घाट में ब्रह्मपुत्र अपने ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है.
अधिकतर ज़िलों में प्रमुख नदियों को पानी लगातार बढ़ रहा हैं. बाढ़ में अबतक पांच लोगों की मौत हो चुकी हैं.
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