जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने के बाद की कहानी, पीड़ितों की जुबानी

बुलडोजर

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बीते शनिवार को हुई हनुमान जयंती शोभायात्रा के बाद से जहांगीरपुरी सुर्खियों में है.

यहां हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान दो समुदाय के लोगों के बीच हिंसा हुई थी.

हिंसा के तीन दिन बाद नगर निगम की टीम भारी सुरक्षा के बीच अतिक्रमण को हटाने के लिए पहुंची.

नगर निगम का जब बुलडोजर चला तो उसमें कई ऐसे घर भी चपेट में आए जिन्होंने सड़क पर अतिक्रमण कर रखा था.

घरों से ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ी जो सड़क पर रेहड़ी पटरी और छोटी छोटी पान सिगरेट की दुकान चलाते थे.

इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं.

बीबीसी ने जहांगीरपुरी में रह रहे कुछ ऐसे परिवारों से बात की जिनकी रोज़ी-रोटी के ज़रिये को प्रशासन के बुलडोज़र ने बर्बाद कर दिया है.

जहांगीरपुरी

रहीमा जहांगीरपुरी के ब्लॉक सी में रहती हैं. ब्लॉक सी में मस्जिद के पास सड़क पर रहीमा एक छोटी सी दुकान चलाती थीं.

रहीमा ने अपनी आंखों के सामने जब अपनी दुकान को टूटते देखा तो आंसू रोक नहीं पाईं.

दुकान टूटने के बाद बिखरा हुआ सामान समेटते हुए रहीमा की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. रहीमा ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "मैं रो-रोकर उन्हें मना कर रही थी. मैं बोल रही थी कि मेरा सामान जो टूटा है मुझे समेटने दो. आपने तोड़ दिया लेकिन मुझे सामान लेने दो. सामान भी नहीं लेने दिया. मैंने बैंक से 2 लाख रुपये लोन लेकर दुकान की थी. मेरा 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. दुकान में तीन फ्रीज थे और 70 हजार का सामान था."

गणेश कुमार गुप्ता

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गणेश कुमार गुप्ता का परिवार साल 1978 से जहांगीरपुरी में रह रहा है. गणेश जी ब्लॉक में जूस की एक दुकान चलाते हैं.

उनकी दुकान पर भी बुलडोजर की कार्रवाई हुई.

गणेश कुमार का कहना है, "दुकान सरकार ने दिया था. हमारे पास दुकान के सारे कागज मौजूद थे. कागज दिखाने के बाद भी किसी ने भी मेरी बात नहीं सुनी और मेरी दुकान तोड़ दी. मैं दुकान का सालाना 4,836 रुपये सरकारी टैक्स भरता हूं."

"वो लोग एक तरफा कार्रवाई कर रहे थे तो हमारे तरफ भी बुलडोजर को घुमा दिया. मेरी दुकान पर इसलिए बुलडोजर चला ताकि वे कह सकें कि देखो हिंदू की दुकान भी तोड़ी है. सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद भी तोड़फोड़ बंद नहीं की गई."

रॉकिया

तस्वीर में रॉकिया के पीछे टूटा हुआ एक बोर्ड दिखाई दे रहा है जिस पर लिखा है बिस्मिल्लाह सीक कबाब.

ये वो रेहड़ी थी जिसे रॉकिया जहांगीरपुरी में पिछले दस साल से लगा रही थी.

रॉकिया बताती हैं, "जब बुलडोजर वाले आए तो मैंने पुलिसवालों का कहा कि इस रेड्डी को मुझे अंदर लेकर जाने दो लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी. बुलडोजर के पास लोगों ने कहा कि इसे भी तोड़ो. उन्होंने खुंदस में इसे तोड़ा."

"मैंने बैंक से 80 हजार रुपये का लोन लेकर इसे बनवाया था. लोन भी अभी तक भरा नहीं है. रेहड़ी पर उस समय चालीस हजार लगा था, मैं किराये के घर पर रहती हूं. अब रेहड़ी टूट जाने के बाद मैं अपने बच्चों का पेट कैसे पालूंगी."

नरेंद्र

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जहांगीरपुरी में मस्जिद से करीब पचास कदम की दूरी पर नरेंद्र का परिवार रहता है. नरेंद्र के परिवार के पास 25-25 गज के दो मकान हैं.

एक मकान का रास्ता मस्जिद वाली सड़क पर खुलता है और दूसरा रास्ता पीछे गली नंबर 1 में.

बुलडोजर जब चला तो उसमें नरेंद्र के घर का सामने वाला कुछ हिस्सा टूट गया.

नरेंद्र का कहना है, "बिना नोटिस के उन्होंने तोड़फोड़ शुरू कर दी. अब एक तरफ से घर में आने का रास्ता भी बंद हो गया है. आठ साल पहले इस मकान को खरीदा था."

"पूरी जिंदगी की मेहनत मिट्टी हो जाए तो बहुत दुख होता है. अगर ऐसा ही माहौल रहा तो घर बेच दूंगा. पास में आबिद की दुकान है. माहौल कभी खराब नहीं रहा."

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साहिबा

साहिबा जहांगीरपुरी के ब्लॉक-सी की गली नंबर 2 में रहती हैं.

जहांगीरपुरी में हुई कार्रवाई से नाराज साहिबा कहती हैं कि सांप्रदायिक हिंसा के बाद बुलडोजर चलाया गया है.

साहिबा का एक बेटा सड़क पर रेहड़ी लगाकर कबाड़ी का काम करता था.

साहिबा कहती हैं, "करीब सात हजार रुपये की रेहड़ी थी. हम कह रहे थे कि हमें अंदर लाने दो लेकिन हमें भगा दिया. जब बुलडोजर चल रहा था तो हमने बोला कि हमें सामान तो बचाने दो, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी. पहले एमसीडी की कार्रवाई होती थी तो हमें समय दिया जाता था."

आंबिया बीबी

आंबिया बीबी का घर भी सी-ब्लॉक में है. परिवार में 9 लोग हैं. एक बेटा कचरा चुनने का काम करता है.

पति की तबीयत ऐसी नहीं कि वो काम करके घर चला पाए.

आंबिया कहती हैं, "हम बांग्लादेश के रहने वाले नहीं हैं. हम पश्चिम बंगाल के हैं. 20 हजार लोन लेकर मैंने छोटी सी दुकान लगाई थी. मैं पिछले चालीस साल से ये दुकान यहां चला रही थी. बिना नोटिस दिए हमारी दुकान तोड़ दी. अब मैं कैसे अपना घर चलाऊंगी. क्या पता कल वो हमारा घर तोड़ दें. मुझे डर है."

स्थानीय निवासी

तस्वीर में दिखाई दे रहे व्यक्ति बुलडोजर चलने के बाद से घर में एक तरह से कैद हैं.

वजह है घर से नीचे उतरना का जो रास्ता था उसे बुलडोजर ने तोड़ दिया. घर के सामने पुलिस लगी है. पुलिस ने परिवार से मिलने पर भी रोक लगा रखी है.

बीबीसी से बातचीत में इन्होंने कहा, "पंछी की तरह पिंजरे में बंद कर दिया है. हम लोग घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं. नीचे उतरने का रास्ता तोड़ दिया है. हमारे घर में दो बच्चे हैं. पत्नी है. प्रशासन घर से बाहर नहीं निकलने दे रहा. घर में खाना नहीं है. नीचे निकलते हैं तो गालियां दी जाती हैं."

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