समंदर का रुख़ करते भूखे-प्यासे शेर

- Author, अंकुर जैन
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गुजरात में शेरों की संख्या में भले ही बढ़ोतरी हुई हो लेकिन पानी की कमी की वजह से ये शेर अब समुद्र का रुख़ कर रहे हैं.
फ़्लोराइड वाला पानी पीने से कुछ शेरों के दांत टूटने के मामले भी सामने आए हैं. खाने की कमी की वजह से शेर कस्बों और गांवों का भी रुख़ कर रहे हैं.
वन्य जीव कार्यकर्ताओं की आशंका है कि ये शेर उत्तर या दक्षिण गुजरात तक पहुंच सकते हैं.
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खाने और पानी की कमी की वजह से गुजरात में शेरों के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है.
गीर अभयारण्य से शेर शत्रुंजी नदी के साथ-साथ चलते हुए पानी की तलाश में 300 किलोमीटर तक का सफ़र तय कर के समुद्र तट तक पहुंच जाते हैं.

गीर के उप वन संरक्षक संदीप कुमार कहते हैं, “शेर हमेशा झुंड में रहते हैं. एक झुंड में करीब 10 शेर होते हैं जिस पर एक या दो शेरों का दबदबा होता है. तीन साल का हो जाने पर किसी भी शेर को झुंड छोड़ना होता है और नया इलाका ढूंढना होता है.”
पानी का इंतज़ाम
गीर पूर्व के वन अधिकारी अंशुमान शर्मा कहते हैं, "झुंड छोड़ने के बाद ज़्यादातर शेर शत्रुंजी नदी के साथ चलते हैं और समुद्र तक पहुंच जाते हैं."

सौराष्ट्र में पानी की कमी बड़ी समस्या है. वन विभाग ने यहां करीब 600 जगहों पर पानी का इंतज़ाम किया है. इनके अलावा सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा पर आधारित छोटे जल स्थान भी हैं.
वन्य जीव कार्यकर्ता तखुभाई सांसु कहते हैं, “मॉनसून के अलावा जानवरों को पानी की तलाश में कई किलोमीटर चलना पड़ता है. अब तटीय इलाकों वेरावल और कोडीनार में भी शेर मिलते हैं.”
वो कहते हैं कि संभव है कि अगले 10 साल में शेर पानी की तलाश में दक्षिण या उत्तर गुजरात तक पहुंच जाएं.
'बिन दांत के बोखे शेर'

गीर से 150 किलोमीटर दूर स्थानीय लोग अजीबोग़रीब बात देख रहे हैं.
जीव विज्ञान के छात्र राजन जोशी बताते हैं, “लिलिया और गाड़ियाधार में करीब 45 शेरों ने अपना ठिकाना बनाया है. लेकिन इस इलाके में पानी में फ़्लोराइड ज़्यादा है और सभी गांवों में पानी साफ़ करने के प्लांट लगे हुए हैं. लेकिन जंगली जानवर तो फ़्लोराइड वाला पानी ही पीते हैं. हमने इस इलाके में कुछ शेर देखे हैं जिनके दांत टूट गए हैं. हम उन्हें ‘बोखा शेर’ बुलाते हैं.”

वन्य जीव विशेषज्ञ डॉक्टर रवि चेलम इसे दुर्लभ बात बताते हैं. वो कहते हैं, “पानी की वजह से ही शेर सौराष्ट्र में इतनी दूर तक चलते हैं. पानी ठीक नहीं होगा तो शेर और आगे जाएंगे.”
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