दिल्ली के तीन विधानसभा क्षेत्रों में बंटी जहांगीरपुरी के बनने की कहानी

जहांगीरपुरी

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी में प्रवासियों की पूरी एक दुनिया बसती है. संकरी गलियां, कच्चे पक्के मकान और अलग-अलग राज्यों से आकर बसे लोगों की भीड़. वक्त के साथ भले दिल्ली बदल गई हो लेकिन जहांगीरपुरी की तस्वीर नहीं बदली.

ये इलाका कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है और अब जहांगीरपुरी से सांप्रदायिक हिंसा का एक नया अध्याय भी जुड़ गया है.

शनिवार को हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद जहांगीरपुरी सुर्ख़ियों में है. इलाके में अभी भी तनाव है. हिंसा की चपेट में आए लोगों में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं. हिंसा कैसे भड़की, दोषी कौन हैं इसकी जांच शुरू हो चुकी है.

इस बीच भाजपा ने दिल्ली सरकार पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों को बसाने का आरोप भी लगाया है.

करीब एक वर्ग किलोमीटर में बसे जहांगीरपुरी का सच क्या है? यहां रहने वाले लोग कौन हैं? ये सवाल हमें करीब 47 साल पीछे ले जाते हैं जब दिल्ली के उत्तर पश्चिम इलाके में जहांगीरपुरी बसाई गई.

कैसे बसी जहांगीरपुरी

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जहांगीरपुरी की ये कहानी शुरू होती है क़रीब साल 1975 से. जब केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी. इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी सरकार की ताकतवर धुरी थे. दिल्ली के इतिहास पर सालों से लिखने वाले इतिहासकार विवेक शुक्ला के मुताबिक, उन्हीं दिनों संजय गांधी की अगुवाई में दिल्ली को सजाने संवारने की एक मुहिम शुरू हुई. इस कोशिश में दिल्ली के मुख्य इलाकों से झुग्गी झोपड़ी को हटाना शुरू कर दिया

विवेक शुक्ला बताते हैं, ''मुझे याद है मिंटो रोड, थॉमसन रोड, मंदिर मार्ग, गोल मार्केट, चाणक्यपुरी, ताज होटल के आस-पास सैंकड़ों झुग्गियां होती थीं. इन लोगों को जहांगीरपुरी, मंगोलपुरी जैसे इलाकों में बसाया गया. इन्हें मकान बनाने के लिए साढ़े बाईस ग़ज़ के छोटे छोटे प्लॉट दिए गए थे.''

दरअसल जिन लोगों को जहांगीरपुरी में जगह दी गई थी वो उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के प्रवासी थे. ये लोग छोटे-मोटे रोज़गार और मज़दूरी से जुड़े थे और झुग्गी झोपड़ियों में उनका अस्थाई निवास था. सरकार की इन पर नज़र गई तो इन्हें नए सिरे से नई जगह पर बसाने की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत दिल्ली में कई नई कॉलोनियां बनीं.

इन कॉलोनियों की बसावट के दौरान जिन्हें सरकार ने जहां जगह दी वो वहीं बस गए. इस वजह से कॉलोनी में अलग-अलग धर्म, जाति और राज्य के लोग बसते चले गए. जहांगीरपुरी में झुग्गियों से आए लोग इस बात से बेहद खुश थे कि जहांगीरपुरी में अब उनके पास अपनी छत होगी.

जहांगीरपुरी

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42 साल से जहांगीरपुरी में रहने वाले शहजान का परिवार उन्हीं में एक है. स्क्रैप का काम करने वाले शहजान बताते हैं, ''मेरे पिता पश्चिम बंगाल के हल्दिया से काम की तलाश में दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में आए थे. वे मेहनत मज़दूरी का काम करते थे. उनके साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग भी रहते थे. 1975 के आसपास इंदिरा जी ने हमें जहांगीरपुरी में रहने के लिए प्लॉट दिया. उन्हीं दिनों से हम लोग यहां जहांगीरपुरी में रह रहे हैं. हमारी शादी भी यहीं हुई और हमारे बच्चे भी यहीं हैं.''

