जहांगीरपुरी हिंसा का मुख्य अभियुक्त बताया जा रहा मोहम्मद अंसार कौन?

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गलियों के अंदर तंग गलियां.. सभी एक दूसरे से ऐसे मिली हुईं और ऐसे जुड़ी हैं कि कहाँ से घुसे और कहाँ से निकले - इसका अंदाजा लगाना पहली बार पहुँचे शख्स के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.
दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े की पहचान भी यही तंग गलियां हैं. आम दिनों में इन गलियों की रौनक अलग हुआ करती थी. लेकिन शनिवार शाम के बाद से यहाँ का माहौल बिल्कुल अलग है.
जहांगीरपुरी इलाके की हर गली के बाहर पुलिस का पहरा है. ख़ास तौर पर ब्लॉक बी और सी इलाके में, जहाँ बीते शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा हुई.
वैसे तो इस इलाके में मंगलवार को कुछ हद तक ज़िंदगी पटरी पर लौटने लगी थी.
घरों से बच्चे अब स्कूलों की तरफ़ जा रहे थे. लेकिन बाज़ारों की रौनक हर तरफ़ गायब थी. दुकाने बंद हैं और कबाड़ का कारोबार, जिसके लिए इलाका जाना जाता है, उसका काम ना के बराबर चल रहा था.
हिंसा की जगह से थोड़ी दूर पर कुशल चौक है, जहाँ तक मीडिया वालों की एंट्री है.

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मंदिर हो या मस्ज़िद जिस गली में जाना हो, पुलिस की गहन पूछताछ के बाद ही बाहर वालों को अंदर जाने दिया जा रहा है.
पुलिस के तमाम सवालों से दो चार होते हुए बीबीसी की टीम भी तंग गलियों से होते हुए जहांगीरपुरी सी और बी ब्लॉक तक पहुँची.
यहाँ हिंदू और मुस्लिम आबादी की संख्या एक सी लगी. हर गली के कोने पर जुटे लोगों की ज़ुबान पर एक नाम था मोहम्मद अंसार का.
वही मोहम्मद अंसार जिसे पुलिस इस पूरी हिंसा का असल 'इंस्टिगेटर और इनिशिएटर' यानी 'हिंसा को भड़काने और शुरू करने वाला' मान रही है. अंसार अब पुलिस कस्टडी में है. इस पूरे मामले में गिरफ़्तार 24 लोगों में वो भी एक अभियुक्त है.
दिल्ली के कुछ मीडिया चैनल मोहम्मद अंसार को शनिवार की घटना का 'मास्टरमाइंड' करार दे रहे हैं.
दिल्ली में सक्रिय दो राजनीतिक पार्टियां, बीजेपी और आम आदमी पार्टी, मोहम्मद अंसार को विरोधी पार्टी से जुड़ा हुआ बता रही हैं.
इन तमाम दावों और वादों के बीच एक अहम जानकारी उसके बीते कल की भी है. दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक़ इस घटना के पहले उस पर सात एफ़आईआर पहले से दर्ज़ हैं.
इस वजह से मोहम्मद अंसार के कल और आज की पूरी कहानी जानने के लिए बीबीसी जहांगीरपुरी की तंग गलियों से होते हुए उनके घर, उनके रिश्तेदारों के पास पहुँची. आयोजकों से उनके बारे में पूछा और साथ ही दिल्ली पुलिस की जाँच में उनकी भूमिका के बारे में भी तमाम सवालों के जवाब खंगाले..
कौन हैं मोहम्मद अंसार?
दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक़, मोहम्मद अंसार की उम्र 35 साल है. पिता का नाम अलाउद्दीन है. वो चौथी क्लास तक पढ़ा है और जहांगीरपुरी बी ब्लॉक में रहता है. शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर शोभायात्रा के समय दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हुई उस समय वो मौके पर मौजूद था.
ग़ौरतलब है कि हिंसा की वारदात उस वक़्त हुई जब शोभा यात्रा सी ब्लाक से जी ब्लॉक की तरफ़ जा रही थी, जबकि अंसार बी ब्लॉक का रहने वाला है.
जहांगीरपुरी बी ब्लॉक में मोहम्मद अंसार का चार मंजिला मकान है. सबसे नीचे के फ़्लोर पर वो परिवार के साथ रहता है, ऊपर के बाकी तीन फ़्लोर पर किराएदार रहते हैं. मंगलवार को उसके घर पर ताला लगा था. पूछने पर मालूम चला कि पत्नी थाने गई है. बच्चे अपने रिश्तेदार के घर हैं. अंसार की तीन बेटियां और दो बेटे हैं. पूरा परिवार कुछ साल पहले ही बी-ब्लॉक में रहने आया.
इससे पहले जहांगीरपुरी के सी-ब्लॉक में ही वो रहते थे. ये तमाम जानकारी अंसार के पड़ोसियों से मिली.
अंसार के मकान के दोनों तरफ़ हिंदू परिवार रहते हैं. उन घरों के बाहर लक्ष्मी गणेश और हनुमान की फोटो, इस बात की गवाही देते है.

