कर्नाटक में बजरंग दल कार्यकर्ता हत्या केस: बीजेपी सांसद का आरोप-‘ये आतंक का केरल मॉडल’

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कर्नाटक के शिमोगा में बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या को लेकर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कई संगठनों को कठघरे में खड़ा किया है और आरोप लगाया है कि 'ये आतंक का केरल मॉडल है, जिसे कर्नाटक और देश के दूसरे हिस्सों में निर्यात किया जा रहा है.'
सूर्या ने कहा है कि हर्षा कर्नाटक में 'बढ़ते कट्टरपंथ' का शिकार बने हैं.
बीजेपी सांसद के मुताबिक उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई और शिमोगा के एसपी से कहा है कि वो हर्षा की हत्या मामले को 'आंतकी कार्रवाई' की तरह देखें.
इसके पहले हर्षा के भाई प्रवीण ने आरोप लगाया कि 'हिंदुओं के लिए आवाज़ उठाने की वजह से उनकी हत्या कर दी गई.'
प्रवीण ने कहा,"मेरा भाई संगठन (बजरंग दल) का सक्रिय सदस्य था. वो सिर्फ़ हिंदुओं को बारे में सोचता था और इसी वजह से वो मार दिया गया."
शिमोगा में रविवार रात हर्षा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस के मुताबिक हमले के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.
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इस बीच, शिमोगा के पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी प्रसाद ने मंगलवार को बताया है कि हर्षा की हत्या के मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इस मामले में 12 लोगों से पूछताछ की जा रही है.
उन्होंने बताया है कि हर्षा के ख़िलाफ दो मामले दर्ज थे. " एक दंगे का मामला था और 2016-17 में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला था."
हिजाब और कर्नाटक सरकार के मंत्री केएस ईश्वरप्पा के झंडे पर दिए कथित बयान को लेकर जारी विवाद के बीच शिमोगा में बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या और उसकी प्रतिक्रिया में भड़की हिंसा भी पूरे देश में चर्चा का विषय है. उत्तर प्रदेश, जम्मू और राजस्थान तक में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
हालांकि, राज्य पुलिस के मुताबिक उनकी जांच में अभी तक हिजाब विवाद हत्या की वजह नहीं लग रहा है लेकिन जांच में सभी कोण तलाशे जा रहे हैं.
शिमोगा के डिप्टी कमिश्नर सेल्वमणि आर ने बताया है कि ज़िले में शुक्रवार सुबह तक धारा 144 लागू रहेगी. स्कूल-कॉलेज भी बंद रहेंगे.

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तेजस्वी सूर्या ने क्या कहा?
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि हर्षा कर्नाटक में 'बढ़ते कट्टरपंथ' का शिकार बने हैं.
उन्होंने कहा, "ये आतंक का केरल मॉडल है जिसे पीएफ़आई, एसडीपीआई, सीएफ़आई जैसे संगठन कर्नाटक और देश के दूसरे हिस्सों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं."
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सूर्या ने आगे कहा, "मैंने (कर्नाटक के) मुख्यमंत्री और शिमोगा के एसपी से अनुरोध किया है कि न सिर्फ़ आईपीसी की दफ़ा 302 के तहत केस दर्ज किया जाए बल्कि यूएपीए भी लगाया जाए और इसे आंतकी कार्रवाई माना जाए."
सांसद तेजस्वी सूर्या ने आगे कहा, "मैंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वो राज्य के ख़ुफिया विभाग के तहत एक एक्सक्लूसिव एजेंसी बनाएं और उसे ज़रूरी संसाधन मुहैया कराएं."
सूर्या ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने हर्षा के माता-पिता से मुलाक़ात की है. उनके साथ भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भी थे.
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बीजेपी और बजरंग दल के अलावा कई हिंदूवादी संगठन इस केस की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं. वहीं, प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखी ज़ुबानी जंग भी जारी है.
इस बीच, कर्नाटक सरकार में शिमोगा के प्रभारी मंत्री केसी नारायण गौडा ने बताया है कि ज़िले में शांति बनी हुई है.
उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, "स्थिति जल्दी ही सामान्य हो जाएगी. लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए."

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तनाव भरी शांति, तीन टीमें गठित
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारियो के हवाले से बताया है कि हत्या में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं.
फिलहाल शहर के हर हिस्से में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. ज़िला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र के मुताबिक हर्षा के परिवार ने उनसे मुलाक़ात के दौरान 'न्याय दिलाने' की मांग की है और सरकार इसी दिशा में कदम उठा रही है.
हर्षा के भाई प्रवीण ने कहा, "हम चाहते हैं कि दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए."
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मंगलवार की सुबह कर्नाटक पुलिस के डीआईजी डॉक्टर के त्यागराजन के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया, "हमें पुख्ता तौर पर यकीन है कि ये पुरानी दुश्मनी की वजह से हुआ है. क़ानून व्यवस्था की स्थिति काबू में है. इस मामले में जांच जारी है."

