'संजय राउत के बारे में हम नहीं जानते, हमें मुंबई में अपना घर चाहिए'- पत्रा चाल के लोग

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- Author, दिपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी सेवा
"ये गंदी राजनीति हो रही है, ये लोग अपने घरों में पैसे भर-भर कर रख रहे है और हमें रहने के लिए वो जगह भी नहीं मिल पा रही है जिसके हम हक़दार हैं."
ये कहना है पत्रा चाल की रहने वाली विजया थोर्वे का. हाल के दिनों में पत्रा चाल विवादों के केंद्र में हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संजय राउत से जुड़ी संपत्तियों को ज़ब्त किया है.
ईडी पत्रा चाल से जुड़े कथित मनी लॉन्डरिंग के एक मामले में संजय राउत के ख़िलाफ़ जांच कर रही है.
विजया थोर्वे ने बीबीसी मराठी से अपना दुख साझा किया. 22 साल पहले अपनी शादी के बाद विजया पत्रा चाल में रहने आईं थीं. वो पिछले तेरह सालों से यहां किराये पर रह रही हैं.
पत्रा चाल का पुनर्विकास साल 2008 में शुरू हुआ लेकिन ये अब तक पूरा नहीं हो सका है.
इस प्रोजेक्ट में 1038 करोड़ रुपये की कथित हेरफेर की जांच ईडी कर रही है.

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'हम पूरा जीवन किराए के घर में ही रहते आए हैं'
पत्रा चाल मुंबई के गोरेगांव वेस्ट इलाक़े में स्थित एक रिहाइशी इमारत है. इस इमारत में कुल 682 घर हैं. यहां रहने वाले लोगों की मंज़ूरी से एमएचएडीए, गुरुआशीष कंपनी और निवासियों के बीच पुनर्विकास का एक समझौता हुआ था.
ये वादा किया गया कि 13 एकड़ में बनी इमारत में पत्रा चाल में रहने वाले लोगों को 672 घर दिए जाएंगे. लेकिन वास्तविकता में निवासियों को कुछ भी नहीं मिला और वो अब अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं.
ये भी तय हुआ था कि जब तक ये प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा, डेवलपर निवासियों का किराया भी चुकाएंगे. लेकिन निवासियों की शिकायत है कि उन्हें साल 2015 के बाद से किराया नहीं मिला है.
विजया थोर्वे कहती हैं, "हमें पूरी ज़िंदगी किराया चुकाते हुए हो गई है. हम किराये पर इतना पैसा ख़र्च कर चुके हैं कि हम उससे एक घर ख़रीद सकते थे. मैंने अपना सोना गिरवी रख दिया और कुछ जेवर बेच भी दिए हैं. हमारे हालात इतने ख़राब हो गए हैं कि मेरा बेटा अब आगे पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहा है क्योंकि हम ख़र्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं."
एक अन्य निवासी शशांक रमानी कहते हैं, "एमएचएडीए और डेवलपर ने वास्तव में हमें अकेला छोड़ दिया है."
रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर नज़र रखने और इसके लिए अभियान चलाने के लिए स्थानीय निवासियों ने सिद्धार्थ नगर रेज़िडेंट्स समिति बनाई है.
रमानी कहते हैं, "जब निर्माण शुरू हुआ तो हमें ये अहसास हुआ कि ये बहुत ही धीमी गति से चल रहा है. हमें ये भी पता चला कि जिस जगह को हमें देने का वादा किया गया था उसे एक प्राइवेट डेवलपर को बेच दिया गया. इसलिए हमने विरोध प्रदर्शन किया और इसके ख़िलाफ़ हमने भूख हड़ताल भी की."
इसी बीच यहां रहने वालों ने खेर वाडी पुलिस थाने और एमएचएडीए में भी अपनी शिकायत दर्ज करवा दी.

