यूपी में सरेंडर कराने के लिए जब अभियुक्तों के दरवाज़ों पर लाए गए बुलडोज़र - प्रेस रिव्यू

योगी

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में बुलडोज़र के इस्तेमाल पर एक रिपोर्ट छापी है.

अख़बार लिखता है कि बीती 18 फरवरी को यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मैनपुरी में एक भाषण के दौरान कहा था कि ''मैंने बुलडोज़र को मरम्मत के लिए भेजा है, 10 मार्च से जब वो दोबोरा काम पर वापस आएगा तो सबकी गर्मी शांत कर दी जाएगी.''

10 मार्च को चुनाव नतीजे आए और सत्ता में बीजेपी की वापसी हुई और इसके साथ ही वापसी हुई बुलडोज़रों की भी.

योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में पुलिस का अक्रामक रवैया, गैंगेस्टरों के नाम वाली प्रॉपर्टियों को टारगेट करके बुलडोज़र के इस्तेमाल के कारण विपक्षियों ने आदित्यनाथ को 'बुलडोज़र बाबा' का नाम दिया.

अब योगी आदित्यनाथ को अपने दूसरे कार्यकाल की शपथ लिए हुए मुश्किल से सप्ताह भर का समय हुआ है और ऐसी दो घटनाएं सामने आईं हैं जिसमें यूपी सरकार ने लोगों के घर बुलडोज़र भेजा है. ये दोनों ही रेप के मामले हैं, लेकिन इस बार बुलडोज़र भेजने की वजह है कथित रूप से अभियुक्तों पर दबाव बनाना ताकि वो सरेंडर करें.

द इंडियन एक्सप्रेस ने इस ख़बर को प्रमुखता से पहले पन्ने पर जगह दी है.

पुलिस ने बुलडोज़र से घर की सीढ़ियां तोड़ीं

गुरुवार दोपहर को सहारनपुर ज़िले में पुलिस दो भाइयों आमिर और आसिफ़ के घर बुलडोज़र ले गई.

इन दोनों पर शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने का आरोप है. 25 मार्च को लड़की की मां ने दोनों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई.

दोनों भाईयों के पिता 56 वर्षीय शराफ़त पर शिकायतकर्ता को डराने-धमकाने का आरोप है.

यूपी पुलिस

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अभियुक्त का परिवार गांव के प्रधान के परिवार से ताल्लुक़ रखता है. पुलिस ने परिवार को डराने के लिए उनके घर के बाहर बुलडोज़र खड़ा कर दिया और कथित तौर पर धमकाया कि अगर उन्होंने 48 घंटे के भीतर सरेंडर नहीं किया तो इमारत पर बुलडोज़र चला दिया जाएगा.

इस घटना का एक वीडियो भी है जिसमें बुलडोज़र से घर की तीन सीढ़ियां तोड़ी जा रही हैं, और पुलिस की निगरानी में ये हो रहा है. पुलिस परिवार की मदद करने वालों को भी चेतावनी दे रही है.

स्थानीय थाने के एसएचओ ने अख़बार से कहा, ''हम समाजिक तौर पर प्रभावशाली परिवार से आने वाले इन अभियुक्तों को बताना चाहते हैं कि अगर वे ऐसे ही फ़रार रहे तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. हमने घर की सीढ़ी तोड़ी और हमारी कार्रवाई का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है. जब हम वहां से निकल रहे थे तो हमने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि यदि कोई अभियुक्तों की किसी भी तरह से मदद करता हुआ पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी. ''

हालाँकि, आमिर और आसिफ़ के पिता ने इन आरोप को "झूठा" बताया है.

उन्होंने कहा, "हम बेहद दबाव में हैं. झूठे आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है और कोई भी हमारी मदद करने को तैयार नहीं है. पुलिस दबाव बना रही है और धमकी दे रही है कि अगर हम सरेंडर नहीं करते हैं तो हमारे घर तोड़ देंगे.''

प्रशासन की ओर से सीढ़ियां तोड़ने की घटना पर उन्होंने कहा, ''उन्होंने तीन सीढ़ी तोड़ दी, जो हमारे ड्राइंग रूम की ओर जाती है. पुलिस की कार्रवाई से मेरा परिवार और पड़ोसी दहशत में हैं. हम रेप के मामले में कानूनी की मदद लेने की कोशिश कर रहे हैं. ''

शुक्रवार को दोनों भाइयों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

रमन्ना

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सीबीआई के सामने साख़ का सवाल- सीजेआई

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा है कि गुज़रते वक़्त के साथ कई सम्मानित संस्थानों की तरह सीबीआई पर भी ख़ुद को लोगों के बीच साबित करने और अपनी साख बचाने की चुनौती है. कुछ मामलों में सीबीआई के कामों और निष्क्रियता ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं.

सीबीआई की ओर से आयोजित 19वें डी.पी. कोहली स्मृति व्याख्यान में रमन्ना ने कहा कि एक स्वतंत्र संस्थान के निर्माण की तत्काल आवश्यकता है, जिसके तहत सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय जैसी विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को एक छत के नीचे लाया जा सके.

सीजेआई ने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसी को किसी भी सत्तावादी प्रवृत्ति को पनपने नहीं देना चाहिए. पुलिस और जांच एजेंसियों के पास वास्तविक वैधता हो सकती है, लेकिन फिर भी, एक संस्थान के रूप में, उन्हें अभी भी सामाजिक वैधता हासिल करना बाकी है.

पेपर लीक

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यूपी बोर्ड पेपर लीक मामले में तीन पत्रकार गिरफ़्तार

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ बलिया में यूपी बोर्ड के बारहवीं कक्षा के अंग्रेज़ी के पेपर लीक होने के मामले में कुल 34 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं जिनमें तीन पत्रकार शामिल हैं. पत्रकारों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.

पुलिस का कहना है कि पेपर लीक में पत्रकारों को "उनकी भूमिका के आधार पर" गिरफ़्तार किया गया है, जबकि तीन में से दो पत्रकारों ने कहा है कि उन्हें "पेपर लीक पर रिपोर्टिंग करने के कारण फंसाया जा रहा है."

बलिया के तीन पत्रकार- अमर उजाला अख़बार के अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय सहारा अख़बार के मनोज गुप्ता हैं जिन्हें इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है.

सीतारमण

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भारत रूस से तेल ख़रीदना जारी रखेगा -सीतारमण

अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने पहले से ही एक सस्ते प्रस्ताव पर रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''खैर, हमने खरीदारी शुरू कर दी है. हमें रूस से काफी बैरल मिले हैं, तीन-चार दिनों की आपूर्ति हो जाएगी, और यह जारी रहेगा.''

उन्होंने कहा कि भारत के हित और ऊर्जा संबंधी चिंताओं को सबसे ऊपर रखा जाएगा. मैंने और विदेश मंत्री एस. जयशंकर दोनों ने ही इस मामले पर देश की स्थिति को साफ़ कर दिया है.

वित्त मंत्री ने कहा, ''मैं अपने देश के राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सबसे पहले रखूंगी. अगर रियायत पर ईंधन उपलब्ध है, तो मुझे इसे क्यों नहीं खरीदना चाहिए? मुझे अपने लोगों के लिए इसकी ज़रूरत है इसलिए हमने खरीदना शुरू कर दिया है.''

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