जहांगीरपुरी हिंसा: हनुमान जयंती पर निकले जुलूस के दौरान क्यों भड़की हिंसा- प्रेस रिव्यू

जहांगीरपुरी

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उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में शनिवार को दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई. हिंसा हनुमान जयंती जुलूस के दौरान भड़की, जिसमें कई लोग घायल हो गए.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार, इस हिंसा में छह पुलिसवाले जख़्मी हुए हैं और साथ ही एक स्थानीय नागरिक को चोटें आयी हैं. यह घटना तब हुई जब हनुमान जयंती के मौक़े पर क़रीब 300-400 लोगों का एक जुलूस निकाला जा रहा था.

जिस समय यह जुलूस जहांगीरपुरी इलाक़े के सी-ब्लॉक से गुज़र रहा था, उसी दौरान हाथापाई से शुरू हुई झड़प, हिंसा और पथराव में बदल गयी.

अख़बार ने पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों के हवाले से यह ख़बर दी है.

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अख़बार ने अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि जहांगीरपुरी हिंसा में एक सब-इंसपेक्टर को गोली भी लगी है. फिलहाल दिल्ली के ही एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

अख़बार लिखता है कि हाथापाई शुरू किस वजह से शुरू हुई, इसका कारण अभी तक बहुत स्पष्ट नहीं हो सका है.

इस हिंसा के दौरान गुस्साई भीड़ ने कई वाहनों में आग भी लगा दी और आसपास की कुछ दुकानों को भी नुक़सान हुआ है. अख़बार ने जब चश्मदीदों से बात की और हिंसा की वजह जानने की कोशिश की तो उनके जवाब बंटे हुए थे. कुछ ने बताया कि जुलूस पर अकारण ही हमला हुआ, जिसके बाद पथराव की स्थिति पैदा हो गयी और हिंसा भड़क गयी. लेकिन कुछ लोगों ने ये बताया कि भड़काऊ नारेबाज़ी के बीच कुछ लोगों ने मस्जिद पर झंडा फहराने की कोशिश की जिससे देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गयी.

पुलिस अधिकारियों ने हिंसा के भड़कने और फिर गंभीर होने तक की स्थिति की क्रमवार पुष्टि अभी तक नहीं की है. पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच हो रही है और जांच के बाद ही आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा. उग्र भीड़ पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और इलाक़े में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गयी है. घटना का असर ये हुआ कि देर रात दिल्ली के कई दूसरे इलाक़ों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया.

उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई.

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दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और घटनास्थल पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती कर दी गई है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में रहने और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं.

उन्होंने लोगों से अफ़वाहों और फ़ेक न्यूज़ पर ध्यान नहीं देने की अपील की है.

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दूसरी तरफ गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है और उन्हें ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

दिल्ली में साल 2020 में भड़के सांप्रदायिक दंगों के बाद इस तरह की यह पहली बड़ी हिंसक घटना है. इससे पहले बीते सप्ताह रामनवमी के दिन गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जुलूस निकाले जाने के दौरान झड़पें हुई थीं.

गोरखनाथ मंदिर

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गोरखनाथ मंदिर में हमले के आरोपी पर यूएपीए

गोरखनाथ मंदिर पर हमले के आरोपी, अहमद मुर्तज़ा अब्बासी पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है. शनिवार को मुख्य आरोपी को एसीजेएम की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

एटीएस के सूत्रों के हवाले से जनसत्ता अख़बार ने यह ख़बर दी है. अख़बार के अनुसार अधिवक्ता पीके दुबे ने बताया कि इस मामले को एटीएस की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिस के जवानों पर रविवार तीन अप्रैल की शाम को एक शख़्स ने धारदार हथियार से हमला किया था और नारेबाज़ी की थी.

योगी आदित्यनाथ

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गोरखनाथ मंदिर के महंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं.

तीन अप्रैल को हुई घटना शाम के सात-साढ़े सात बजे की है जब मंदिर परिसर के गेट नंबर एक पर एक हमलावर ने दो जवानों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था. इसके बाद हमलावर गोरखनाथ मंदिर के परिसर में घुस गया जहां पुलिसवाल ने उसे हिरासत में ले लिया था.

इस घटना के बाद राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने कहा था कि इस घटना को एक आतंकी घटना कहा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने कहा था, "बरामदगी को देखकर लगता है कि ये बड़ी साजिश की तैयारी थी और हम लोग इस चीज़ से इनकार नहीं कर सकते कि आज की तारीख में ये आतंकी घटना नहीं थी."

प्रशांत कुमार ने दावा किया था कि जो दस्तावेज़ बरामद हुए हैं, वो बड़े सनसनीखेज़ हैं.

हेल्पलाइन

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चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को नेशनल हेल्पलाइन 112 के साथ किया जा सकता है समाहित

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, इस नए प्रस्ताव को लेकर नागरिक कल्याण के कई संस्थानों ने अपनी चिंता ज़ाहिर की है.

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पूरी तरह बच्चों के लिए समर्पित देश की एकमात्र हेल्पलाइन और बाल अधिकारों के लिए काम करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस पर बहुत अधिक निर्भरता भी है लेकिन अब इस हेल्पलाइन के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

ख़ासतौर पर बच्चों के लिए समर्पित इस हेल्पलाइन का नेशनल इमरजेंसी हेल्पलाइन के साथ विलय करने की योजना बना रही है.

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक सातों दिन 24 घंटे सेवा देने वाला आपात नंबर है . यह फ़ोन पूरी तरह से मुफ़्त है.

स्मृति ईरानी

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भारत की ये हेल्पलाइन बच्चों के लिए समर्पित दुनिया की सबसे बड़ी हेल्पलाइन में से एक है.

आंकड़ों के मुताबिक़, सलाना तौर पर इस नंबर पर प्रति वर्ष 50 लाख कॉल किए जाते हैं. हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव पर सिविल सोसायटी के कई जानकारों और वरिष्ठ लोगों ने सवाल उठाए हैं.

सरकार ने हाल ही में बाल संरक्षण के तहत मिशन वात्सल्य योजना के लिए जारी अपने मसौदे में कहा है कि चाइल्ड हेल्पलाइन को गृहमंत्रालय की नेशनल इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 में ही मिला दिया जाएगा.

पिछले साल, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का ​​प्रशासनिक नियंत्रण उनके मंत्रालय से गृह मंत्रालय को स्थानांतरित कर दिया जाएगा, ताकि सामाजिक कार्यकर्ताओं के बजाय पुलिसकर्मी कॉल्स का जवाब दें.

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