पटना और लखनऊ से चार संदिग्ध चरमपंथियों की गिरफ़्तारी का क्या है पूरा मामला

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से
बिहार की राजधानी पटना का फुलवारी शरीफ़ इलाका इन दिनों सुर्खियों में है.
पुलिस टीम इलाके के अलग-अलग मोहल्ले में छापेमारी कर रही है. पुलिस के मुताबिक अब तक चार 'संदिग्ध चरमपंथियों' को गिरफ़्तार किया गया है.
संदिग्ध चरमपंथियों के नाम अतहर परवेज़, मोहम्मद जलालुद्दीन, अरमान मलिक और नूरुद्दीन जंगी बताए गए हैं. पुलिस ने 26 लोगों के ख़िलाफ़ नामजद एफ़आईआर भी की है.
पुलिस के मुताबिक चौथी गिरफ़्तारी शनिवार को हुई है. पटना पुलिस ने पेशे से वकील नूरुद्दीन जंगी को लखनऊ से गिरफ़्तार किया है.
पुलिस के दावे के मुताबिक वो पीएफआई से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं. वकील नूरुद्दीन जंगी साल 2020 में विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं.

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क्या है पुलिस का दावा?
पटना के फुलवारी शरीफ इलाके के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मनीष कुमार ने बुधवार (13 जुलाई) शाम मीडिया के सामने दावा किया कि नया टोला नहर पर एक मकान में देशविरोधी और विशेषकर समुदाय विरोधी कार्य किए जा रहे थे.
मनीष कुमार ने दावा किया कि उन्हें ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं और वो एजेंसियों के माध्यम से सूचना का सत्यापन करवा रहे थे. पुलिस के दावे के मुताबिक वहां पिछले दो महीने से बेनाम गतिविधियां चल रही थीं. दूसरे राज्यों से लोग आ-जा रहे थे. आने-जाने वाले लोग संदेहास्पद थे. लोग नाम बदलकर होटल में रहते और हवाई यात्राएं करते थे.
उन्होंने बताया कि सोमवार (11 जुलाई) को सटीक जानकारी मिलने पर उन्होंने पुलिस की टीम के साथ अहमद पैलेस की ऊपरी मंजिल पर छापेमारी की.
एएसपी मनीष कुमार ने बताया, "पुलिस ने अपनी टेक्निकल और साइंटिफिक जांच में इस बात की पुष्टि की और सोमवार रात वहां छापेमारी की. मौके से झारखंड पुलिस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज़ को गिरफ़्तार किया गया."
अतहर परवेज़ पूर्व में सिमी के सदस्य रह चुके हैं और उनके छोटे भाई मंजर परवेज़ बिहार में 2001-02 में हुए धमाकों के मामले में जेल भेजे गए थे. 2001, 2003 और 2013 में जो 'आतंकी गतिविधियों' के मामले आए, उन अभी मामलों के अभियुक्तों के यह जमानतदार रहे हैं.
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पुलिस ने ये दावा भी किया कि पिछले दो साल से अतहर परवेज़ पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के नाम पर लोगों को ट्रेनिंग दे रहे थे. वो बाहर के 'चरमपंथी तत्वों' को आश्रय दे रहे थे और उनसे संवाद कर रहे थे.
पुलिस के मुताबिक 6-7 जुलाई को इन्होंने मार्शल आर्ट के नाम पर स्थानीय लोगों को तलवार और चाकू चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ ही लोगों को दूसरे सम्प्रदाय के प्रति उन्मादित करने और विद्वेष फैलाने के प्रयास किए.
मोहम्मद जलालुद्दीन भी वहीं मौजूद रहते थे और छापेमारी के दौरान पुलिस ने ' इंडिया 2047- टुवार्ड्स रूल ऑफ़ इस्लाम इन इंडिया' नाम से तैयार डॉक्यूमेंट बरामद किया है.
हालांकि झारखंड पुलिस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मोहम्मद जलालुद्दीन के बेटे मोहम्मद आमिर (29) ने पुलिस के इन तमाम दावों को सिरे से ख़ारिज किया है.
उन्होंने अपने दावे के समर्थन में मकान का सीसीटीवी फुटेज भी मीडियाकर्मियों से साझा किया है.
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जलालुद्दीन के बेटे ने ख़ारिज किए आरोप
आमिर से जब बीबीसी ने पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों और पीएफआई व एसडीपीआई के साथ उनके परिवार या उनके पिता के संबंध को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा, "पीएफआई हो या फिर एसडीपीआई से हमारा या हमारे परिवार से कोई मतलब नहीं. हमको तो पता भी नहीं कि ई सब है क्या? क्या पार्टी है?"
जब उनसे उनके पिता और किराएदार (अतहर परवेज़) के साथ काम करने और जान-पहचान को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा, "देखिए यहां मेरी दुकानें और मकान है. मैंने रेंट के लिए प्रचार लगाया. अतहर परवेज़ प्रचार देखकर किराए पर जगह मांगने आए. उससे पहले हम लोगों का उनसे कोई संपर्क नहीं था."
उन्होंने कहा, "वो यहां से एनजीओ का ऑफिस चलाएंगे. ग़रीब लड़का-लड़की की शादी कराने, लोगों को पढ़ाने-लिखाने. लड़कों का नशा छुड़ाने और जिसके पास नौकरी नहीं है तो उसको काम सिखाने का काम करेंगे. जैसे बिजली मैकेनिक या और भी कुछ-कुछ. तो हमने तमाम लिखा पढ़ी के बाद उनको 16 हजार रुपये के रेंट एग्रीमेंट के बाद मकान किराए पर दिया."
आमिर से जब मकान के भीतर संदिग्ध गतिविधियां चलाए जाने के आरोपों पर सवाल किए तो उनका कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं देखा. घर में और दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. सारी गतिविधियां दर्ज हैं. वे पुलिस को हर संभव सहयोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "रही पिताजी के किसी भी तरह की गतिविधियों में शामिल होने की बात, तो पुलिस झूठ बोल रही है."
जब इस संदर्भ में हमने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार से सवाल किए तो उन्होंने कहा, "पुलिस के पास ऐसे तमाम साक्ष्य मौजूद हैं जो बताते हैं कि वे इस ग्रुप की एक्टिविटीज़ में 100 परसेंट शामिल रहते थे."

