यूक्रेन पर यूएन के शांति प्रस्ताव पर पाकिस्तान, भारत और चीन का क्या रुख़ रहा - प्रेस रिव्यू

रूस

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इमेज कैप्शन, रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था.
बीबीसी हिंदी

यूएन आम सभा का प्रस्ताव

  • 141 देशों ने पक्ष में वोट किया और कहा कि रूसी सेना को जल्द से जल्द यूक्रेन से बाहर निकलना चाहिए.
  • 7 देशों में प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोटिंग की. ये हैं- रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, सीरिया, माली, एरिट्रिया और निकारागुआ.
  • 32 देशों मे यूएन प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं की.
  • जिन देशों ने प्रस्ताव पर वोट नहीं किया वो हैं- भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका.
  • संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत दा बिंग ने यूक्रेन को हथियार दे रहे मुल्कों की आलोचना की. उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति वार्ता के लिए रास्ता तलाशे."
  • रूस के डिप्टी यूएन एंबेसडर दिमित्री पोल्यांस्की ने इस कार्रवाई को 'बेकार' करार दिया.
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यूक्रेन युद्ध के ठीक एक बरस पूरे होने की पूर्वसंध्या पर यूएन जनरल असेंबली में लाए गए शांति प्रस्ताव पर भारत एक बार फिर वोटिंग से दूर रहा है.

'द हिंदू' की रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव लाया गया.

इसमें यूएन चार्टर के सिद्धांतों के मुताबिक़ यूक्रेन में 'समग्र, न्यायोचित और स्थायी शांति' हासिल करने की ज़रूरत को रेखांकित किया गया था.

प्रस्ताव पारित हो गया है. इसके पक्ष में 141 वोट पड़े जबकि इसके ख़िलाफ़ सात.

लेकिन भारत और चीन समेत 32 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. जिन देशों ने यूएन में इस प्रस्ताव पर वोट नहीं किया उनमें भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और ईरान शामिल हैं.

यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए 193 सदस्यीय महासभा ने उस मसौदा प्रस्ताव को स्वीकार किया था, जिसे यूक्रेन और उसके समर्थक देशों ने आगे बढ़ाया था. इसमें कहा गया था कि जितनी जल्दी हो सके यूक्रेन में शांति के लिए एक समग्र, न्यायोचित और स्थायी शांति लाने के कदम उठाए जाएं.

ये प्रस्ताव यूएन चार्टर के सिद्धांतों पर आधारित था. प्रस्ताव में सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मकसद को हासिल करने के लिए सहयोग की अपील की गई थी.

प्रस्ताव पर वोटिंग

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प्रस्ताव में यूक्रेन की उस सीमा के अंदर उसकी संप्रभुता, आज़ादी, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली हुई है.

इसमें कहा गया है कि रूस बगैर किसी देरी और शर्त के यूक्रेनी इलाकों से पूरी तरह वापस चला जाए.

पिछले साल यूक्रेन (24 फरवरी 2022) पर रूस के हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद और ह्यूमन राइट्स काउंसिल में कई प्रस्ताव लाए गए.

इन प्रस्तावों में यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा की गई थी और यूक्रेन की संप्रभुता,आज़ादी, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया था.

भारत यूक्रेन पर लाए गए प्रस्तावों पर वोटिंग से दूर रहा है. लेकिन उसने हमेशा ये कहा है कि यूएन चार्टर, अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए.

भारत ने यूक्रेन और रूस के बीच दुश्मनी से प्रेरित कार्रवाइयों को तुरंत रोकने के मांग की थी. उसका कहना है कि इस मामले में बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

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सितंबर 2022 में यूएन के एक उच्चस्तरीय सेशन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत शांति, बातचीत और डिप्लोमेसी के पक्ष में है.

भारत ने लगातार कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष से पूरे ग्लोबल साउथ को काफी नुक़सान उठाना पड़ा है.

इस युद्ध से खाद्यान्न, ईंधन और फर्टिलाइजर की सप्लाई पर असर पड़ा है और विकासशील देशों को इसका खमियाजा भुगतान पड़ रहा है.

पंजाब

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पंजाब में 'वारिस पंजाब दे' के समर्थक थाने में घुसे, पुलिस ने हथियार डाला

पंजाब के अमृतसर शहर के नज़दीक गुरुवार को उस वक्त अफ़रातफ़री मच गई जब 'वारिस पंजाब दे' के नेता अमृतपाल सिंह के सैकड़ों समर्थक तलवार और बंदूक लेकर अजनाला पुलिस थाने में घुस गए.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताब़िक हथियारों से लैस अमृतपाल सिंह के समर्थक तब तक वहां जुटे रहे जब तक पुलिस ने उनके समर्थकों को ये 'भरोसा' नहीं दे दिया कि उनके साथी लवप्रीत सिंह तूफान को शुक्रवार को छोड़ दिया जाएगा.

लवप्रीत को अपहरण समेत कई अन्य आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है.

29 साल के अमृतपाल सिंह खालिस्तान समर्थक हैं. पिछले साल वो एक्टर-एक्टिविस्ट दीप सिंह सिद्धू की मौत के बाद 'वारिस पंजाब दे' संगठन की कमान संभालने दुबई से लौटे थे.

