UPTET जैसी परीक्षाओं का पर्चा लीक कैसे होता है, और कैसे कराई जाती है नक़ल

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश TET की परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद लाखों अभ्यार्थी निराश हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के शासनकाल में ही इस परीक्षा को फिर से करवा कर शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हो जायेगा.
एसटीएफ़ के ऑपरेशन में अब तक 36 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है, जिसमें पर्चा छापने वाली दिल्ली की कंपनी के मालिक के साथ पेपर लीक करने वाले गिरोह के लोग, सॉल्वर यानी कि पैसे लेकर परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह बैठने वाले कई लोग शामिल हैं.
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यूपी एसटीएफ़ ने प्रश्न पत्र छापने वाली कम्पनी के डायरेक्टर राय अनूप प्रसाद की संलिप्तता पाये जाने के आरोप के बाद उन्हें दिल्ली से गिरफ़्तार किया है.
TET की परीक्षा करवाने वाली संस्था के परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय को भी निलंबत कर दिया गया है और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार भी कर चुकी है.
कैसे जाँच का दायरा बढ़ा रही है उत्तर प्रदेश एसटीएफ़?
उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में 21 लाख से ज़्यादा अभ्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी TET की परीक्षा प्रदेश में एक बड़ा मुद्दा बन गई है. सरकार और जाँच एजेंसियों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए ख़ासा दबाव है.
सॉल्वर गैंग के भंडाफोड़ के बारे में प्रदेश एसटीएफ़ के एसएसपी हेमराज मीना का कहना है, "हम लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जो पेपर लीक हुआ है उसका सोर्स क्या था. प्रयागराज से क़रीब 14 लोग इसमें अरेस्ट हुए हैं, उसमें तीन गैंग थे. एक गिरोह सॉल्वर उपलब्ध कराता था, और एक गिरोह सॉल्वर को लाने ले जाने का काम करता था."
"सॉल्वर ढूंढने का काम एक तरीक़े से आउटसोर्स कर रखा था उन लोगों ने. एक आदमी 10 सॉल्वर लेकर आया और उनको लाकर किसी और कैंडिडेट की जगह परीक्षा दिलाने का प्लान था. अक्सर परीक्षाओं में इस तरह का फ्रॉड होता रहा है. और इसमें कोई ज़रूरी नहीं है कि उसका बिहार से कनेक्शन हो. उन्हें जहाँ से सॉल्वर मिल जाता है वो गिरोह उनका इस्तेमाल करते हैं."
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ ने बागपत, प्रयागराज, लखनऊ, मेरठ, शामली, कौशांबी और अयोध्या से गिरफ्तारियां की हैं.
तो क्या पूरे प्रदेश में पेपर लीक करवाने वाले गिरोह का जाल फैला हुआ था और एसटीएफ इस ऑपरेशन में कब से सक्रिय थी? इस सवाल के जवाब में एसएसपी हेमराज मीना का कहना है, "उत्तर प्रदेश में जो भी परीक्षाएं होती हैं, उनके बारे में एसटीएफ़ को आदेश मिलते हैं कि परीक्षा में कोई भी फ़र्ज़ीवाड़ा ना हो. इसकी सूचना हमें परीक्षा का आयोजन करने वाली तमाम एजेंसीज़ से मिलती है. हम लोग पहले से ही अलर्ट रहते हैं. हमारी फ़ील्ड यूनिट्स से भी हमें लगातार जानकारी मिलती है. सूचना मिलने पर हम लोग ऑपरेशन और अरेस्टिंग करते हैं."
अधिकारियों की कथित मिलीभगत के बारे में हेमराज मीना का कहना था, "TET वाली परीक्षा पारम्परिक तरीक़ों से होने वाली परीक्षा है और कंप्यूटर बेस्ड नहीं होती है. हार्ड कॉपी में प्रिंटेड फ़ॉर्मेट में पेपर मिलता है और उस तरीक़े से यह परीक्षा होती है. पहले पेपर एक सिक्योरिटी एजेंसी को दिया जाता है, वो पेपर प्रिंट करती है और उसे प्रॉपर चेन ऑफ़ कस्टडी से ज़िला मुख्यालय की ट्रेज़री में भेजती है. परीक्षा के दिन सुबह ट्रेज़री से पेपर परीक्षा सेंटर पहुँचते हैं. TET की परीक्षा में दोनों पालियों के पेपर सुबह व्हाट्ऐप पर लोगों को मिले हैं. तो अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पेपर ट्रेज़री से निकलने के पहले ही आउट हो गए थे. हम लोग परीक्षा कराने वाले संस्थान से लेकर, जहाँ पेपर प्रिंट हुआ है, और ट्रांसपोर्टेशन में इस्तेमाल की गयी एजेंसी से जुड़ी पूरी जाँच कर रहे हैं, और इसके आधार पर जो भी इसमें शामिल पाया जाएंगा उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."