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"क्या एसडीपीआई अवैध संगठन है?"
बीबीसी की टीम अतहर परवेज़ के घर भी पहुंची. वहां मौजूद परिवार का कोई सदस्य मीडिया से बात करने के लिए तैयार नहीं था.
उनका कहना था कि सारी बातें कोर्ट में हो रही हैं. जहां बात होनी चाहिए वहां हो रही है. जब हमने स्थानीय मीडिया में चलाई जा रही ख़बरों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका कहना था कि मीडिया ऐसे लिख रहा है जैसे वो इस देश के निवासी ही नहीं हैं.
'अभी आरोप साबित नहीं हुए और उन्हें मीडिया दोषी ठहरा चुकी है. मीडिया एकतरफा बात कह रही है.'
जब हमने उनसे अतहर परवेज़ के मोहम्मद जलालुद्दीन का घर किराए पर लेने और वहां से किसी प्रकार के ऑफिस चलाने को लेकर सवाल किए तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से मना किया.
अतहर परवेज़ के पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़ाव को लेकर सवाल पर उन्होंने पलटकर पूछा, "आप ही बताएं कि क्या एसडीपीआई कोई अवैध संगठन है?"

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अरमान मलिक पर क्या हैं आरोप?
हम अरमान मलिक के घर भी पहुंचे. यहां भी परिवार का कोई सदस्य मीडिया से बात करने को तैयार नहीं हुआ. उनका कहना था कि मीडिया तो उन्हें (अरमान मलिक) 'पहले ही आतंकवादी घोषित कर चुकी है.'
इस संदर्भ में 16 जुलाई को भी पुलिस ने प्रेस वार्ता की. पुलिस का आरोप है कि अरमान मलिक पीएफआई को पैसे और तमाम चीजों से मदद करते रहे हैं. वो रियल एस्टेट से जुड़े रहे हैं. इसके साथ ही अरमान अपने मोहल्ले में 'अलबा कॉलोनी वेलफेयर कमेटी' नामक जेबी संस्था चलाते हैं.
पुलिस के मुताबिक संस्था का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है और कॉलोनी के हरेक घर से अरमान हर महीने 600 रुपये वसूलते हैं. इसका कोई खाता या बैंक अकाउंट उनके पास नहीं है.
इस आरोप को लेकर हमने अलबा कॉलोनी में मस्जिद के इमाम शाहनवाज से बात की.
इमाम ने बताया कि मोहल्ले की सड़कों की मरम्मत वगैरह के लिए कुछ पैसे तो लिए जाते थे, लेकिन उन्हें इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं. हालांकि अरमान मलिक की गिरफ्तारी उनके लिए 'शॉकिंग है.'
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पीएम के दौरे के दौरान गड़बड़ी की कोशिश को लेकर पुलिस ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 जुलाई (मंगलवार) को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे थे.
इसके ठीक पहले 11 जुलाई को पुलिस ने फुलवारी शरीफ़ से दो लोगों (मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज़) को हिरासत में लिया और उन्हें बाद में गिरफ़्तार कर लिया गया.
पुलिस ने एफ़आईआर में भी इस बात का जिक्र किया है कि फुलवारी शरीफ़ इलाके में कुछ संदिग्ध लोग पीएम मोदी के कार्यक्रम और दौरे में गड़बड़ी पैदा करने के लिए इकट्ठा हुए थे. इन लोगों को पिछले दो हफ्तों से ट्रेनिंग दी जा रही थी.
वहीं जब बीबीसी ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार से पीएम मोदी के दौरे के दौरान उक्त लोगों की ओर से गड़बड़ी पैदा करने को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि अब तक 'ऐसी कोई बात स्थापित नहीं की जा सकी है.'

