RRB NTPC: रेलवे भर्ती परीक्षा रिज़ल्ट पर बवाल और उससे जुड़े हर सवाल का जवाब

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रेलवे भर्ती बोर्ड ने ग़ैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों की आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा के पहले चरण के रिज़ल्ट से उत्तर प्रदेश-बिहार के छात्र नाराज़ है.
अब रेलवे ने पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो आरआरबी -एनटीपीसी (RRB NTPC) और लेवल 1 की परीक्षा में पास हुए और फ़ेल हुए छात्रों से बात कर, अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी.
ये जाँच पहले चरण के रिज़ल्ट तैयार करने के तरीकों के बारे में होगी. हालांकि ये साफ़ कहा गया है कि इस परीक्षा में पास छात्रों की लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा.
इसके अलावा लेवल 1 की परीक्षा में पहले चरण के नतीजों के बाद दूसरे चरण की परीक्षा पर भी कमेटी अपना सुझाव देगी. कमेटी की रिपोर्ट आने तक 15 फरवरी 2022 को होने वाली दूसरे चरण की परीक्षा और 23 फरवरी 2022 को होने वाली परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ा दी गई है.
रेल मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि रिज़ल्ट को लेकर हंगामा करने वाले छात्रों की पहचान वीडियो रिकॉर्डिंग से की जाएगी और उन्हें कभी भी रेलवे में नौकरी नहीं दी जाएगी.
रिज़ल्ट के विरोध में उत्तर प्रदेश और बिहार में कई जगह प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों में ट्रेन को आग लगाई गई और पटरियों पर धरना प्रदर्शन हुआ. रेलवे का कहना है कि उनको इस वजह से काफ़ी नुक़सान झेलना पड़ा.
दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हैं जिनमें पुलिस छात्रों पर लाठीचार्ज करते देखे जा सकती है. इस बीच कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलना बाक़ी है मसलन परीक्षा का रिज़ल्ट 14 जनवरी 2022 को घोषित हुआ, लेकिन प्रदर्शन 24 तारीख को क्यों उग्र हुआ?
इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए बीबीसी ने दोनों पक्षों से बात की और पूरे मामले को विस्तार से समझा.

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विवाद किस परीक्षा को लेकर है?
देश भर में रेलवे में भर्ती के लिए 21 रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड्स (RRB) हैं. इनका काम रेलवे में भर्ती से जुड़ी परीक्षाओं का आयोजन करना है. जिन परीक्षाओं को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों में रोष है वो दो परीक्षाएं हैं, जिनके बारे में छात्रों को जानकारी एक ही विज्ञापन के ज़रिए मिली थी.
रेल मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक और प्रवक्ता राजीव जैन के मुताबिक़ ये दो परीक्षाएं हैं -
RRB NTPC भर्ती परीक्षा
RRB NTPC यानी 'रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी' परीक्षा. इस परीक्षा में अलग-अलग पे-ग्रेड पर, क़रीब 35 हज़ार नौकरियों के लिए वैकेंसी निकली थी.
इन नौकरियों के लिए 2019 में आवेदन मांगे गए थे. उसी वर्ष सितंबर में परीक्षा होनी थी. लेकिन इसमें देरी हुई.
बाद में दिसंबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच देशभर में इस भर्ती के लिए पहले चरण की परीक्षा हुई. उसी परीक्षा के नतीजे 14 जनवरी 2022 को घोषित किए गए. अब इसके दूसरे चरण की परीक्षा 15 फरवरी 2022 को होनी थी. लेकिन इन प्रदर्शनों के कारण इस परीक्षा को भी आगे बढ़ा दिया गया है.
ग्रुप सी, लेवल 1
इस परीक्षा के लिए भी साल 2019 में करीब एक लाख नौकरियों के लिए आवेदन मांगे गए थे. करीब 1 करोड़ 15 लाख आवेदनों की वजह से फ़िलहाल इसके लिए एक भी चरण की परीक्षा नहीं हो पाई है.
पहले चरण की परीक्षा 23 फरवरी 2022 को होनी वाली थी, जिसे अब आगे के लिए टाल दिया गया है. रेलवे का कहना है कि कम पद पर, बहुत अधिक आवेदन आने से उनकी दिक़्क़त बढ़ गई. इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे ने इस कैटेगरी की परीक्षा को दो चरणों में करवाने का फ़ैसला किया है.