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उत्तर प्रदेश सरकार ने अभ्यर्थियों से वादा किया है कि वो एक महीने बाद फिर TET की परीक्षा करवाएगी. एसटीएफ़ के एसएसपी का कहना है कि आगे होने वाली परीक्षा में, "परीक्षा पर्चे की चेन ऑफ़ कस्टडी न ब्रेक हो इसकी पूरी कोशिश की जाएगी और जो एजेंसीज़ इसमें काम करती हैं वो इस चीज़ का ख्याल रखें और दूसरी ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए भी एसटीएफ़ अपना इनपुट देती रहती है."
लेकिन सवाल उठता है कि पेपर के लीक होने और सॉल्वर गैंग के प्रदेश भर में फैले छोटे-छोटे गिरोह आख़िरकार कैसे इतने बड़े इम्तेहान का पर्चा लीक कराते हैं, और कितना बड़ा है इनका नक़ल कराने वाला रैकेट? यह जानने के लिए हमने इस ऑपरेशन से जुड़े उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ के अधिकारियों से बात की. उन्होंने बताया कि कई गिरोह सरकारी इम्तेहानों में नक़ल कराने के मौक़ों की तलाश में रहते हैं और परीक्षा की सुरक्षा में सेंध लगाने की लगातार कोशिशें करते रहते हैं.
पर्चे की चेन ऑफ़ सिक्योरिटी से हुआ समझौता, लीक हुआ पेपर
उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ के सूत्रों के मुताबिक़, 'TET की परीक्षा का पेपर सुबह से ही वाहट्सऐप पर लीक हो गया था. इसका मतलब है कि परीक्षा करवाने वाली संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकरण, पेपर प्रिंट करने वाली एजेंसी, पेपर डिलीवरी करने वाली एजेंसी की सुरक्षा व गोपनीयता की चेन टूटने से प्रश्नपत्र लीक हुआ है.'
पुलिस के मुताबिक़ तमाम गिरफ़्तारियों के बावजूद अभी तक लीक के सोर्स का पता नहीं चल पाया है. ज़ाहिर सी बात है कि सिक्योरिटी का प्रोटोकॉल सही तरीक़े से फ़ॉलो नहीं हुआ और जिस एजेंसी ने पर्चे की छपाई की वो इस काम को गोपनीय ढंग से कराने के लिए सक्षण नहीं थी.
सूत्रों के मुताबिक़, 'जहाँ छपाई हुई वहां पूरी तरह से सिक्योर्ड प्रेस की सुविधाएँ नहीं थीं. इम्तिहान में प्रश्नपत्रों की एक चेन ऑफ़ सिक्योरिटी होती है. कहीं न कहीं उसमें चूक हुई और पेपर आउट हो गया. शायद इसीलिए अब इस मामले में एसटीएफ़ तेज़ी से परीक्षा नियामक प्राधिकरण के अधिकारीयों को जाँच के घेरे में ले रही है.'

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कैसे कराया गया होगा पेपर लीक?
TET का पर्चा, परीक्षा शुरू होने के पहले ही सर्क्युलेशन में आ गया था. एसटीएफ़ सूत्रों के मुताबिक़, 'मसलन अगर कोई पेपर लीक करने की तैयारी कर रहा है और उसे पेपर को बंटवा के पैसे कमाने हैं तो उस शख्स की पूरी कोशिश रहेगी कि पेपर बेचने से अच्छी कमाई हो और उसका पेपर कहीं मुफ़्त में न बंट पाए. पूरी कोशिश की जाती है कि पर्चे की कॉपी सिर्फ़ उन्हीं लोगों तक पहुँचे जिन्होंने उसकी मुँहमाँगी रक़म अदा की है.'