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क्या कह रही है एसडीपीआई?
पुलिस के आरोपों को लेकर हमने एसडीपीआई के प्रदेश सचिव नसीम अख़्तर से बात की.
नसीम ने कहा, "हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि अतहर परवेज़ पार्टी की पटना इकाई के ज़िला महासचिव हैं, और जलालुद्दीन झारखंड पुलिस के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं."

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दोनों में से कोई भी पॉपुलर फ्रंट से जुड़ा नहीं है और रही बात एसडीपीआई की तो एसडीपीआई एक राजनीतिक पार्टी है. लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है.
पार्टी के नेताओं ने न तो आज से पहले कभी इस्लामिक राष्ट्र की बात की और न ही भविष्य में ऐसी बातें करेंगे.
उन्होंने कहा कि फुलवारी शरीफ़ से लोगों को गिरफ़्तार करने के बाद मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है.
उन्होंने आरोप लगाया, "तमाम गिरफ़्तारियां भाजपा के इशारे पर रचे गए षड्यंत्र का परिणाम है."
वहीं जब हमने '2047 विजन डॉक्यूमेंट' को लेकर पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप का सवाल उठाया तो उन्होंने कहा, "दरअसल वह कागज इमपावर इंडिया का विजन 2047 डॉक्यूमेंट है. इसका विमोचन डॉक्टर राजेंद्र सच्चर ने किया था. यह कागज उक्त संगठन की वेबसाइट पर भी मौजूद है और जिस डॉक्यूमेंट का विमोचन राजेंद्र सच्चर ने किया हो उस डॉक्यूमेंट में इस्लामिक राष्ट्र की बात कैसे होगी? यह तमाम बातें पटना प्रशासन की कल्पना हैं. कोर्ट में पुलिस के तमाम दावे औंधे मुंह गिरेंगे."
भाकपा (माले) ने किया गिरफ़्तारी का विरोध
बिहार पुलिस की ओर से पटना के फुलवारी शरीफ़ इलाके में की गई गिरफ़्तारियों का राजनीतिक विरोध भी हो रहा है.
फुलवारी शरीफ़ से भाकपा (माले) विधायक गोपाल रविदास ने पुलिस के तमाम आरोपों को ख़ारिज किया है. मोहम्मद जलालुद्दीन के अपना मकान पीएफ़आई को किराए पर देने को लेकर उन्होंने कहा कि पीएफ़आई प्रतिबंधित संगठन तो है नहीं.
वहीं उनकी पार्टी ने भाजपा पर हमला बोला है कि भाजपा 'फुलवारी शरीफ़ को लगातार क़ब्रगाह बनाने पर तुली है.'

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भारतीय जनता पार्टी ने क्या कहा?
एसडीपीआई और भाकपा (माले) की ओर से लगाए गए आरोप पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर विनोद शर्मा से बीबीसी ने बात की.
विनोद शर्मा ने कहा, "देखिए इस वक़्त प्रदेश में भाजपा और जदयू की संयुक्त सरकार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या सीएम नीतीश कुमार, दोनों ही लोग न्याय के साथ विकास के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं. कोई पक्षपात नहीं हो रहा. पुलिस को जो भी सबूत मिले हैं वो उन्हें दोषी ठहराने के लिए काफी हैं."
उन्होंने कहा, "अब पुलिस को जो साक्ष्य मिल रहे हैं उसमें भाजपा का क्या हाथ? क्या भाजपा के लोग फुलवारी शरीफ़ में उस घर पर गए? रही बात भाकपा (माले) की तो यह पार्टी राजद के कंधे पर सवार होकर ओछी राजनीति कर रही है. वोट बैंक की राजनीति के लिए एनडीए की सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ भी बोल रही है."
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