जहांगीरपुरी में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग रहते हैं. हिंदुओं में ख़ासकर दलितों की बड़ी आबादी यहां बसती है. इनके लिए जहांगीरपुरी पुश्तैनी जगह सी बन गई है लेकिन साल 1975 के बाद से जहांगीरपुरी की आबादी बढ़ती ही चली गई. इनमें किराए पर रहने वाले प्रवासी मज़दूर, फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग थे. इनमें कचरा बीनने वाले लोगों की भी बड़ी संख्या है.

जहांगीरपुरी में जिन लोगों के पास पैसा था उन्होंने उसी साढे़ बाईस ग़ज़ की ज़मीन पर ही चार-चार मंज़िला मकान बना लिया. यहां तक की जहांगीरपुरी के अंदर ही कई मोहल्ले और रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन तक बन गए.

वीडियो कैप्शन, जहांगीरपुरी हिंसा पर क्या बोले वहां के हिंदू और मुसलमान?

कैसी है जहांगीरपुरी की ज़िंदगी ?

जहांगीरपुरी जीएच ब्लॉक के रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रमणि तिवारी बताते हैं, ''जहांगीरपुरी के चारों तरफ़ झुग्गी-झोपड़ी बस गई है. शुरू में ज़्यादातर वाल्मीकि समाज के लोगों को यहां ज़मीन दी गई थी. जब वो बेचकर जाने लगे तो उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग यहां बसने लगे. बांग्लादेशी मुस्लिम यहां कूड़ा बीनने आते थे. धीरे-धीरे उन्होंने झुग्गी डालना शुरू कर दिया और मकान ख़रीदने लगे. इस तरह यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों की तादात बढ़ने लगी.''

इस दावे के उलट जहांगीरपुरी में रहने वाले शहजान का कहना है, ''यहां जो मुस्लिम परिवार रह रहे हैं कि वो ज़्यादातर पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों से आए हैं. यहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम नहीं रहते.''

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जबकि जहांगीरपुरी में कचरा चुनने वालों के साथ काम करने वाले अकबर बताते हैं, ''जहांगीरपुरी में करीब 100 परिवार ऐसे हैं जो मछली पालने का काम भी करते हैं. ये मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पास मछली मार्केट में मछली लाकर बेचते हैं. ये करीब बीस साल से काम कर रहे हैं और इनमें ज़्यादातर बांग्लादेशी मुसलमान हैं.''

अकबर के मुताबिक उनके परिवार के कई लोग अब भी जहांगीरपुरी में ही रह रहे हैं. ''यहां पर ज़्यादातर लोग पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर के हल्दिया ज़िले के हैं. मेरे पिता जी भी यहां आ गए थे. हमारी दादी बताती थी कि हम बुनकर का काम करते थे.''

इतिहासकार विवेक शुक्ला के मुताबिक, ''जहांगीरपुरी में रहने वाले मुसलमान उत्तर भारत के नहीं हैं. यहां के मुसलमान बांग्ला बोलते हैं. ये कहां के हैं ये साफ़तौर पर नहीं कहा जा सकता. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेशी मुसलमानों की भाषा करीब एक जैसी है.''

विवेक शुक्ला आगे कहते हैं, ''दिल्ली की सबसे बड़ी दलित आबादी जहांगीरपुरी में रहती है. यहां गुजरात से आए ऐसे लोग भी रहते हैं जो घर-घर जाकर कपड़ों के बदले बर्तन बेचने का काम करते हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग आज़ादपुर मंडी में फल सब्ज़ी बेचने के रोज़गार और छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में मज़दूरी के काम से जुड़े हैं.''

