'बलात्कारी' क्यों बने 'जमाई राजा'!

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
ओडिशा में बलात्कार की शिकार एक महिला ने हाल ही में अपने बलात्कारी से शादी कर ली.
28 जनवरी को हुई यह शादी अदालत के आदेश के अनुसार और भुवनेश्वर के झारपडा जेल के अंदर जेल अधीक्षक रबीन्द्रनाथ स्वाईं की देखरेख में हुई.
शादी में लड़की के परिवार के लोग मौजूद थे, लेकिन दूल्हे के परिवारवाले इसमें शरीक नहीं हुए. इसलिए ख़ुद जेल अधीक्षक को दूल्हे के पिता की भूमिका निभानी पड़ी.
शादी के बाद बाहर इंतज़ार कर रहे मीडिया के साथ बातचीत में राजश्री नाम की इस लड़की ने कहा,"जब मुझे तसल्ली हुई कि वे मेरा पूरा ख़याल रखेंगे, तभी मैं शादी के लिए राज़ी हुई."
अपने 'पति' दिलीप बेहेरा के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे के बारे में उन्होंने कहा कि वह उसे वापस ले लेंगी.
पर जिस शख़्स के साथ पहली मुलाक़ात इतना कड़वा अनुभव दे गई हो उसके साथ जीवन बिताने को तैयार होने के क्या कारण थे?
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जनवरी 2014 को दिलीप ने राह चलती राजश्री को लिफ़्ट देने के बहाने अपने ट्रक में बिठाया और एक सुनसान जगह ले जाकर उनसे बलात्कार किया था.
घटना के चार-पांच दिन बाद लड़की के पिता की ओर से दायर एफ़आईआर के तहत भुवनेश्वर के निकट चंदका पुलिस ने दिलीप को गिरफ़्तार कर लिया.
लगभग एक साल बाद अपनी अनोखी शादी के तीन दिन बाद 31 जनवरी को आख़िरकार दिलीप ज़मानत पर रिहा किए गए.
जिल्लत

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लड़की के पिता दैतारी नाटुआ ने बीबीसी से बातचीत में माना कि बलात्कारी के साथ अपनी बेटी की शादी करने के अलावा उनके पास कोई 'चारा' नहीं था.
उन्होंने कहा,"उसकी पूरी ज़िंदगी नष्ट हो जाती. ऊपर से उसे और हम सभी को जीवन भर जिल्लत उठानी पड़ती."
दिलीप के परिवार की ओर से शादी बहिष्कार के बारे में दैतारी कहते हैं, "जमाई को भरोसा है कि कुछ समय बाद उनका परिवार मेरी बेटी को बहू के रूप में स्वीकार कर लेगा और दोनों को घर वापस ले जाएगा."
लेकिन क्या उन्होंने सोचा है कि आगे चलकर अगर दिलीप ने उनकी बेटी को ठुकरा दिया तो वे क्या करेंगे?
इस पर दैतारी ने पहले तो यह कहा कि अदालत ने उन्हें कहा है कि किसी भी तरह की समस्या होने पर क़ानून का दरवाज़ा खटखटाएं.
लेकिन आगे वह कहते हैं "भगवान की जो मर्ज़ी. जब ऐसे हालत आएंगे तो झेलेंगे."
इंटरव्यू

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लड़की की मां से मैंने दो बार बात की. पहली बार 31 जनवरी की दोपहर फ़ोन पर और फिर अगली सुबह आमने-सामने.
लेकिन इन चंद घंटों में उनका बर्ताव इतना बदल गया था की मुझे लगा कि फ़ोन पर मुझसे बात करने वाली महिला कोई और थीं.
शनिवार को एक औपचारिक रेडियो इंटरव्यू के लिए राज़ी हुई लड़की की मां ने रविवार सुबह इंटरव्यू के लिए साफ़ मना कर दिया.
वजह पूछने पर उन्होंने कहा, "जमाई राजा नहीं चाहते कि मीडिया में हमारा कोई बयान आए."
मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि अब तो शादी हो चुकी है. अब मीडिया में कुछ कहने से क्या फ़र्क पड़ने वाला है?
मैंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि शादी के तत्काल बाद उनकी बेटी ने तमाम टीवी कैमरों के सामने बयान दिया था, लेकिन वे मेरी एक सुनने के लिए तैयार नहीं थीं.
लाचारी

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आख़िर ऐसा क्या हो गया चंद घंटों में कि इंटरव्यू के लिए ख़ुद समय निश्चित कर घर बुलाने वाली लड़की की मां अब लड़की से बात कराना तो दूर ख़ुद भी बात करने को तैयार नहीं हैं.
पता चला कि शनिवार देर शाम दिलीप को ज़मानत मिल गई और वह जेल से रिहा होकर लड़की के साथ उनके घर आ गए.
लड़की की मां ने हमसे कहा कि लड़की और उनका पति एक रिश्तेदार के यहां गए हैं. लेकिन बाद में पता चला कि वे घर पर ही मौजूद थे.
पिता ने अपनी मजबूरी निसंकोच मान ली लेकिन मूक मां ने अपनी लाचारी दिखा दी थी.
अब लड़की की मज़बूरी देखिए. मामला क्योंकि पुलिस में जा चुका था, मीडिया में छप चुका था और लड़का गिरफ़्तार होकर जेल में था, इसलिए उसकी शादी लगभग असंभव थी.
फ़ैसला

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अपने बलात्कारी को पति मानने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था क्योंकि वह जानती थीं कि बलात्कार की शिकार महिलाओं को समाज किस नज़र से देखता है.
दिलीप की परेशानी यह थी कि अगर वह लड़की से शादी न करते, तो उन्हें बलात्कार के नए क़ानून के तहत लंबी सज़ा होती.
अगर शादी के बाद सचमुच दिलीप का हृदय परिवर्तन हुआ है और वह राजश्री को सचमुच पत्नी का दर्ज़ा देता है तो यह एक अनोखा प्रेम बंधन है, लेकिन अगर दिलीप ने यह फ़ैसला केवल जेल से छूट पाने के लिए लिया है तो राजश्री की संवरती ज़िंदगी एक बार फिर बिखर जाएगी.
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