जहांगीरपुरी हिंसा: शोभायात्रा में पथराव की दो कहानियां, दर्द और ग़ुस्सा- ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हिंदू नववर्ष, राम नवमी के बाद अब शनिवार को हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान हिंसा हुई है.
करौली, खरगोन जैसी जगहों के बाद सांप्रदायिक तनाव की आंच दिल्ली के जहांगीरपुरी तक पहुंच गई है.
2020 दंगों के बाद दिल्ली में ये सांप्रदायिक टकराव का पहला बड़ा मामला है. हालांकि, उस दौरान जहांगीरपुरी में कोई दंगा नहीं हुआ था.
पुलिस ने गिरफ़्तारियां की हैं, मामले की जांच जारी है, लेकिन स्थानीय लोगों से बात करने पर तनाव साफ़ महसूस होता है.
रविवार को जब हम जहांगीरपुरी थाने के बाहर पहुंचे तो वहां गिरफ़्तार पुरुषों के घरों की महिलाएं घंटों से दिन की कड़ी धूप में गेट के बाहर इंतज़ार कर रही थीं. रोज़ा रख रही थकी-हारी महिलाएं ग़ुस्से में थीं.
आख़िरकार पुलिसकर्मियों ने उन्हें थाने से बाहर जाने को कहा और मुख्य द्वार बंद कर दिया.
इस पर एक महिला ने कहा, "जिनके बीच लड़ाई हुई उनको तो उठाया नहीं, बेकसूरों को उठा कर लाए हैं."
दूसरी महिला ने कहा, "हमारे देवर को बोल रहे हैं कि आतंकवादी है, आप तो सच को झूठ, झूठ को सच कर देते हो."
एक अन्य ने कहा, "हम मुसलमान क्या जानवर हैं? हमारे बच्चों का अगर कोई रिकॉर्ड है तो क्या उन्हें सुधरने का मौका नहीं दिया जा सकता?"
स्थानीय लोग बताते हैं कि जहांगीरपुरी में कभी ऐसी घटना नहीं हुई है, पर शनिवार की हिंसा के बाद यहां तनाव है.
ये हिंसा कैसे हुई, क्यों हुई - पहले की तरह जहांगीरपुरी में जवाब बंटे हुए हैं. जिसे देखो मोबाइल पर हिंसा के वायरल वीडियो देखता नज़र आता है.

शोभायात्रा में शामिल लोगों में ग़ुस्सा
शनिवार की शोभायात्रा में गौरीशंकर गुप्ता भी शामिल थे. उन्होंने बताया कि जब यात्रा जहांगीरपुरी 'सी ब्लॉक' की मस्जिद के सामने से निकली तो उस पर पथराव शुरू हो गया.
गौरीशंकर के मुताबिक़ मस्जिद की छत से भी पथराव हो रहा था. हालांकि मस्जिद के प्रबंधक मोहम्मद सलाउद्दीन ने बीबीसी से बातचीत में इस बात से इनकार किया.
गौरीशंकर के मुताबिक़ घरों के ऊपर से महिलाओं ने भी शोभायात्रा पर पत्थर फेंकी.
वो कहते हैं, "बड़ी मुश्किल से जान पर खेलते हुए हम शोभायात्रा से हनुमान जी की मूर्ति लेकर आ पाए. पूरी प्लानिंग थी. हमें घेर कर मारा गया. पत्थरों से, तलवार, चाकू से. यहां राशन की गाड़ी लगी थी, उसके शीशे फोड़े गए हैं. उसका राशन भी लूटा गया है. गाड़ियों को पलटा गया है. आगे परचून की दुकान है. उनका गल्ला लूटा गया है. एक बाइक में आग लगा दी गई है."
गौरीशंकर का दावा है यात्रा में कोई विवादास्पद नारे नहीं लगे और जय श्रीराम का नारा तब लगा जब उनके ऊपर आक्रमण हुआ.
वो कहते हैं, "उनकी ओर से पत्थर, तलवार, चाकू सब चले हैं. पेट्रोल बम तक चले हैं. गोलियां तक चली हैं. चार पुलिसवाले भी घायल हैं."