अमृतपाल समेत 25 लोगों पर अपहरण का आरोप लगा है.

उनके ख़िलाफ़ वरिंदर सिंह नाम के शख़्स की शिकायत पर आरोप दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने अमृतपाल और उनके साथियों पर झूठा प्रपोगंडा फैलाने की शिकायत की थी. उनका कहना था उन्होंने इस संबंध में वीडियो अपलोड किए थे.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में पीटीआई की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें अमृतपाल ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी है.

थाने में अमृतपाल ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने लवप्रीत की रिहाई के लिए पुलिस को 'अल्टीमेटम' जारी किया है.

अमृतपाल ने कहा, "कुछ पेपरों ने लिखा है कि अमृतपाल हताश है. वह अलग-थलग पड़ गया है…. देखिये भक्तों ने किस तरह मेरा समर्थन किया है."

अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने थाने में घुसने से पहले बैरिकेड तोड़ डाले और पुलिसकर्मियों से भिड़ गए. इस घटना में एक पुलिस अफसर समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए.

मौक़े पर पहुंचे अमृतसर के पुलिस कमिश्नर जसकरन सिंह, अमृतसर (ग्रामीण) के एसएसपी सतिंदर सिंह ने भी अमृतपाल से सीधे बातचीत की.

इसके बाद पुलिस ने कहा कि लवप्रीत को आरोप से बरी कर दिया जाएगा. साथ ही उसे रिहा करने के लिए क़ानूनी कदम भी उठाए जाएंगे.

पंजाब

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केंद्र की राज्यों को चेतावनी, फ्लैगशिप स्कीमों का नाम बदला तो नहीं मिलेगा फंड

केंद्र सरकार ने राज्यों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने उसकी फ्लैगशिप योजनाओं के नाम और गाइडलाइंस बदले तो इसका फंड रोक दिया जाएगा.

'हिन्दुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट में कहा गया है अगर राज्यों ने 'प्रधानमंत्री आवास योजना', 'प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना' 'आयुष्मान भारत' जैसी केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं का नाम और गाइडलाइंस बदले तो इस मद में उन्हें मिलने वाला फंड बंद कर दिया जाएगा.

अख़बार के मुताबिक़ वित्त मंत्रालय ने पहले ही कहा था कि 2023-24 के पूंजीगत व्यय को ध्यान में रखते हुए अन्य स्कीमों का प्रबंधन देखने वाले मंत्रालय भी ऐसा कदम उठा सकते हैं.

वित्त मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि राज्यों के पूंजीगत खर्च के मामले में उन्हें फंड तभी मिलेगा जब वे केंद्र की फ्लैगशिप के नाम और गाइडलाइंस न बदलें.

केंद्र ने राज्यों से पहले ही उनके पूंजीगत खर्च के ब्योरे मांगे हैं. फरवरी के पहले सप्ताह उनसे 2023-24 के पूंजीगत खर्च के ब्योरे मांगे गए थे. इसमें कहा गया था कि केंद्र की फ्लैगशिप स्कीमों के नाम में किसी भी तरह के बदलाव की कोशिश राज्यों को केंद्र के फंड से महरूम कर देगी.

भारत

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प्राइवेट बैंकों के बाद अब पब्लिक सेक्टर बैंकों ने एफडी पर बढ़ाया ब्याज

महंगाई दरों में बढ़ोतरी को देखते हुए प्राइवेट बैंकों के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों ने भी फिक्स्ड डिपोज़िट पर ज़्यादा ब्याज देने की शुरुआत कर दी है.

'इकोनॉमिक टाइम्स' की ख़बर के मुताबिक़ एफ़डी पर इन बैंकों की ब्याज दरें 7.75 से बढ़कर 8 फ़ीसदी तक पहुंच गई हैं. सीनियर सिटिजन डिपोज़िटरों के लिए ब्याज दरें बढ़ कर 8.5 फ़ीसदी तक पहुंच गई हैं.

इस मामले में एसबीआई ने पहल करते हुए 400 दिनों के एफ़डी पर 7.1 फ़ीसदी का ब्याज ऑफर किया है. वहीं इस अवधि के दौरान सीनियर सिटिजन को 7.6 फ़ीसदी ब्याज मिलेगा.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 800 दिनों के डिपोज़िट पर 7.3 फ़ीसदी ब्याज दे रहा है.

एसबीआई

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सेंट्रल बैंक 444 दिनों के एफडी पर 7.25 फीसदी ब्याज दे रहा है. पंजाब और सिंध बैंक ऑनलाइन एफडी कराने पर 221 दिनों के लिए आठ फीसदी ब्याज दे रहे हैं. इस तरह के एफ़डी पर वो सीनियर सिटिजन को साढ़े आठ फीसदी ब्याज दे रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों में एफ़डी पर कम ब्याज दरों के दौर में लोगों का रुझान म्यूचुअल फंड की ओर बढ़ा था.

लेकिन अब ऐसी बात नहीं है. लोगों का रुझान अब बैंक एफ़डी की ओर बढ़ रहा है. क्योंकि म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं है. इसलिए भी बैंक एफ़डी की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है.

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