अंसार के बारे में पूछने पर गली के कुछ लोगों ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए तो कुछ ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया.
शेख़ बबलू जहांगीरपुरी में 45 साल से रहते हैं. शनिवार की घटना के वो चश्मदीद भी हैं- ऐसा वो दावा करते हैं. मोहम्मद अंसार को भी वो जन्म से जानते हैं और सी ब्लॉक में उनके पड़ोसी होने का दावा करते हैं.
बीबीसी से बातचीत में शेख़ बबलू कहते हैं, "बच्चों की परवरिश ठीक से हो इस वजह से सी-ब्लॉक का मोहल्ला उन्होंने छोड़ा. पढ़ाई लिखाई ज़्यादा नहीं की है. वो कबाड़ का बिजनेस करते हैं. रोज़ लगने वाले फुटपाथ बाज़ार में उनकी मोबाइल की दुकान भी चलती है. सी-ब्लॉक फुटपाथ बाज़ार के वो प्रेसिडेंट भी हैं."

'रॉबिनहुड या राजा बाबू' ?
पुलिस की गिरफ़्त में आने के बाद, सोशल मीडिया पर मोहम्मद अंसार का एक वीडियो काफ़ी वायरल है, जिसमें उन्हें कहते सुना जा सकता है कि 'हाँ, मैं गुनेहगार हूं'
उनके इस वीडियो की चर्चा भी खूब हो रही है. इस वीडियो पर सवाल पूछते ही, शेख असगर बोल पड़ते हैं. 'ये वीडियो हमने भी देखा है. पुलिस के हाथ 100 से ज़्यादा वीडियो लगे हैं. एक भी वीडियो दिखा दो जिसमें अंसार दंगा कर रहा हो.'
इलाके में रहने वाले मुसलमानों का दावा है कि मोहम्मद अंसार ने हिंसा को रोकने की कोशिश की थी ना की भड़काने की. वो सबकी मदद के लिए आगे आते थे - हिंदू हो या फिर मुस्लिम.
लोगों ने दावा किया कि कोरोना काल में अंसार ने लोगों को खाने के पैकेट बांटे, कोरोना वायरस से मरे उन हिंदुओं की अर्थी को कंधा भी दिया, जिसे घर वालों तक ने छोड़ दिया था. कोई उन्हें इलाके का 'रॉबिनहुड' कहता है तो कोई 'राजा बाबू' फिल्म का गोविंदा, जो मौके के हिसाब से पुलिस भी है, नेता भी है और वकील भी है.
कुछ ने अर्थी को कंधा देते हुए उनके वीडियो भी बीबीसी के साथ शेयर किए, कुछ लोगों ने हनुमान जयंती वाले दिन की सुबह की वीडियो भी हमें भेजी, जिसमें वो एक बच्चे को तलवार नहीं लेने के बारे में समझाते हुए दिख रहे हैं. बीबीसी इन वीडियोज़ की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
बी-ब्लॉक में ही उनके पड़ोस में ललित भी रहते हैं. बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "गली मोहल्ले के हिसाब से तो वो अच्छे इंसान हैं. हर घर के सुख-दुख में वो बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे."

