आज़म ख़ान के समर्थकों का आरोप, अखिलेश को हमारे कपड़ों से बदबू आती है- प्रेस रिव्यू

आज़म ख़ान

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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के हालिया विधानसभा चुनाव में विपक्ष के चेहरा बनकर उभरे हैं लेकिन हाल के दिनों में पार्टी के भीतर ही एक खेमे से उनकी आलोचना हो रही है कि मुसलमानों के मुद्दे पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है.

सबसे अहम है कि अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ आवाज़ समाजवादी पार्टी के महत्वपूर्ण नेता आज़म ख़ान की ओर से उठ रही है. आज़म ख़ान पिछले दो सालों से जेल में है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. इस बार के विधानसभा चुनाव में आज़म ख़ान ने रामपुर सीट 65,300 वोट से जीती थी. वहीं उनके बेटे अब्दुल्लाह ने रामपुर के बगल की स्वार सीट से 61,100 मतों से चुनाव जीता था.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस बार पिछली बार की तुलना में ज़्यादा मुस्लिम विधायक हैं. ज़्यादातर मुस्लिम विधायक समाजवादी पार्टी से हैं. इस चुनाव में ज़्यादातर मुस्लिम वोट समाजवादी पार्टी को मिले हैं और इसका नुक़सान बहुजन समाज पार्टी को उठाना पड़ा है.

रामपुर में रविवार को समाजवादी पार्टी की बैठक थी. इस बैठक में आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी फ़साहत अली ख़ान उर्फ शानू ने कहा कि पार्टी को 111 सीटों पर जीत मुस्लिम वोटों के कारण मिली है लेकिन पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मुसलमानों के ख़िलाफ़ योगी आदित्यनाथ की सरकार की कार्रवाई पर चुप हैं. फ़साहत अली ख़ान ने कहा कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जा रही है और उनकी संपत्तियां भी ज़ब्त हो रही हैं.

आज़म ख़ान

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फ़साहत अली ख़ान ने अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को हमारे कपड़ों से बदबू आती है. अखिलेश और उनके पिता मुसलमानों की मदद से मुख्यमंत्री बने लेकिन आज़म ख़ान को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया गया. अखिलेश यादव को उनकी जाति का भी वोट नहीं मिला. आपने हमारी बीजेपी से दुश्मनी करा दी. सज़ा सिर्फ़ हमको मिलेगी और मज़े सिर्फ़ आप करेंगे.''

आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी ने कहा, ''अखिलेश यादव ने विधानसभा में भाषण दिया लेकिन एक बार भी आज़म ख़ान साहब नाम नहीं लिया. आज़म ख़ान से अखिलेश यादव जेल में महज़ एक बार मिलने गए हैं. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अखिलेश यादव ही नहीं चाहते हैं कि आज़म ख़ान जेल से बाहर आएं, क्या यह बात सही है?''

फ़साहत अली ख़ान ने कहा, ''हम आज़म ख़ान से कोई फ़ैसला लेने के लिए बात करेंगे. हम उनसे समाजवादी पार्टी छोड़ने के लिए कहेंगे. आज़म साहब ने लोकसभा से इस्तीफ़ा दिया था ताकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में लोगों की आवाज़ उठा सकें. लेकिन पार्टी ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया.''

पूर्व मंत्री आज़म ख़ान कई मामलों में सीतापुर ज़िला जेल में बंद हैं. फ़साहत अली ख़ान ने अखिलेश यादव को निशाने पर तब लिया है, जब संभल से पार्टी के सांसद शफ़िक़ुर रहमान बर्क़ ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह मुसलमानों के लिए काम नहीं कर रहे हैं.''

इंडियन एक्सप्रेस से पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने फ़साहत अली ख़ान के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव आज़म ख़ान का सम्मान करते हैं और उनको लेकर चिंतित भी हैं. चौधरी ने कहा कि आज़म ख़ान जेल से बाहर क़ानूनी दिक़्क़तों के कारण नहीं आ पा रहे हैं.

हिमाचल प्रदेश

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हिमाचल प्रदेश में आप के सभी बड़े नेता बीजेपी में हुए शामिल

आम आदमी पार्टी ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश में पार्टी यूनिट को भंग कर दिया है. हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी के शीर्ष के नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद हिमाचल प्रदेश में पार्टी के प्रभारी और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने पार्टी यूनिट को भंग करने का फ़ैसला किया.

अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है.

सत्येंद्र जैन ने ट्वीट कर कहा, ''हिमाचल प्रदेश आम आदमी पार्टी की राज्य कार्यकारी समिति को भंग कर दिया गया है. राज्य में पार्टी की नई कार्यकारी समिति फिर से बनाई जाएगी.'' आप की ओर से एक प्रेस नोट भी जारी किया गया है, जिसमें प्रदेश इकाई को भंग करने की बात कही गई है.

आप के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और पार्टी के संगठन सचिव बीजेपी में शामिल हो गए थे. केसरी ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के शिमला रोड शो में आप छोड़ने की घोषणा की थी. केसरी के बीजेपी में जाने के तीन दिन बाद आप ने प्रदेश यूनिट भंग करने का फ़ैसला किया है.

आप महिला मोर्चा की प्रमुख ममता ठाकुर भी पार्टी के पाँच पदाधिकारियों के साथ बीजेपी में शामिल हो गई हैं. इसके अलावा आप महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष सोनिया बिंदल, डीके शर्मा, आप औद्योगिक विंग के अध्यक्ष और सोशल मीडिया प्रमुख आशीष कुमार भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. कहा जा रहा है कि केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आप में भगदड़ की स्थिति पैदा करवाई है. आने वाले दिनों में आप के और नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की बात कही जा रही है.

यूनिवर्सिटी

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कॉलेजों में दो डिग्री एक साथ इसी सत्र से

हिन्दी अख़बार दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने की लीड ख़बर बनाई है- कॉलेजों में दो डिग्री एक साथ इसी सत्र से. अख़बार की ख़बर के अनुसार, देश में अब दो डिग्री कोर्स एक साथ किए जा सकेंगे. दोनों ही मान्य होंगे. यूजीसी इसके लिए रेगुलेशन बना रहा है, जो नया सत्र 2022-23 शुरू होने के पहले जारी होगा. यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने बताया कि यूनिवर्सिटीज इसी सत्र से नई व्यवस्था लागू कर सकेंगी.

छात्र दोनों कोर्स एक ही यूर्निवर्सिटी से करना चाहें या अलग-अलग यूनिवर्सिटी से, ये दोनों ही बातें संभव होंगी. यही नहीं, छात्र चाहे तो एक कोर्स देश की किसी यूनिवर्सिटी से और दूसरा विदेश की यूनिवर्सिटी से भी कर सकते हैं. उदाहरण के लिए आप बीकॉम कर रहे हैं और साथ ही बीए स्पैनिश लैंग्वेज विदेश से करना चाहें तो दोनों में दाखिला लेकर एक साथ कर सकते हैं. अभी दो कोर्स एक साथ करने की व्यवस्था नहीं है.

जेएनयू

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हर यूनिवर्सिटी में कोर्स के बीच में ब्रेक मिल सकेगा, यानी कुछ कोर्स पहले और बाकी बाद में. यूजीसी की एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) स्कीम में अब देश की सभी यूनिवर्सिटीज को जोड़ा जाएगा. फ़िलहाल सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अलावा कुछ स्टेट, प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी ही इस स्कीम से जुड़ी हैं.

यूजीसी ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों और राज्यपालों को पत्र भेजकर इसमें शामिल होने का आग्रह किया है. यह स्कीम पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुई थी. एबीसी एक तरह का डिज़िटल स्टोर हाउस है, जहाँ छात्रों के एकेडमिक रिकॉर्ड जमा रहते हैं. छात्र के क्लासवर्क व ट्यूटोरियल के आधार पर उसके एकेडमिक क्रेडिट यहां जमा होते हैं.

रिकॉर्ड 7 साल तक जमा रहेगा. साथ ही छात्र के पास मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट की सुविधा होगी. यानी, छात्र को किसी कारणवश पढ़ाई छोड़नी है तो वह ब्रेक ले सकता है और बाद में अपने क्रेडिट इस्तेमाल करते हुए फिर से शुरू कर सकता है. छात्र एक साल किसी कॉलेज में पढ़ने के बाद अगले साल किसी दूसरे कॉलेज में भी पढ़ाई कर सकता है. लेकिन, यह सुविधा तभी मिलेगी, जब वह यूनिवर्सिटी एबीसी के साथ रजिस्टर्ड होगी.

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