मैं अपनी ग़लतियों से हारीः साइना नेहवाल

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
इंडोनेशिया में आयोजित विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल मंगलवार को स्वदेश लौट आईं.
विश्व चैम्पियनशिप में लगातार पांच बार क्वार्टर फ़ाइनल में हारकर बाहर होने के बाद आखिरकार उन्होंने इस बार इस मिथक को तोड़ा.
फ़ाइनल में स्पेन की कैरोलिन मारिन से हारने के बावजूद साइना नेहवाल अपनी इस कामयाबी से बेहद खुश हैं और उन्होंने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि एक विश्व चैम्पियनशिप के पदक के साथ घर लौटना एक ख़ास अहसास है.
"पूरे टूर्नामेंट में खेल शानदार रहा हालांकि फ़ाइनल में कुछ ग़लतियां रहीं जिसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ा."
शोर से फ़र्क पड़ा?

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क्वार्टर फ़ाइनल और उसके बाद सेमी फ़ाइनल में इंडोनेशिया की ही फेनेत्री के ख़िलाफ मैच को लेकर उन्होंने कहा कि फेनेत्री को स्थानीय दर्शकों का भरपूर समर्थन मिल रहा था. फेनेत्री के ख़िलाफ जो छोटी-मोटी ग़लतियाँ हुई, वह दर्शकों के शोर के कारण ही हुईं.
साइना मानती है कि पूरे टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल में चीन की वांग यिहान के ख़िलाफ़ उनका मुक़ाबला सबसे अधिक कठिन रहा. यिहान इससे पहले चीन-ताइपे टूर्नामेंट जीत चुकी थीं.
फ़ाइनल में कैरोलिन मारिन ने काफी शोर मचाया और अंपायर ने उन्हे चेतावनी भी दी क्या इससे भी आपके खेल पर फर्क पड़ा?
इसे लेकर साइना मानती हैं कि, "ऐसा तो होता ही रहता है, यह भी एक मैच था. अगली बार यही कोशिश रहेगी कि और अधिक सतर्क रहूँ."
अपनी फिटनेस को लेकर साइना ने कहा कि अब वह काफी बेहतर है लेकिन इसके लिए उन्होंने बेहद मेहनत की है.
साइना कहती हैं कि यह साल उनके लिए एक सपने के जैसा रहा है क्योंकि वह आल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप के फ़ाइनल तक पहुंचीं.
इसके अलावा उन्होंने इंडियन ओपन जीता.
नंबर एक की दौड़

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साइना का कहना है कि उनके लिए ओलंपिक का पदक सबसे महत्वपूर्ण है और वे चाहती हैं कि और भी बेहतर प्रदर्शन करें.
साइना लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.
साइना नेहवाल अपनी कामयाबी का श्रेय अपने नए कोच विमल कुमार और घरवालों को देती हैं. प्रकाश पादुकोण की दी सलाह को भी वह बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं.
साइना अब नंबर एक खिलाड़ी भी बनने जा रही हैं. वो कहती हैं, "यह एक महान अनुभव है. इस बार मैं लंबे समय तक नंबर एक बने रहना चाहूंगी."
अपने बैडमिंटन छोड़ने को लेकर साइना कहती हैं, "कई बार खिलाड़ी बेहद निराश हो जाते हैं, आखिरकार वह भी तो एक इंसान हैं. कई बार आप जो चाहते हैं, वो नहीं मिलता और उसे पाने में कोई आपका साथ नहीं देता तो दुख होता है."
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