पेपर लीक होने का कारण और सोशल मीडिया पर आसानी से मिलने की यह वजह हो सकती है कि किसी अभ्यार्थी ने पेपर पा लिया और शायद उसने अपने क़रीबी दोस्तों को भी पेपर मुफ़्त में बांट दिया.
सूत्र बताते हैं कि 'मुफ़्त में जब पर्चा बंटना शुरू हुआ होगा तो वो व्हाट्सऐप पर आसानी से फैल गया. यानी जो चीज़ पहले काफ़ी पैसे देकर ख़रीदी गयी, फिर वही पेपर यारी-दोस्ती में व्हाट्सऐप के ज़रिये वायरल हो गया. व्हाट्सऐप पर पेपर लीक करने वाले लोगों की कड़ी जोड़ कर सिस्टम से पेपर लीक करवाने वालों को जोड़ना फिर आसान हो जाता है. और इसी तरीक़े से लोगों की धरपकड़ शुरू हुई और एसटीएफ़ ने अब तक 30 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार किए हैं.'
एसटीएफ़ सूत्रों के मुताबिक़, 'पेपर लीक करने वाले गिरोह काफ़ी दिन से सक्रिय होते हैं. परीक्षा होने के पहले यह गिरोह कई जगह से और कई तरीक़ों से पर्चा हासिल करने की कोशिशें करते रहते हैं.'
"TET की परीक्षा के 2500 से अधिक सेंटर्स थे. जब 21 लाख अभ्यार्थियों वाली परीक्षा का पर्चा निकलवाना होता है तो वो तमाम सेंटर्स पर कोशिश करते हैं. इन गैंग्स को सिर्फ़ एक आदमी की तलाश होती है जिसे वो एक कमज़ोर कड़ी की तरह इस्तेमाल कर सुरक्षा कड़ी तोड़ सकते हैं. सुरक्षा कड़ी तोड़ने के साथ-साथ वो प्रदेश भर में अपना नेटवर्क बिठाना भी शुरू करते हैं. वो इसलिए कि जब पेपर मिलेगा तो उसे मुँहमाँगे दामों पर ख़रीदने वाले लोग भी होने चाहिए."
"ये पूरा ऑपरेशन डिमांड बेस्ड होता है. जब पर्चा मिल जाता है तो उसकी पहली ख़रीद सबसे महंगी होती है क्योंकि पेपर आउट करवाने वाला जोखिम उठा रहा होता है. कई लोग पहले से ही पेपर लीक होने के इंतज़ार में रहते हैं और पैसा तैयार रखते हैं. और जैसे ही पेपर आया तो रियल टाइम डील की जाती है और पेपर बेच दिया जाता है."
सूत्रों के मुताबिक़- 'यह सब काफी तेज़ी से होता है, महज़ चंद घंटों में. पुलिस के अनुसार TET का पेपर लीक होने के सिलसिले में लखनऊ में गिरफ़्तार किए गए गिरोह के चार लोगों ने चार लाख में पेपर ख़रीदा था, उसकी कॉपी बनाई और तीस से चालीस हज़ार में एक-एक कॉपी बेचने का धंधा किया.'

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कौन होते हैं सॉल्वर और कैसे दिलाई जाती है उनसे परीक्षा
TET में अभ्यार्थियों की जगह परीक्षा देने वाले कई सारे सॉल्वर भी गिरफ़्तार हुए. सॉल्वर्स से जुड़ी अधिकतर गिरफ़्तारियां प्रयागराज से हुईं हैं जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार से आए कई सारे सॉल्वर परीक्षा में बैठने जा रहे थे. कुल 10 सॉल्वर और उनको रिक्रूट करने वाले और परीक्षा में बैठाने का इंतज़ाम करने वाले चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
यूपी एसटीएफ़ के सूत्रों के मुताबिक़, "परीक्षा में सॉल्वर को अभ्यार्थी की जगह इम्तेहान दिलवाना भी नक़ल करवाने का एक पुराना तरीक़ा है. अगर कोई गिरोह इम्तेहान में सॉल्वर बैठाना चाहता है तो वो लड़कों को सेलेक्ट करता है. अकसर सॉल्वर वो लोग बनते हैं जो पहले से ही किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे होते हैं. मसलन अगर कोई यूपीएससी की तैयारी कर रहा है तो वो TET या यूपी-एसआई की भर्ती की परीक्षाओं में सॉल्वर के रूप में बैठ सकता है क्योंकि इन इम्तेहानों का लेवल यूपीएससी की परीक्षा से कम होता है."
