मर्द क्यों करते हैं बलात्कार?

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- Author, आइचा अबाकान
- पदनाम, बीबीसी तुर्की
हाल ही में तुर्की में कथित तौर पर बलात्कार का विरोध करने वाली एक 20 साल की महिला की हत्या के बाद हज़ारों तुर्की महिलाओं ने बलात्कार, यौन हिंसा और उत्पीड़न के ख़िलाफ़ खुलकर मोर्चा संभाला है.
सोशल मीडिया पर महिलाओं ने यौन दुराचार और बलात्कार की बातें खुलकर साझा कीं.
बीबीसी तुर्की ने तुर्की की मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर साहिका यूकसेल से बलात्कारी के यौन व्यवहार पर बात की.
पेश है बातचीत के अंश
क्यों करते हैं मर्द बलात्कार? बलात्कारी का मक़सद क्या होता है?

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यह मानना बिल्कुल ग़लत है कि मर्द अपने यौन ज़रूरतों के लिए बलात्कार करते हैं.
बलात्कार एक यौन क्रिया नहीं है. बलात्कार एक तरह की हिंसा है. यह हावी होने के मक़सद से किया जाता है.
यह किसी चीज़ पर अपनी पकड़ मज़बूत करने जैसा है और इस सोच के तहत औरत एक सामान की तरह होती है.
यह अपनी ताक़त दिखाने जैसा है और बिल्कुल कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्हें इसमें मज़ा आता है.
असल में बलात्कार एक संगीन अपराध है लेकिन सिर्फ़ यही एक ज़ुल्म नहीं है जो मर्द, औरतों पर करते हैं.

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जब वे औरतों पर मानसिक और शारीरिक हिंसा करते हैं, उन्हें आर्थिक रूप से दबाते हैं, उनका अपमान करते हैं, उनके साथ भेदभाव करते हैं तो फिर आख़िरकार बलात्कार भी करते हैं.
क्या एक बलात्कारी के परवरिश का भी उसके व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है?
बच्चे अक्सर एक पुरुषवादी माहौल में पलते-बढ़ते हैं. एक औरत को उसके पति की मनमानी माननी होती है. इसकी वजह से यह व्यवहार उनके बच्चों में भी दिखता है.
वे लड़कियां जिनकी माएं घर के अंदर हिंसा की शिकार होती हैं वे भी अपने वैवाहिक जीवन में अक्सर ऐसी हिंसा की शिकार होती हैं.
जिन लड़कों की माएं घर में पिता के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं वे भी अपने वैवाहिक संबंध में हिंसक होते हैं.

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समाज में लड़कों-लड़कियों का व्यवहार इससे तय होता है कि उनकी मांओं के साथ उनके पिता कैसे पेश आते हैं.
यह समस्या क़रीब-क़रीब पूरी दुनिया में एक जैसी ही है.
अगर किसी मर्द में ऐसी प्रवृत्ति मिलती है और वह इसे दूर करना चाहता है तो उसे क्या करना चाहिए?
कोई भी इसे तब तक नहीं बदल सकता जब तक कि वह यह न माने कि उसने ग़लती की है और वे उस ग़लती के लिए ज़िम्मेवार हैं.
अगर वे ऐसे व्यवहार का दोषी पाया जाता है और कहता है कि वह ऐसा नहीं करना चाहता था तो ऐसी हालत में वह कभी नहीं बदल सकता.
ऐसे मर्दों की तादाद बहुत कम है, जो बिना ग़लती किए अपने अंदर ऐसी प्रवृत्ति को भांप लेते हैं और मदद की गुहार करते हैं.

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हर किसी को सुधरने का और एक सामान्य जीवन जीने का अधिकार है. इसके लिए दुनिया भर में कई सारे सुधार कार्यक्रम हैं. उन लोगों में दुबारा यौन हिंसा करने की गुंजाइश कम होती है जो ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होते हैं.
इस तरह के सुधार कार्यक्रम कम उम्र के यौन अपराधियों के लिए विशेष तौर पर फ़ायदेमंद हैं.
मैं कहना चाहूंगी कि यौन अपराधियों के लिए मौत की सज़ा मानवीय नहीं है. संयुक्त राज्य अमरीका के जिन राज्यों में मौत की सज़ा का प्रवधान है वहां ऐसा नहीं है कि अपराध दर कम है.
हम अक्सर बलात्कार की घटना के बाद ऐसी बातें सुनते हैं लेकिन हमारा उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण नहीं है जो बदले की भावना पर आधारित हो.
हमारा मक़सद ऐसा समाज बनाना है जो यौन अपराध और बलात्कार जैसी घटनाओं से मुक्त हो.
अगर महिला में ख़ुद पर यौन हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज उठाने का साहस हो तो वे क्या कर सकती हैं?
ऐसे समाज में जहां सेक्स पर पाबंदियां हों और शादी से पहले यौन संबंध की निंदा हो वहां यौन हिंसा की कभी रिपोर्ट नहीं की जाती.
एक बलात्कारी यह अच्छी तरहजानता है इसलिए वह औरत को धमका सकता है, ब्लैकमेल कर सकता है. ऐसे में पीड़ित महिला को क़ानून का सहारा लेना चाहिए. उसे अपने दोस्तों और नज़दीकियों से बात करनी चाहिए.
यह नहीं कि ऐसी हिंसा पर चुप रहा जाए.
यौन हिंसा की वजह से कई तरह की शारीरिक समस्याएं, यौन संक्रामक रोग और गर्भ ठहरने जैसी समस्याएं हो सकती है. इसलिए ज़रूरी है कि बलात्कार की शिकार महिला जल्द से जल्द क़दम उठाए.
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