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कैसे शुरू हुई ईडी की जांच?
इतने सालों बाद ईडी ने अचानक इस मामले का संज्ञान लिया है. एजेंसी का दावा है कि पत्रा चाल रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में पैसों का हेरफेर हुआ है.
ईडी की कहना है कि गुरुआशीष कंपनी के निदेशकों ने एफएसआई को नौ अन्य डेवलपरों को समझौते में शामिल अन्य पक्षों को जानकारी दिए बिना बेच दिया.
आरोप है कि निदेशकों को इस सौदे से 901 करोड़ रुपये की कमाई हुई है. ईडी का आरोप है कि गुरुआशीष कंपनी ने एक अन्य हाउसिंग प्रोजेक्ट मीडोज़ के ख़रीदारों से भी 138 करोड़ रुपये हासिल किए.
प्रवीण राउत, राकेश कुमार वाधवान और सारंग वाधवान गुरुआशीष कंपनी के निदेशक थे.
ईडी ने 2 फ़रवरी को प्रवीण राउत को गिरफ़्तार कर लिया था. 05 अप्रैल को एजेंसी ने शिव सेना सांसद संजय राउत की दादरी और अलीबाग़ में स्थित संपत्तियों को भी ज़ब्त कर लिया था.

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"शादी के वक़्त मुझसे वादा किया गया था कि मुझे नया घर मिलेगा, लेकिन..."
एक निवासी प्रमोद राजपूत की साल 1992 में शादी हुई थी. तब एक निजी बिल्डर ने चाल की जगह अपार्टमेंट बनाना शुरू किया था.
राजपूत कहते हैं, "मेरे ससुर सुरक्षा बलों में थे. उन्होंने मुझसे पूछा था कि शादी के बाद उनकी बेटी कहां रहेगी. मैंने पत्रा चाल में उन्हें अपना घर दिखा दिया था. उन्हें हैरानी हुई थी कि उनकी बेटी ऐसी जगह पर कैसे रह पाएगी. तब मैंने उन्हें आधी बनी इमारत दिखाई थी और भरोसा दिया था कि हमें इस बिल्डिंग में घर मिलेगा. मेरी शादी को अब तीस साल हो गए हैं. हम अब भी अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं. अब तो मेरी बेटियां भी जवान हो गई हैं. क्या उन्हें घर मिल पाएगा?"
पत्रा चाल के निवासी भले ही अपने घरों के दस्तावेज़ दिखाते हों लेकिन रह वो किराये के घरों में रहे हैं. इनमें से बहुत से लोग मुंबई के भारी भरकम किराए को नहीं चुका पाए और अपने गांव लौट गए.
प्रमोद राजपूत कहते हैं, "हम किराये पर ही इतना ख़र्च करते हैं कि कई को किराया चुकाने के लिए उधार तक लेना पड़ता है. बहुत से निवासियों के पास अब पैसे नहीं है. इसी वजह से मराठी लोग मुंबई के बाहर जा रहे हैं."

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संजय राउत के ख़िलाफ़ क्यों हो रही है जांच?
माना जा रहा है कि इस मामले में गिरफ़्तार प्रवीण राउत संजय राउत के क़रीबी हैं.
ईडी का आरोप है कि पत्रा चाल मामले में हुई मनी लांडरिंग में प्रवीण राउत को सौ करोड़ रुपये मिले. राउत ने ये पैसा अपने परिजनों और जानकारों के बैंक खातों में जमा करा दिया था.
ईडी का दावा है कि संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत ने साल 2010 में प्रवीण राउत की पत्नी मधुर राउत से 83 लाख रुपये प्राप्त किए.
आरोप है कि वर्षा राउत ने इन पैसों से दादर में एक फ्लैट ख़रीदा.
ईडी का ये भी आरोप है कि जांच शुरू होने के बाद वर्षा राउत ने मधुर के खाते में 55 लाख रुपये वापस भेजे थे.

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"हमें अपने घर कब मिलेंगे"
पत्रा चाल के रहने वालों का कहना है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें भरोसा दिया था कि उनकी समस्या का जल्द ही समाधान हो जाएगा.
पत्रा चाल रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का 22 फ़रवरी 2022 को एक वर्चुअल कार्यक्रम में उद्घाटन हुआ था. इमसें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी मौजूद थे.
सरकार ने वादा किया है कि पत्रा चाल के निवासियों को साल 2024 से पहले उनके घर मिल जाएंगे.
रमानी कहते हैं, "हम उम्मीद करते हैं कि मरने से पहले हम अपने घरों में रह पाएंगे."
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