जहांगीरपुरी हिंसा: वीएचपी ने कहा, शोभायात्रा की इजाज़त नहीं थी तो पुलिस वहां क्यों थी?

जहांगीर पुरी

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (कानून-व्यवस्था) दीपेंद्र पाठक ने मंगलवार को बताया है कि जहांगीरपुरी हिंसा मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इसके साथ ही कुछ नाबालिग़ों को भी हिरासत में लिया गया है.

इससे पहले पाठक ने सोमवार शाम एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान बताया था कि पुलिस ने इस मामले में 24 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इसी इंटरव्यू में पाठक ने कहा था- "तीन शोभा यात्राएं थीं, जिनमें से पहली शोभा यात्रा 11 बजे और दूसरी दोपहर 1 बजे निकाली गयी थी. इन दोनों के लिए 25 और 31 मार्च को इजाज़त मांगी गयी थी. इन दोनों यात्राओं की इजाज़त दी गयी थी. तीसरी शोभा यात्रा के लिए इजाज़त 15 तारीख़ की शाम को मांगी गयी थी. इस शोभा यात्रा को इजाज़त नहीं दी गयी थी."

पाठक आगे कहते हैं- "लेकिन जब वे लोग इकट्ठे हो गए...हालांकि, उन्हें शोभा यात्रा नहीं निकालने के लिए कहा गया था. लेकिन जब लोग इकट्ठे हो गए, और भीड़ जमा हो गयी. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने उन्हें ज़रूरत के हिसाब से सुरक्षा दी."

दिल्ली पुलिस के इस बयान पर सवाल उठाया जा रहा है कि जब इजाज़त नहीं थी तो पुलिस ने उन्हें सुरक्षा क्यों दी?

दीपेंद्र पाठक ने मंगलवार दोपहर इसी सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि "पुलिस का काम कानून-व्यवस्था संभालना है, स्थिति संवेदनशील होने पर पुलिस को मौके की नज़ाकत देखते हुए फैसला करना होता है. इसी वजह से पुलिस वहां मौजूद थी और कम से कम समय में स्थिति को संभालने में सफल हुई है, और आम लोगों को न के बराबर नुकसान पहुंचा है."

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लेकिन जहां एक दिल्ली पुलिस दावा कर रही है कि पुलिस ने जहांगीरपुरी की शोभा यात्रा के आयोजन की इजाज़त नहीं थी, वहीं विश्व हिंदू परिषद का दावा है कि उनकी शोभा यात्रा को इजाज़त दी गई थी.

बीबीसी ने विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल से बात कर इस मामले से जुड़े तमाम सवालों के जवाब हासिल करने की कोशिश की है.

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल

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सवाल - क्या दिल्ली पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद को जहांगीरपुरी में शोभा यात्राएं निकालने की इजाज़त दी थी?

विश्व हिंदू परिषद ने जहांगीरपुरी में सिर्फ एक यात्रा आयोजित की थी जो कि शाम को आयोजित की गयी थी जिसमें हम पर हमला किया गया. जहां तक इजाज़त का सवाल है तो मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस के इन अधिकारी ने अपने रिकॉर्ड को खंगाला नहीं है. हमारे पास उस यात्रा की परमिशन थी और है, तभी इसे शुरू किया गया.

दूसरी बात ये है कि जब यात्रा की इजाज़त नहीं थी तो पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और कांस्टेबल हमारे साथ क्या कर रहे थे. अगर वो कहते हैं कि हमारी यात्रा अधिकृत नहीं थी तो उन्होंने हमारी इस यात्रा को स्टार्टिंग प्वॉइंट पर क्यों नहीं रोका?

तीसरी बात ये थी कि जब हमारे ऊपर मस्जिद से सुनियोजित ढंग से हमला हुआ तब उस समय बचाने वाले यही तो अधिकारी थे, जो घायल हुए वो यही तो अधिकारी थे, जिन्हें गोली लगी बेचारों को, इस घटना में अधिकांश ज़ख़्मी तो पुलिसकर्मी ही थे.

तो क्या ये पुलिसकर्मी टहलने के लिए आए थे या गश्त लगा रहे थे इस क्षेत्र में? नहीं, वे हमारी यात्रा की सुरक्षा के लिए चल रहे थे. क्योंकि हमारी यात्रा पूरी तरह से नियोजित थी, इस बारे में पहले से जानकारी दी गयी थी और इसे इजाज़त दी गयी थी.

पुलिस अपने रिकॉर्ड्स की कमी या स्थानीय पुलिस अधिकारियों की अकर्मण्यता को छिपाने के लिए हिंदू समाज पर अनर्गल आरोप लगाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है, वो दिल्ली पुलिस जिसे जांबाज पुलिस कहा जाता है, जिसे इन्फॉर्म्ड पुलिस भी कहा जाता है, उसकी कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं.

