प्रधानमंत्री तोड़ेंगे 'चुप्पी'

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ‘चुप्पी’ को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री अब बड़े मुद्दों पर संपादकों के साथ सीधे संवाद कायम करेंगे.
पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री ने सिर्फ दो संवाददाता सम्मेलन किए हैं. इस बीच सरकार पर कई तरह के आरोप लगे हैं और मीडिया हलकों में प्रधानमंत्री को मौन प्रधानमंत्री की संज्ञा दी जाने लगी है.
इसी के मद्देनज़र प्रधानमंत्री की मीडिया नीति में बदलाव किया जा रहा है और बुधवार को प्रधानमंत्री मीडिया के संपादकों से मुलाक़ात करेंगे.
प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और संपादकों के बीच मुलाक़ात का सिलसिला शुरु हो जाएगा और इस तरह की बातचीत जारी रहेगी.’’
प्रधानमंत्री ने फरवरी महीने में टेलीविज़न के संपादकों से मुलाक़ात की थी और सवालों के जवाब दिए थे. इससे पहले पिछले वर्ष सितंबर में उन्होंने प्रिंट मीडिया के संपादकों से बातचीत की थी.
संपादकों और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत प्रधानमंत्री कार्यालय के वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकार के सामने कई समस्याओं के मद्देनज़र प्रधानमंत्री कार्यालय को लगता है कि प्रधानमंत्री को अब इन मुद्दों पर सामने आकर जवाब देने चाहिए ताकि देश को पता चले कि वो इन समस्याओं से किस तरह निपट रहे हैं.
पिछले कुछ दिनों में न केवल विपक्ष बल्कि सिविल सोसायटी के लोग भी प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर उनकी कड़ी आलोचना करते रहे हैं.
लोकपाल बिल पर चल रहे विवाद में भी लोगों में यह जानने की इच्छा है कि वो इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं लेकिन प्रधानमंत्री का रुख इस पर स्पष्ट नहीं है.
अन्ना हजा़रे और उनके समर्थक कई बार कह चुके हैं कि इस मसले पर उन्हें प्रधानमंत्री की चुप्पी समझ में नहीं आ रही है.
विपक्षी दलों का भी कहना है कि प्रधानमंत्री को शासन में आ रही खामियों पर जवाब देना चाहिए.
इससे पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि वो ये मानते हैं कि कई लोग ये चाहते हैं कि प्रधानमंत्री बड़े मुद्दों पर अपना पक्ष, अपना रुख स्पष्ट करें.