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लेकिन जैसे ही ललित से अंसार पर पुलिस द्वारा लगाए आरोपों पर सवाल पूछा, ललित ये बोल कर घर के अंदर चले गए कि ' क्या कहा जाए अंदर और बाहर की शक्ल में बहुत चीज़ों में फ़र्क आ जाता है."
बी-ब्लॉक में मोहम्मद अंसार के पड़ोस में रोज़ी भी रहती हैं. बीबीसी से बातचीत में वो मोहम्मद अंसार के बारे में कहती है कि वो काफ़ी मददग़ार इंसान हैं. हर तरह से लोगों की मदद करते हैं.
पुलिस रिकॉर्ड में मोहम्मद अंसार
हालांकि दिल्ली पुलिस का दावा, इलाके के मुसलमानों की राय से बिल्कुल अलग है.
बीबीसी से बातचीत में दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर दीपेन्द्र पाठक कहते हैं, " जहांगीरपुरी हिंसा की जाँच अभी बहुत ही शुरुआती दौर में है. मोहम्मद अंसार को पूरी घटना का 'मास्टरमाइंड' कहना ठीक नहीं रहेगा. हां, वो पूरे मामले में इनिशिएटर ( घटना को शुरू करने वाला) रहा है. दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर में वो नामज़द अभियुक्त है. सबसे पहले उसी का नाम आया था. सबसे पहले उसने चार-पाँच लोगों को वहाँ ला कर धक्का मुक्की की थी. उसी से हालात ख़राब हुए थे. बाक़ी डिटेल जाँच का विषय है. अभी जाँच शुरुआती दौर में है."
मीडिया में मोहम्मद अंसार के नाम की एक फाइल भी घूम रही है, जिसमें उनके पुराने अपराधों का लेखा-जोखा है.
उस फाइल को सही ठहराते हुए उससे जुड़े सवाल पर दीपेन्द्र पाठक ने कहा, "हां, मोहम्मद अंसार पर पहले सात एफ़आईआर हैं, जिसमें से एक जुआ खेलने, एक सरकारी कर्मचारियों पर हमले से और एक एफ़आईआर लोगों को नुक़सान पहुँचाने से जुड़ी है. दिल्ली पुलिस रिकॉर्ड्स में वो हिस्ट्रीशीटर है. इलाके का बैड कैरेक्टर है और स्थानीय पुलिस की निगरानी में हमेशा रहा है. उन पर चल रहे सातों केस, अभी ट्रायल की स्टेज पर हैं और वो बेल पर हैं."
ये पूछे जाने पर कि मोहम्मद अंसार के ख़िलाफ़ हिंसा में शामिल होने के पुलिस को क्या कोई वीडियो सबूत मिले हैं? इस पर उन्होंने कहा, "बहुत सबूत हैं. बिना सबूतों के गिरफ़्तारी संभव नहीं है."
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि इलाके के जामा मस्ज़िद के इमाम ने मोहम्मद अंसार को फ़ोन कर मौक़े पर बुलाया. हालांकि जहांगीरपुरी सी ब्लॉक जामा मस्ज़िद के सेक्रेटरी सलाउद्दीन से बीबीसी ने इन दावों के बारे में पूछा तो उन्होंने इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि मस़्जिद के इमाम या उनके पास मोहम्मद अंसार का मोबाइल नंबर भी नहीं है. घटना के वक़्त मोहम्मद अंसार मस्ज़िद में था भी नहीं.
स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर ने 'अंसार को फ़ोन कर मस्ज़िद बुलाए जाने के' दावे को ख़ारिज़ करते हुए कहा, "ऐसा कुछ भी कहना अभी जल्दबाज़ी होगी. अब पूरे मामले की जाँच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है."
मोहम्मद अंसार को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था. अब रिमांड तीन दिन के लिए आगे बढ़ गई है.
दीपेन्द्र पाठक, मोहम्मद अंसार के लिए मास्टरमाइंड की जगह - 'इंस्टिगेटर और इनिशिएटर' जैसे अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहते हैं कि उसके साथ कई और भी लोग इसमें शामिल थे.
सोशल मीडिया पर मोहम्मद अंसार की वायरल तस्वीर और राजनीतिक पार्टियों के दावे
सोशल मीडिया पर मोहम्मद की कई तस्वीरें भी वायरल हैं, जिनमें से एक बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने पोस्ट किया है, जिसमें उनके हाथ में बंदूक भी है.
दिल्ली पुलिस से बीबीसी ने जब इस बारे में सवाल पूछा कि क्या मोहम्मद अंसार के पास लाइसेंस वाला कोई हथियार होने की सूचना उन्हें है ? तो उन्होंने इससे साफ़ इनकार कर दिया.
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उनके फोटो देख कर पता चलता है कि उन्हें सोने के गहने पहनने का बहुत शौक है, लेकिन उनके जानने वालों का दावा है कि फोटो में दिखने वाले सारे गहने असली सोने के नहीं. उन्हें दिखावे का शौक है.
दूसरी तरफ़ दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने दावा किया है कि मोहम्मद अंसार का नाता आम आदमी पार्टी के साथ है.

ये दावा उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही एक तस्वीर देख कर किया, जिसमें वो आम आदमी पार्टी के एक नेता के साथ 'आप पार्टी की टोपी' पहने हुए हैं.
इस बारे में प्रवीण शंकर कपूर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सवाल भी पूछा है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी ऐसे ही आरोप मोहम्मद अंसार पर लगाए हैं.

