यूपी में लाउडस्पीकर और धार्मिक जुलूसों पर क्या बोले सीएम योगी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि नए धार्मिक स्थलों पर माइक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मस्जिदों के लाउडस्पीकर को लेकर चेतावनी दी थी जिसके बाद इस मुद्दे पर बहस हो रही थी.
महाराष्ट्र से शुरू हुई बहस के बाद अब सीएम योगी ने लाउडस्पीकर को लेकर घोषणा की है.
यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट करके बताया है, "सभी को अपनी उपासना पद्धति को मानने की स्वतंत्रता है. माइक का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित हो कि माइक की आवाज़ उस परिसर से बाहर न आए. अन्य लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए. नए स्थलों पर माइक लगाने की अनुमति न दें."
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इसी के साथ सीएम योगी ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां 4 मई तक रद्द कर दी है और जो लोग छुट्टी पर हैं उन्हें 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है.
छुट्टियां क्यों की गईं रद्द
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारियों से लेकर एडीजी स्तर के अधिकारियों तक को निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के अंदर सभी धार्मिक नेताओं और प्रमुख हस्तियों से आगामी त्योहारों के दौरान शांति बहाली के लिए बातचीत करें.
आदित्यनाथ ने कहा, "सभी प्रशासनिक और पुलिस कर्मियों की छुट्टियां 4 मई तक तुरंत प्रभाव से रद्द की जा रही हैं. जो भी अभी छुट्टी पर हैं वो तुरंत अगले 24 घंटों के अंदर अपनी पोस्टिंग वाली जगह पर पहुंचें. यह व्यवस्था मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सुनिश्चित की जाए."
मुख्यमंत्री ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क़ानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा, "अतिरिक्त पुलिस बल संवेदनशील इलाक़ों मे तैनात किए जाने चाहिए और परिस्थितियों की निगरानी के लिए ड्रोन इस्तेमाल होने चाहिए. हर शाम को पुलिस बल पेट्रोलिंग करें और पुलिस रिस्पॉन्स वाहन सक्रिय रहें."

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उन्होंने बताया, "आने वाले दिनों में बहुत सारे महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार हैं. रमज़ान का महीना चल रहा है. ईद का त्योहार और अक्षय तृतीया एक ही दिन हो सकते हैं. इन परिस्थितियों में वर्तमान माहौल पर ग़ौर किया जाए और पुलिस को अधिक सतर्क रहना होगा."
बिना अनुमति नहीं निकलेगा धार्मिक जुलूस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान कहा, "बिना अनुमति के कोई भी धार्मिक जुलूस नहीं निकाला जाना चाहिए. अनुमति देने के बाद शांति और सौहार्द बरक़रार रखने के लिए एक शपथ पत्र आयोजक को देना चाहिए. अनुमति सिर्फ़ उन्हीं धार्मिक जुलूसों को दी जानी चाहिए जो पारंपरिक रहे हैं. नए कार्यक्रमों को बिना वजह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए."
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हर एक व्यक्ति की सुरक्षा सरकार और लोगों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है.
"हमारी ज़िम्मेदारी को लेकर हम सभी को बेहद सतर्क और सावधान रहना चाहिए."
इसके साथ ही उन्होंने उपद्रवी बयानबाज़ी करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की.

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"जो वातावरण को दूषित करना चाहते हैं उनके साथ सख़्ती से निपटा जाना चाहिए. इस तरह के लोगों की सभ्य समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए."
उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम और आराधना केवल निर्धारित स्थान पर ही किए जाने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी धार्मिक कार्यक्रम बिना ट्रैफ़िक में बाधा पैदा किए हो.
सीएम योगी की घोषणा पर क्या बोले लोग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद बीबीसी हिंदी ने इस फ़ैसले पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय जाननी चाहिए जिसके बाद कई लोगों ने इस फ़ैसले की तारीफ़ की है तो कइयों ने आलोचना की है.
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इक़बाल अंसारी नामक एक यूज़र ने लिखा, "माइक की आवाज़ अगर मस्जिद तक ही रहेगी तो अवाम को कैसे पता चलेगा नमाज़ का वक़्त हो गया. अब रमज़ान का महीना है, मस्जिदों में भीड़ होती है और थोड़ी भीड़ मस्जिद से बाहर भी जा सकती है. अपने ही देश में इतनी पाबंदियां मुनासिब नहीं समझता."
नईम अहमद लिखते हैं, "स्वागत योग्य क़दम बल्कि सभी धर्मों के जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए, अगर धार्मिक कर्मकांड सड़कों पर ही करने हैं तो फिर मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे क्यों बनाए."
मनोज चौहान गुर्जर लिखते हैं, "हम उनके आदेश से सहमत हैं लेकिन मुझे तो आज भी मस्जिद से 500 मीटर की दूरी पर मेरे घर में अज़ान की तेज़ आवाज़ सुनाई दे रही है."
नेहा नामक यूज़र लिखती हैं, "अच्छा फ़ैसला है. ना सड़कों पर धर्मो का महिमामंडन होगा, ना भीड़ सड़क रोकेगी, न किसी को परेशानी होगी, न कोई फ़साद होगा. अब देखना ये होगा कि क्या किसी विशेष धर्म पर ये पाबंदी है या सब धर्म समान हैं."
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