जहांगीरपुरी की तंग गलियों से होते हुए हम शोभायात्रा के संयोजक सुखेन सरकार के पास पहुंचे. उनके आसपास माहौल तनावपूर्ण था. लोग ग़ुस्से में थे.
ज़मीन पर एक दरी पर हनुमान मंदिर के सामने बैठे सुखेन सरकार के मुताबिक़ शोभा यात्रा पर कई सौ लोगों ने पत्थरबाज़ी की.
वो कहते हैं, "लोग तो हमारे भी थे, लेकिन हम तो लड़ाई-झगड़ा करने के मूड में नहीं थे. हम तो शोभायात्रा निकालकर भगवा ध्वज लेकर आ रहे थे. हम तो निहत्थे थे. ऊपर से जैसे पत्थरों और शीशे की बारिश हो रही थी."
सुखेन ने अपने कपड़े हटाकर हमें दिखाया कि उन्हें पत्थरों से कहां-कहां चोट लगी है.
लेकिन ये पत्थरबाज़ी क्यों हुई, इस पर सुखेन सरकार कहते हैं, "क्या पता उन्हें जय श्रीराम से जलन है? भगवा रंग से उन लोगों को जलन है?"

सुखेन के नज़दीक एक कूलर के सामने बैठे बाबा योगी ओमनाथ ने बताया, "मेरी छाती पर पत्थर लगा. मेरे पैर में भी लगा है. ये देखिए पैर सूजा हुआ है मेरा." ऐसा कहकर उन्होंने अपना पांव दिखाया.
वो कहते हैं, "दुकानें लूटी गई हैं. मेरे पास सबूत है उसका. बाइकें जलाई गई हैं. ईंटें मस्जिद के ऊपर रखी गईं. मेरे पास इसका सबूत है. छतों के ऊपर से बारिश हुई, मेरे पास इसका सबूत है क्योंकि मैं आखिर तक लड़ा."
बातचीत के बाद निकलते वक़्त ऐसा लगा कि प्रशासन के सामने मामले को संजीदगी से संभालने की चुनौती है.

मस्जिद के आसपास के लोगों की अलग कहानी
घटना की जगह से कुछ ही दूर है जहांगीरपुरी सी ब्लॉक का भीड़ भरा इलाका.
यहां बड़ी संख्या में बंगाली बोलने वाले मुसलमान रहते हैं. यहां हिंसा कैसे शुरू हुई उसे लेकर अलग ही कहानी सुनने को मिलती है.
एक कमरे में बैठे मस्जिद के प्रबंधक मोहम्मद सलाउद्दीन कहते हैं, "हमारे बच्चे आख़िर तक ख़ामोश रहे. जब उन्होंने देखा कि मस्जिद पर कोई हमला हो रहा है या मस्जिद के ऊपर पत्थरबाज़ी हो रही है, तो हम बर्दाश्त तो कर नहीं सकते."
उनके मुताबिक़ मस्जिद के अंदर से कोई पत्थरबाज़ी नहीं हुई और जो हुआ रोड पर ही हुआ.
उन्होंने बताया कि मस्जिद 1976 में बनी और वो सालों से इसकी देखभाल कर रहे हैं.
वहीं, बैठे इनामुल हक़ ने बताया कि सी ब्लॉक में रहने वाले ज़्यादातर मुसलमान ग़रीब तबके के हैं जो छोटे-मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते हैं.
मोहम्मद सलाउद्दीन का दावा है कि ''सबसे पहले पत्थर यात्रा की ओर से आए जिसके जवाब में पत्थरबाज़ी हुई.''
सी ब्लॉक की भीड़भाड़ में मेरी मुलाक़ात शहादत अली से हुई. शनिवार को जब शोभा यात्रा निकली तब वो वहीं मौजूद थे.