एक आरोप यह भी लगता है कि इस सॉल्वर सेवा में प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाने वाले तमाम कोचिंग सेंटर भी शामिल होते हैं, लेकिन एसटीएफ़ के सूत्रों के मुताबिक़ कोचिंग सेंटर की भूमिका तो अभी तक सामने नहीं आयी है और उनके छात्रों को मोटिवेट कर सॉल्वर बनाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं.
लेकिन ऐसा होता है कि कुछ लड़के काफ़ी समाय से एक साथ प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं तो उनकी दोस्ती कुछ लोगों से हो जाती है. उनमें से कोई बोलता है कि मैंने पिछली बार सॉल्वर बनकर किसी दूसरे अभ्यार्थी का एग्ज़ाम देने के लिए पचास हज़ार रुपये लिए थे और ऐसे सॉल्वर बनाने की बात फैलती है.
परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे कुछ अभ्यार्थियों को पैसों की ज़रूरत हो सकती है, और उनको आत्मविश्वास होता है कि वो किसी परीक्षा में पास हो जायेंगे तो वो सॉल्वर बन कर पेपर देना शुरू कर देते हैं.
सूत्रों के मुताबिक़, 'यह लड़के टैलेंटेड होते हैं, लेकिन कई बार किसी वजह से उन्हें पैसों की सख़्त ज़रूरत होती है और पैसों के लालच में सॉल्वर बन जाते हैं लेकिन उस समय उन्हें इस अपराध का शायद अंदाज़ा नहीं होता है.'
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"अगर कोई गिरोह सॉल्वर की तलाश में है तो वो ऐसे सॉल्वर्स से रक़म तय कर उनसे सौदा कर लेता है. परीक्षा के दिन उन्हें सेंटर ले जाकर उनके अपने एडमिट कार्ड के सहारे परीक्षा दिलवा देता है. सॉल्वर बैठाने वाले गिरोह होते हैं और वो आपस में ताल मेल बना कर रखते हैं और ज़रूरत पड़ने पर वो अलग-अलग परीक्षाओं के लिए सॉल्वर उपलब्ध करवाते हैं."
निगरानी के बावजूद कैसे हो जाती है नक़ल?
बीबीसी ने एक शख़्स से बात की जिसने इन परीक्षाओं में निरीक्षक के रूप में काम किया है. उनके मुताबिक़, 'बहुत बड़े पैमाने पर नक़ल कराने के लिए नीचे से ऊपर तक सब मिले होते हैं. बड़े शहरों के पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षक संस्थान में नक़ल इसलिए नहीं हो पाती क्योंकि वहां पर सुरक्षा के काफी कड़े इंतज़ाम होते हैं. नक़ल अक्सर छोटे शहरों के निजी संस्थानों में करवाई जाती है जहाँ पर निगरानी और सतर्कता कम होती है.'
फ्लाइंग स्क्वाड जिन्हें नक़ल की घटनाओं को रोकने और नकलचियों को पकड़ने के लिए तैनात किया जाता है वो भी कभी-कभी नक़ल के गिरोह से मिले हुए होते हैं. इस व्यक्ति के मुताबिक़ वो आते हैं और अपने पेमेंट के लिफ़ाफ़े लेकर चले जाते हैं.

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नक़ल करने के तरीकों के हिसाब से अलग-अलग रेट होता है. मान लीजिए की अगर आप 2000 रुपए दे रहे हैं तो आप सिर्फ़ अगल-बगल बैठे अभ्यर्थियों से नक़ल कर सकते हैं. और मसलन अगर आप 5000 रुपए दे रहे हैं तो आप कुंजी या किताब रख कर इम्तेहान दे सकते हैं. और अगर आपके पास देने के लिए ठीक-ठाक पैसा है तो आपके साथ परीक्षा लिखने वाला व्यक्ति भी रहेगा.