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इन आरोपों को आम आदमी पार्टी ने ना सिर्फ सिरे से ख़ारिज़ किया, साथ ही मोहम्मद अंसार के बीजेपी कनेक्शन की बात भी कही.
आम आदमी पार्टी की कालकाजी सीट से विधायक आतिशी मार्लेना ने ट्विटर पर मोहम्मद अंसार के बीजेपी नेताओं के साथ फोटो शेयर करते हुए उनके बीजेपी के साथ संबंधों का जिक्र किया.
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दोनों में से सच कौन बोल रहा है, ये हमने जहांगीरपुरी के स्थानीय लोगों और मोहम्मद अंसार के परिवार से जानने की कोशिश की.
हलीमा, मोहम्मद अंसार के छोटे भाई की पत्नी है. बी-ब्लॉक में ही कुछ दूर पर उनका भी घर है.
मोहम्मद अंसार के राजनीतिक जुड़ाव के बारे में हमने उनसे सीधा सवाल पूछा. जवाब में उन्होंने साफ़ कहा कि वो किसी पार्टी से कभी ज़ुडे नहीं रहे.
इलाके के लोग कहते हैं कि वो किसी पार्टी का नहीं है. ना वो झाड़ू ( आम आदमी पार्टी ) का है और ना ही बीजेपी का है. उनके फोटो हर पार्टी वाले के साथ आपको मिल जाएंगे. उनको फोटो खिंचवाने का शौक है.
आयोजकों पर क्या कहती है पुलिस ?
जहांगीरपुरी में रिपोर्टिंग के दौरान एक ज़िक्र आयोजकों का भी आया. कई लोगों की शिकायत थी की आयोजकों पर मीडिया में बात क्यों नहीं हो रही. क्या ऐसे आयोजन की इजाज़त थी.
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती के मौके़ पर तीन शोभायात्रा निकली थी. पहली दो यात्राओं को दिल्ली पुलिस की इजाज़त थी. तीसरी यात्रा के लिए पुलिस की परमिशन नहीं मिली थी.
बीबीसी को उस तीसरी यात्रा की एप्लिकेशन भी मिली है, जिसमें हनुमान जयंती पर शोभा यात्रा निकालने की इजाज़त दिल्ली पुलिस से माँगी गई थी.
ये इजाज़त विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा शाम 4.30 बजे के लिए माँगी गई थी. इस एप्लिकेशन को साइन करने वाले वीएचपी के सह विभाग मंत्री ब्रह्म प्रकाश हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़ ब्रह्म प्रकाश की दस्तख़त की हुई चिट्ठी उनके सहयोगी प्रेम शर्मा लेकर थाने पहुँचे थे.

ब्रह्म प्रकाश ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि वो सेंट्रल लेवल के ऑर्गनाइज़र हैं. पूरी दिल्ली में 20 से ज़्यादा ऐसी यात्राओं की इजाज़त दिल्ली पुलिस से वीएचपी ने माँगी थी. ऐसी यात्राओं के लिए दिल्ली पुलिस कभी परमिशन नहीं देती है, केवल 'हां' और 'ना' में सूचित करती है. हमें केवल एक शोभायात्रा नहीं निकालने की सूचना मिली थी, जो शाहदरा इलाके से निकलने वाली थी. इसे हमने कैंसिल कर दिया था.
बीबीसी ने ब्रह्म प्रकाश के दावों के बारे में भी दीपेन्द्र पाठक से सवाल पूछा. जवाब में उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस की जाँच समग्र तरीके से हो रही है. शुरुआत से लेकर अंत तक हर चीज़ का आकलन भी हो रहा है और जाँच भी कर रहे हैंं.
बीबीसी से ब्रह्म प्रकाश के किए दावे पर जब हमने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, "ब्रह्म प्रकाश ग़लत बोल रहे हैं. इस तरह की शोभायात्रा के लिए परमिशन का एक सेट मॉड्यूल है. सबसे पूछताछ हो रही है."
बीबीसी प्रेम शर्मा के घर भी पहुँची, जो जहांगीरपुरी के पड़ोस के इलाके आदर्श नगर में रहते हैं. वो घर पर नहीं थे. लेकिन उनकी माँ ने बताया की रविवार को प्रेम शर्मा से भी पुलिस ने घंटों तक पूछताछ की है. प्रेम शर्मा बचपन से ही शाखा से जुड़े हैं. सालों से इलाके में हनुमान जयंती पर शोभायात्रा निकालते आए हैं. लेकिन ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई.
मंगलवार को जब बीबीसी की टीम उनके घर पर पहुँची थी, उस समय वे झंडेवालान में वीएचपी दफ़्तर गए हुए थे.
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