शहादत के मुताबिक़ शुरुआत में निकली यात्राएं तो शांतिपूर्ण निकलीं, लेकिन बाद में स्थिति बदली.
उन्होंने अपने मोबाइल पर एक वीडियो दिखाया. उनके मुताबिक़ ये शोभायात्रा का वीडियो था जिसमें लोग तलवार लिए नज़र आ रहे थे.
शहादत के मुताबिक़ इफ़्तारी के वक़्त वो अपने घर पर खाने का बंदोबस्त कर रहे थे, तभी अचानक यात्रा में शामिल लोग पत्थरबाज़ी करने लगे और 'जय श्रीराम' का नारा लगाकर मस्जिदों में कथित तौर पर घुस गए.
शहादत का आरोप है कि लोग मस्जिद में कथित तौर पर झंडा लगाने की कोशिश कर रहे थे.
वो कहते हैं, "हमारे बड़े बुज़ुर्गों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समझा नहीं."

नज़दीक ही खड़ी रोशन जो ख़ुद को भाजपा से जुड़ा बताती हैं, उनके मुताबिक़ जो कुछ जहांगीरपुरी में हुआ वो करवाया गया था.
वो कहती हैं, "इसमें किसी का तगड़ा हाथ है. हमारे जहांगीरपुरी में ये कभी नहीं हुआ, ये करवाया गया है."
जहांगीरपुरी पुलिस थाने के बाहर गिरफ़्तार किए गए एक अभियुक्त की एक रिश्तेदार ने कहा, "उनके (शोभायात्रा में शामिल लोगों के) हाथ में तलवार, पिस्टल न जाने क्या-क्या था. ला-लाकर दिखा रहे थे. वो कह रहे थे हिंदुस्तान में रहना होगा तो 'जय श्रीराम' कहना होगा. कहीं लिखा हुआ है क्या?"
मीडिया में छपे इन आरोपों पर कि 'सी ब्लॉक में कथित तौर पर बांग्लादेशी रहते हैं', इस पर एक महिला साज़दा ने कहा, "ये सारे लोग कलकत्ते के हैं. प्रूफ़ देख लीजिए. मुसलमानों की ज़बान पर तो यक़ीन होता नहीं है. मीडिया वालों ने पहले से ही मुसलमानों को बदनाम कर रखा है. बांग्लादेशी और कलकत्ते के लोगों की भाषा अलग है."
मौके पर पहुंचे दिल्ली पुलिस के स्पेशल पुलिस कमिश्नर (क़ानून और व्यवस्था) दीपेंद्र पाठक ने बीबीसी से कहा कि पुलिस तमाम ऐंगल पर काम कर रही है और "जो कोई भी इस दंगे की अप्रिय घटना में लिप्त पाया जाएगा औक पाया जा रहा है उन सबके ऊपर कड़ी क़ानूनी कार्रवाई होगी."

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मोहम्मद अंसार की गिरफ़्तारी
गिरफ़्तार किए गए लोगों में मोहम्मद अंसार भी शामिल हैं. हम जब उनके घर पहुंचे तो उनके घर के बाहर भीड़ जमा थी.
उनकी पत्नी सकीना बीवी के मुताबिक़ वो तो घटनास्थल पर लोगों को बचाने गए थे.
उनकी पड़ोसन कमलेश गुप्ता ने भी कुछ ऐसा ही बताया.
उधर स्पेशल पुलिस कमिश्नर दीपेंद्र पाठक के मुताबिक़ अंसार का आपराधिक रिकॉर्ड है और उन पर पुलिस का सर्वेलेंस रहा है.
रिपोर्टों के मुताबिक़ गिरफ़्तार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
प्रशासन शांति की कोशिशें कर रहा है, सड़कों पर सुरक्षाबल तैनात हैं, लेकिन लोगों से बात करें तो लगता है एक-दूसरे को लेकर असुरक्षा की भावना गहरी हो रही है, दूरियां बढ़ रही हैं.

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पुलिस की भूमिका पर सवाल
जहांगीरपुरी हिंसा मामले में पुलिस ने अब तक 23 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें दो नाबालिग़ हैं. गिरफ़्तार 14 लोगों को रविवार को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया.
कोर्ट ने अंसार और असलम नाम के दो अभियुक्तों को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, बाकी के अभियुक्तों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
हनुमान जयंती की शोभा यात्रा के दौरान दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में हुई हिंसा पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस घटना की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है.
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की अब तक की जांच, एकतरफ़ा और सांप्रदायिक होने के अलावा असली अपराधियों को बचाने का प्रयास रही है.
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