वो 10 बातें जो विक्रांत को बनाती हैं यादगार

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भारत के पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है.
1961 में शुरू होकर 31 जनवरी 1997 को खत्म हुआ आईएनएस विक्रांत का सफर, उससे जुड़ी दस ख़ास बातें.
1. आईएनएस विक्रांत भारत का पहला विमान वाहक पोत था.
2. भारत ने इसे ब्रिटेन के रॉयल नेवी से साल 1957 में खरीदा था.
3. एचएमएस हरक्यूलस के नाम से जाने जाने वाले आईएनएस विक्रांत को रॉयल नेवी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तैयार किया था.
4. मैजेस्टिक श्रेणी के इस विमान वाहक पोत को 1961 में नौसेना में शामिल किया गया था और जनवरी 1997 में ये कहते हुए इसकी सेवा समाप्त कर दी गई कि पोत का रख-रखाव संभव नहीं है.

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5. आईएनएस विक्रांत ने साल 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की नौसेना के लिए बड़ी मुसीबत था.
6. 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान ने कहा था कि उसने विक्रांत को डूबो दिया है जबकि वह मुंबई के नौसेना की पोतगाह में वह कुछ तब्दीलियों से गुजर रहा था.
7. साल 1971 में हुए युद्ध के दौरान आईएनएस विक्रांत ने पाकिस्तान की नौसैनिक घेरेबंदी में अहम भूमिका निभाई थी.

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8. बांगलादेश को आज़ाद करने का अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण इससे जुड़े अधिकारियों को दो महावीर चक्र और 12 वीर चक्र मिले.
9. कई दिग्गज नौसैनिकों और वायुयान चालकों ने इस पोत पर प्रशिक्षण पाया. पूर्व नौसैनिक प्रमुख एडमिरल आरएच तहिलयानी पोत के डेक पर हवाईजहाज उतारने वाले पहले भारतीय थे.
10. शिप ब्रेकिंग कंपनी आईबी कमर्शियल्स के मुताबिक 36 साल भारत की सेवा करने वाले इस विमानवाहक पोत को तोड़ने में 7-8 महीने लगेंगे.
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