मुस्लिम महिलाएं

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पिछले चार दशकों से जहांगीरपुरी में हिंदू-मुस्लिम साथ रहते आए हैं. जहांगीरपुरी इलाके में कई मंदिर और मस्जिद हैं. दशकों से जहांगीरपुरी में हिंदू और मुस्लिम अपने पर्व त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाते आ रहे हैं. ये पहला बड़ा मामला है जब जहांगीरपुरी एक बड़े सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया है.

जहांगीरपुरी का पेचीदा नक्शा

जहांगीरपुरी की कुल आबादी कितनी है इसे लेकर अलग-अलग तरह के आंकड़े हैं. इलाके में जनसंख्या का घनत्व काफ़ी ज़्यादा है. संत रविदास नगर रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि जहांगीरपुरी की आबादी करीब सात लाख है.

इतनी बड़ी आबादी जहांगीरपुरी में कैसे रह रही है इसका अंदाज़ा इलाके के ऐसे घरों को देखकर लगाया जा सकता है जो अतिक्रमण कर बनाए गए हैं.

सुनील कुमार का कहना है, ''जहांगीरपुरी में करीब 13 ब्लॉक हैं. हर ब्लॉक में 14 गलियां हैं. हर गली में करीब 100 मकान हैं.''

खास बात ये है कि जहांगीरपुरी का इलाका दिल्ली की तीन विधानसभा क्षेत्रों में बंटा हुआ है इसलिए चुनाव के समय जहांगीरपुरी का राजनीतिक माहौल बिल्कुल अलग होता है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली की वेबसाइट के मुताबिक जहांगीरपुरी जिन तीन विधानसभा क्षेत्रों में आता है वो हैं आदर्शनगर, बादली और बुराड़ी.

पुलिस

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बुराड़ी विधानसभा में जहांगीरपुरी का ई, डबल ई और डी ब्लॉक आता है. वहीं आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में जहांगीरपुरी के एच 1, एच 2, एच 3, एच 4, ए, जी ब्लॉक और बुराड़ी विधानसभा में सी, जे, के, आई ब्लॉक आते हैं.

जहांगीरपुरी की जिस मस्जिद के पास हिंसा भड़की वो सी ब्लॉक में है जो बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र में आता है.

अपराधियों का अड्डा

जहांगीरपुरी में एक तरफ ज़्यादातर लोग रोज़ी-रोज़गार की जद्दोजहद में फंसे हैं तो दूसरी ओर ये इलाका छोटे-बड़े अपराधियों का ठिकाना बनता जा रहा है.

जहांगीरपुरी जीएच ब्लॉक के रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रमणि तिवारी के मुताबिक, "हाल के बरसों में इस इलाके में सट्टेबाज़ी, नशाखोरी, चोरी और झपटमारी के मामलों में काफी बढ़े हैं. यहां तक की जहांगीरपुरी के कुछ इलाकों में दिनदहाड़े फ़ोन और गले से चेन छीन लेना आम सी बात हो गई है.''

शांति मार्च

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पहले भी हो चुके हैं सांप्रदायिक तनाव

इतिहासकार विवेक शुक्ला के मुताबिक, ''साल 1988 में हैरी प्रिंस नाम के स्थानीय अपराधी की हत्या के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी थी. ये तनाव कई दिनों तक चला. जहांगीरपुरी में वाल्मीकि और मुस्लिम समुदाय के बीच कई बार विवाद हो चुका है.''

साल 2016 में भी जहांगीरपुरी सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आने से बचा.

जहांगीरपुरी जीएच ब्लॉक के रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रमणि तिवारी के मुताबिक, ''हमने उरी हमले में शहीद हुए भारतीय जवानों को लेकर कैंडल मार्च आयोजित किया था. हमने मार्च निकालते हुए हिंदुस्तान ज़िंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए थे. तब कुछ लोगों ने पत्थरबाज़ी शुरू कर दी थी और वे लोग पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे थे.''

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