मुझे लगता है कि पुलिस कमिश्नर को ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए.

हिंसा में क्षतिग्रस्त कार

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सवाल - इस शोभा यात्रा में तलवारें, पिस्टल और बेस बॉल बैट जैसी चीज़ें भी लहराने की इजाज़त मांगी ग थी?

हमारी शोभा यात्रा में इस तरह की चीजें नहीं थीं. हमें नहीं पता था कि हमारे ऊपर हमला हो सकता है. और जब पुलिस हमारे साथ चल रही थी तो हम निश्चिंत रूप से चल रहे थे. गोलियाँ किसकी चलीं, किसको लगीं, पुलिस ये सब साबित कर चुकी है.

अगर हमारे पास इस तरह के हथियार होते तो हम भी तो हमला करते, हमने तो कोई गोली नहीं चलाई. हमारी तरफ़ से कोई गोली नहीं चली. आज तक कहीं कोई सबूत आया हो तो बता दें.

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सवाल - क्या आप अपनी इस बात को साबित करने के लिए अपनी शोभा यात्रा का कोई वीडियो जारी कर सकते हैं?

हम अपनी बात को पूरी मज़बूती से रख रहे है, हमें अपनी बात को साबित करने के लिए किसी वीडियो की प्रामाणिकता की आवश्यकता नहीं है. हम जो कहते हैं, वही करते हैं और जो करते हैं वही कहते हैं. ये विश्व हिंदू परिषद की अपनी प्रामाणिकता है. हम न तो ग़ैर-कानूनी काम करते हैं और न ग़ैर-कानूनी काम सहन करते हैं.

जहांगीरपुरी की मस्जिद में पड़े हुए झंडे

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सवाल - क्या जय श्री राम का नारा लगाते हुए मस्जिद में घुसने का प्रयास किया गया?

देखिए, जय श्री राम का नारा तो हम लगाते हैं. और जय श्री राम के नारे से किसी को कोई तकलीफ़ हो सकती है तो वो देश विरोधी ही हो सकता है.

रही बात मस्जिद में घुसने की तो हमें न तो मस्जिद में घुसने की आवश्यकता है, न हम मस्जिद में घुसे, न मस्जिद में घुसने की हमारी प्रवृत्ति, प्रकृति और संस्कृति है.

और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने भी साफ़-साफ़ कह दिया है कि न कोई मस्जिद में घुसा है और न भगवा लहराया गया है.

जहांगीरपुरी में हिंसा प्रभावित इलाके में तैनात सुरक्षाकर्मी

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अब तक इस मामले में क्या हुआ?

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में बीते शनिवार शाम लगभग सात बजे हनुमान जयंती के मौके पर निकाली गयी शोभा यात्रा के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदायों में हिंसा देखने को मिली थी.

इसके बाद से हिंसा प्रभावित क्षेत्र में भारी मात्रा में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है.

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी दीपेंद्र पाठक ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर ज़मीनी स्थिति का जायज़ा लिया है.

पाठक ने बताया है कि स्थिति शांतिपूर्ण है, अमन समिति के साथ बातचीत हो रही है. और निष्पक्ष ढंग से जांच की जा रही है.

इस घटना में पीएफआई की संलिप्तता के दावों पर पाठक ने जांच शुरुआती दौर में होने की बात कहते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

पाठक के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना भी मस्जिद पर भगवा झंडा लगाने के दावों से इंकार कर चुके हैं.

इस मामले में पुलिस ने अब तक 24 लोगों को गिरफ़्तार किया है और कुछ नाबालिग़ों को भी हिरासत में लिया है.

इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है.

बीजेपी ने इस हिंसा के लिए केजरीवाल सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. बीजेपी की दिल्ली शाखा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने ट्वीट करके आरोप लगाया है कि ये हिंसा आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं को अवैध रूप से ठहराने की वजह से हुई है.

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उन्होंने दावा किया है कि हिंसा में गिरफ़्तार अंसार नामक अभियुक्त आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है.

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इस पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी ने मंगलवार दोपहर कहा है कि जहाँगीरपुरी दंगों को मुख्य अभियुक्त अंसार बीजेपी का नेता है.

वहीं, बीबीसी के साथ बातचीत में विनोद बंसल ने दावा किया है कि 'इस हिंसा के लिए इस्लामिक जिहादी और उनको पालने-पोसने वाली राजनीतिक गैंग ज़िम्मेदार है जो टूलकिट गैंग है, जो भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाने वाले और उनको प्रश्रय देने वाली कांग्रेस और उसकी कोख से निकली राजनीतिक पार्टियां ज़िम्मेदार हैं'.

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