आज कल सभी परीक्षा हॉल में CCTV कैमरे लगे हुए हैं जिसमें वीडियो के साथ-साथ ऑडियो भी रिकॉर्ड होता है. कैमरे को ऐसे लगाया जाता है कि वो पूरे वक़्त छात्रों पर तैनात रहे. लेकिन आज कल कई सारी प्रवेश परिक्षाओं में ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल होते हैं. तो कभी-कभी निरीक्षक अगर नक़ल गिरोह से मिला हुआ हो तो वो कैमरे की तरफ पीठ मोड़ कर अभ्यार्थियों को उँगलियों से इशारे कर ऑब्जेक्टिव टाइप सवालों के जवाब बता कर नक़ल करवाता है.
और जब फ्लाइंग स्क्वाड वाले पहुँचते भी हैं तो परीक्षा सेंटर के रास्ते में मौजूद ख़बरी सेंटर को एलर्ट कर देते हैं. तीन से चार किलोमीटर पहले से लोग तैनात रहते हैं. परीक्षा की कठिनाई के हिसाब से नक़ल के रेट तय होते हैं. मसलन अगर कोई हाई स्कूल में नक़ल करवाना चाहता है तो उसमें तीन हज़ार तक का रेट होता है. और कभी-कभी नक़ल एक दो लोग नहीं बल्कि एग्ज़ाम हॉल में बैठे सभी छात्र करते हैं तो सभी नक़ल करवाने के पैसे भी भरते हैं. तो अगर आप 3000 देंगे तो नक़ल करेंगे वरना अलग कमरे में बिठा दिए जाएंगें.

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एग्ज़ाम लिखने वाला ठीक ठाक पैसे चार्ज कर सकता है. सॉल्वर या जो परीक्षा लिखने में मदद करता है उसके पैसे अलग लगते हैं और परीक्षा सेंटर में भी सॉल्वर को बैठाने के लिए अलग से पैसे देने पड़ सकते हैं. परीक्षा की कठिनाई और उससे होने वाली भर्ती की उम्मीद की वजह से कुछ लोग लाखों तक खर्च करने के लिए तैयार हो जाते हैं. सब-इंस्पेक्टर की भर्ती हो रही हो तो उसमें नक़ल करने और सिलेक्शन करवाने के लिए लाखों का सौदा हो सकता है.
लेकिन सवाल यह उठता है की कोई भी अभ्यार्थी नक़ल माफ़िया के संपर्क में कैसे आता है? निरीक्षक रह चुके इस शख़्स के मुताबिक़, आप पश्चिमी उत्तर प्रदेश या पूर्वांचल में जाएंगे तो वहां के जो कुछ कॉलेज हैं वहां कुछ शिक्षा माफ़िया हैं वो आपसे खुद संपर्क करेंगे.
"अगर उन्हें पता चलता है की आप पैसा ख़र्च कर सकते हैं और परीक्षा में पैसा देकर पास करना चाहते हैं तो वो आपसे संपर्क कर लेते हैं. कुछ लोग परीक्षा सेंटर एक दिन पहले ही पहुँच जाते हैं और सेंटर के आस-पास सॉल्वर गैंग या पेपर लीक करने वाले घूमते रहते हैं. अगर कोई पैसा देने के लिए राज़ी होता है तो डील हो जाती. शाम को ही सब सेटिंग कर लेते हैं."
लीक और नक़ल में टेक्नोलॉजी का हो रहा है इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ के सूत्रों के मुताबिक़ नक़ल करने के तरीक़े परीक्षाओं के साथ बदलते रहते हैं. TET की परीक्षा में व्हाट्सऐप से पेपर लीक हुआ और उसी की बदौलत वायरल हुआ और बाद में कड़ी जोड़ कर लोगों की धरपकड़ हुई. लेकिन परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस का भी इस्तेमाल करके छात्रों को सही जवाब बताने की कोशिश की जाती है.
उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ के सूत्रों के मुताबिक़, एसआई की परीक्षा में एक आदमी ने बालों की विग के अंदर फ़ोन को डिसमेंटल कर छिपा कर नक़ल करने की कोशिश की थी. उसमें एक छोटा सा स्पीकर भी लगा था. कोरोना काल में फेस मास्क के सहारे भी लोग नक़ल करने की कोशिश कर चुके हैं. उसमें ईयर फ़ोन लगा कर चीटिंग करनी की कोशिश भी की गयी थी.
उत्तर प्रदेश एसटीएफ़ का दावा है कि जैसे-जैसे नई टेक्नोलॉजी आ रही है तो लोग चकमा देकर नक़ल करने के नए-नए तरीक़े निकाल रहे हैं.
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