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छात्रों की नाराज़गी और रेलवे की दलील
बिहार में आंदोलन कर रहे छात्रों का कोई संगठन नहीं है. उनका पक्ष कोचिंग चलाने वाले अध्यापक भी रख रहे हैं. बीबीसी ने बिहार में छात्रों के लिए ख़ान अकेडमी चलाने वाले ख़ान सर से बात की. उनके मुताब़िक दोनों परीक्षाओं से जुड़ी नाराज़गी भी अलग-अलग है.
RRB NTPC परीक्षा में कुछ पदों के लिए आवेदन के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास है जबकि कुछ के लिए ग्रेजुएशन है. ये पद पे-ग्रेड के हिसाब से अलग अलग लेवल में बांटे गए हैं.
इस परीक्षा के ज़रिए लेवल 2 से लेकर लेवल 6 तक की नियुक्तियां होनी हैं. मसलन लेवल 2 की एक पोस्ट जूनियर क्लर्क की है. इसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास की है. स्टेशन मास्टर की पोस्ट लेवल 6 की है जिसके लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन है.
लेकिन ग्रेजुएशन पास छात्रों ने लेवल 2 की नौकरियों के लिए भी आवेदन किया है. इस वजह से 12वीं पास छात्रों को लगता है कि उनको नौकरी मिलने की संभावनाएं कम हो जाएगी. तकनीकी तौर पर ऐसा करने के लिए किसी को मना नहीं किया जा सकता.
इसमें एक दूसरा पेंच भी है. रेलवे ने जब विज्ञापन निकाला था, तब पहले चरण की परीक्षा में कुल रिक्त पदों के 20 गुना छात्रों को पास करने की बात कही थी. ताकि दूसरे चरण में ज़्यादा से ज़्यादा छात्रों को मौका मिल पाए.

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रेलवे का दावा है कि उन्होंने ऐसा किया भी. पहले चरण की परीक्षा में कई ऐसे छात्र हैं जिन्होंने एक से ज़्यादा पदों के लिए क्वॉलिफ़ाई किया है. रेलवे ऐसे छात्रों की गिनती एक अभ्यार्थी के तौर पर नहीं बल्कि जितने पदों पर वो चुने गए हैं, उस संख्या के तौर पर कर रहा है. यानी रोल नंबर के आधार पर. मसलन श्याम ने अगर 4 पदों के लिए क्वॉलिफ़ाई किया है, तो उसको रेलवे 4 अभ्यार्थी (रोल नंबर) मान रहा है.
जबकि छात्रों का कहना है कि उसे 1 अभ्यार्थी ही गिना जाना चाहिए. यानी उनकी माँग 'वन स्टूडेंट-वन रिज़ल्ट' जारी करने की है. छात्रों की दलील है कि ऐसा करने से ज़्यादा अभ्यार्थियों को मौक़ा मिलेगा. छात्रों का दावा है कि अब जो रिज़ल्ट रेलवे ने जारी किया है वो वास्तविकता में मात्र 10 गुना रिज़ल्ट ही है.
रेलवे ने प्रेस रिलीज़ के माध्यम से छात्रों की बात का जवाब भी दिया है. उनकी दलील है कि जिस अभ्यार्थी ने पहले चरण में क्वॉलिफ़ाई किया है उसे दूसरे चरण के लिए मौक़ा मिलना ही चाहिए. चार पदों के लिए क्वॉलिफ़ाई करने के बावजूद अंत में कोई भी योग्य अभ्यार्थी एक ही पद पर नौकरी कर सकेगा, तो इस तरह से रिज़ल्ट बनाने में कोई दिक़्क़त नहीं है.

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ग्रुप सी की लेवल 1 परीक्षा अब दो चरणों में होगी. रेलवे ने 24 जनवरी 2022 को ये फ़ैसला लिया है. इस वजह से छात्रों की नाराज़गी और ज़्यादा बढ़ गई है.
दरअसल कुछ छात्रों का दावा है कि ये बहुत कम सैलरी वाली पोस्ट हैं. रेलवे की ये भर्ती परीक्षा चार साल बाद निकली है और उसमें भी आवेदन देने और परीक्षा होने के बीच दो साल का वक़्त ग़ुजर चुका है.
छात्रों का कहना है कि दो साल पहले ये बात बता दी गई होती तो तैयारी के लिए छात्रों को वक़्त मिलता.
छात्रों के इस तर्क पर रेलवे का कहना है कि इस पद के लिए आवेदन में कई तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) तक पहुंच गया था. ऑनलाइन किये गये इन आवेदनों में बड़ी संख्या में तकनीकी तौर पर ग़लत फ़ोटो और सिग्नेचर पाए गए थे. इस वजह से क़रीब साढ़े 5 लाख आवेदन रद्द कर दिये गए थे.
CAT के आदेश के बाद रेलवे ने ऐसे अभ्यर्थियों को 15 दिसंबर 2021 तक एक ऑनलाइन लिंक मुहैया करवाया. उसके बाद ही सफल आवेदकों की सूची फ़ाइनल की गई है और इनकी अब संख्या अब क़रीब एक करोड़ 15 लाख है.
रेलवे का कहना है कि अभ्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक होने की वजह से परीक्षा दो चरणों में करवाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था.
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प्रदर्शन केवल बिहार, उत्तर प्रदेश में क्यों?
दरअसल ये परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी. लेकिन बिहार- यूपी में रेलवे की नौकरी का क्रेज़ ज़्यादा है. शायद यही वजह है कि इन्हीं दो प्रदेशों में ज़्यादा विरोध हो रहा है.
बहरहाल छात्रों के प्रदर्शन की वजह से अब दोनों ही परीक्षाओं की तारीख आगे बढ़ा दी गई है और एक कमेटी का गठन किया गया है. छात्र अपनी शिकायतें और सुझाव कमेटी के सामने 16 फरवरी तक रख सकते हैं.
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