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हिजाब विवाद?
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी और हिंदूवादी संगठनों के कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना की वजह हिजाब विवाद है. शिमोगा में हिजाब विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बन गई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने आरोप लगाया है, "हर्षा शिक्षा संस्थानों में हिजाब का विरोध कर रहे थे. इसीलिए जिहादियों ने उनकी जान ले ली."
इसके पहले भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान से सांसद राज्यवर्धन राठौर ने भी आशंका जाहिर की कि हर्षा की हत्या के पीछे हिजाब विवाद हो सकता है.
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राठौर के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है, "इस देश के 'छद्म उदारवादियों' का ढोंग देखिए हर्षा (बजरंग दल कार्यकर्ता) नाम के एक व्यक्ति ने अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करते हुए समान नागरिक संहिता की मांग की. उनके ख़िलाफ़ एक फतवा हुआ और उनकी हत्या कर दी गई."
बीजेपी नेताओं के ये दावे राज्य पुलिस की जांच से मेल नहीं खाते हैं.
हर्षा हत्या मामले में गिरफ़्तार लोगों का जुड़ाव किस संगठन से है, इस बारे में पूछे जाने पर कर्नाटक पुलिस के एडीजीपी प्रताप रेड्डी ने बताया, "जांच जारी है. हम जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुंचेगे. उसी के बाद हम इस बारे में कोर्ट को बता सकेंगे."
रेड्डी ने ये भी बताया, "सभी अभियुक्तों की पहचान हो चुकी है. पुलिस अधिकारियों की टीमें शिमोगा जिले के अंदर और बाहर तलाश में जुटी हैं. हम अभियुक्तों की गिरफ़्तारी का काम पूरा करने के करीब हैं."
हालांकि, बीजेपी के ही कई नेता मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की मांग कर रहे हैं.
बीजेपी विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने हर्षा के परिजन को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया.
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उन्होंने हर्षा की हत्या के मामले में कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, "मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि मामले की जांच एनआईए से कराई जाए."
उन्होंने डीके शिवकुमार, बीके हरिप्रसाद और दूसरे कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए.
इसके पहले केंद्रीय राज्यमंत्री शोभा करांदलाजे भी मामले की जांच एनआईए से कराने की मांग कर चुकी हैं.

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कांग्रेस का आरोप, 'ईश्वरप्पा ने लोगों को भड़काया'
उधर, हर्षा की अंतिम यात्रा के दौरान सोमवार को हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस राज्य की बसावराज बोम्मई सरकार और मंत्री केएस ईश्वरप्पा को कठघरे में खड़ा कर रही है.
कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने शिमोगा में सोमवार को हुई हिंसा को लेकर कहा, "सरकार ने शिमोगा में धारा 144 लगाई. उन्होंने (ईश्वरप्पा ने) उल्लंघन किया. उन्होंने जुलूस (बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा के शव को उनके घर ले जाते समय) की अगुवाई की. उन्होंने ख़ुद (हालात को) भड़काया. उन पर तुरंत केस होना चाहिए."
ईश्वरप्पा शिमोगा से ही विधायक हैं. वो राज्य की बसावराज बोम्मई सरकार में मंत्री हैं. हर्षा की हत्या के बाद उन्होंने कहा था कि इसके पीछे 'मुसलमान गुंडों' का हाथ है.
हालांकि, कर्नाटक के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने ईश्वरप्पा का बचाव किया.
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उन्होंने कहा, "शिमोगा में शांति है. केएस ईश्वरप्पा ने शव ले जाने वाली भीड़ की अगुवाई नहीं की थी. स्थानीय विधायक होने के नाते वो वहां मौजूद थे. जिस किसी ने संपत्ति को नुक़सान पहुंचाया है, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी."
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया है कि हर्षा की अंतिम यात्रा के दौरान हुए पथराव, हिंसा और तोड़फोड़ में एक फ़ोटो पत्रकार और एक महिला पुलिसकर्मी समेत तीन लोग घायल हो गए. बाइकों समेत कई दोपहिया वाहनों को तोड़ा गया या फिर उनमें आग लगा दी गई.
इस मामले में एडीजीपी प्रताप रेड्डी ने बताया, "हमने 14 अलग-अलग घटनाओं को चिन्हित किया है, इनमें प्राथमिकी करानी होगी. इनमें से तीन को लेकर केस दर्ज हो चुके हैं. कुछ अन्य मामलों में हम पीड़ितों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिनकी संपत्ति या फिर बाइकों को नुक़सान पहुंचाया गया है. वो आगे आएं और केस दर्ज कराएं."

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ईश्वरप्पा के झंडे पर कथित बयान को लेकर विवाद
कांग्रेस नेता बीजेपी के मंत्री ईश्वरप्पा को झंडे को लेकर दिए गए कथित बयान को लेकर भी घेर रहे हैं. इस मामले को लेकर मंगलवार को विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ
इसके बाद कर्नाटक विधानसभा सत्र चार मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया. कांग्रेस के विधायक मंत्री केएस ईश्वरप्पा के केसरिया झंडे वाले बयान को लेकर विरोध जता रहे थे. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ईश्वरप्पा ने कथित तौर पर 'लाल किले पर केसरिया झंडा लगाने' की बात की थी.
कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, "ईश्वरप्पा के बयान पर कांग्रेस विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ईश्वरप्पा के बयान को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बता चुके हैं. ये बहुत ही ग़लत और ग़ैर ज़िम्मेदार बयान है."
वहीं, ईश्वरप्पा ने इस मामले को लेकर सफ़ाई दी.
केएस ईश्वरप्पा ने कहा, "जेपी नड्डा हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वो जो कहते हैं, उसे हमें सुनना ही है. ये हमारी ड्यूटी है. आपको पता है कि मैंने क्या कहा था. मैं उनका (नड्डा का) आदर करता हूं. लेकिन मैंने जो कहा, उसमें क्या ग़लत था और क्या ग़लत नहीं था, उस बारे में हमारे मुख्यमंत्री (बसावराज) बोम्मई (विधानसभा में) जवाब दे चुके हैं."
शिमोगा से विधायक ईश्वरप्पा विवादित बयानों के लेकर चर्चा में रहते हैं. शिमोगा में हिजाब विवाद के दौरान भी तनाव देखने को मिला था.

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