बिहार 12वीं रिज़ल्ट: मिस्त्री, सब्ज़ी विक्रेता और ई-रिक्शा चालक के बेटे बने टॉपर

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार स्कूल एग्ज़ामिनेशन बोर्ड या बीएसईबी ने बुधवार को बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित कर दिए और इस बार तीनों स्ट्रीम यानी विज्ञान, कॉमर्स और आर्ट में इस बार लड़कों ने बाज़ी मारी है.
राजधानी पटना के इंद्रपुरी मोहल्ले की एक छोटी सी फूस की झोपड़ी के बाहर लोगों की कल भीड़ लग गई. ये लोग 18 साल के एक नौजवान अंकित कुमार गुप्ता को उत्सुकता से देख रहे थे.
अंकित को बिहार बोर्ड की परीक्षा में कॉमर्स की परीक्षा में टॉप किया है. उनके पिता सब्ज़ी बेचते हैं. पटना के बी डी कॉलेज के छात्र अंकित ने कुल 500 में से 473 अंक यानी 94.6 प्रतिशत स्कोर किए हैं.
बीबीसी से बातचीत में अंकित कहते हैं, "मेरा अनुमान था कि मेरे 85 प्रतिशत आ जाएगें लेकिन मैं टॉप कर जाऊंगा ये उम्मीद नहीं थी."

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बिहार बोर्ड की इस परीक्षा में कुल 13,25,749 परीक्षार्थी शामिल हुए थे जिसमें 6,83,920 छात्र और 6,41,829 छात्राएं थी. इस परीक्षा का उत्तीर्ण प्रतिशत 80.15 रहा.
'रिकॉर्ड समय में रिजल्ट'
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि, " बीती 14 फरवरी को परीक्षा ख़त्म होने के बाद 22 फ़रवरी से कॉपियों का मूल्यांकन शुरू हुआ था. सिर्फ 19 दिन के अंदर ये रिज़ल्ट प्रकाशित किया गया है जो समिति के इतिहास में सबसे तेज़ है और पूरे देश में एक रिकॉर्ड है. हमने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से परीक्षा प्रणाली में अभूतपूर्व बदलाव किया है."
अगर संकाय के नज़रिए से आंकड़े देखे तो विज्ञान संकाय के कुल 5,67,473 परीक्षार्थियों में से 4,52,901 परीक्षार्थी पास हुए. वहीं कॉमर्स के कुल 60,637 परीक्षार्थियों में से 54, 805 और आर्ट्स के कुल 6,97,086 परीक्षार्थियों में से 5,54,419 परीक्षार्थी पास हुए. अगर छात्राओं की पढ़ाई में दिलचस्पी के लिहाज से देखें तो अभी भी आर्ट्स संकाय की तुलना में लड़कियां विज्ञान संकाय में कम दाखिला लेती है.
तीनों संकाय यानी विज्ञान, आर्ट्स और कॉमर्स में टॉप करने वाले छात्र आर्थिक तौर पर बहुत ही कमज़ोर परिवारों से आते हैं.
ग़रीब परिवार से आते हैं टॉपर

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विज्ञान की श्रेणी में दो टॉपर सौरभ कुमार और अर्जुन कुमार रहे. दोनों ने कुल 500 में से 472 नंबर हासिल किए हैं. सौरभ नवादा में के एल एस कॉलेज के छात्र हैं. उनकी मां बबिता देवी गृहिणी है.
सौरभ के पिता शत्रुघ्न मिस्त्री बीते 15 साल से राज्य के बाहर एक प्रवासी मजदूर के तौर पर अपनी जिंदगी बिता रहे हैं. तीन बच्चों के पिता आठवीं पास हैं.
बीबीसी से बातचीत में सौरभ की मां बबिता देवी कहती हैं, "ये फ़ोन पर ही बहुत खुश हुए. क्या करते? इनके पास इतने पैसे भी नहीं कि होली में आ सकें. होली में आए होते तो बच्चे की इस खुशी में शामिल हो गए होते."
सौरभ कहते हैं, " पापा हर महीने बीस हज़ार रुपए भेजते हैं जिसमें हम तीनों भाई बहन की पढ़ाई का ख़र्च निकलता है. मेरी बहन ने भी इंटर की परीक्षा दी थी, उसे 417 नंबर मिले है. मैं ग्रैजुएशन करके सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहता हूं."
सेल्फ स्टडी पर ज़ोर देने वाले सौरभ ने अपनी शुरूआती पढ़ाई अपने गांव स्थित स्कूल में ही की. आठवीं के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई नवादा में की. बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में भी वो अपने ज़िले नवादा में दूसरे स्थान पर रहे थे.
'मैट्रिक की ग़लतियों से सीखा'

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गोपालगंज के वी एम इंटर कॉलेज के आर्ट्स संकाय में टॉप करने वाले संगम राज ने 500 में से 482 अंक हासिल किए हैं.
आईएएस बनने का ख़्वाब देखने वाले संगम राज कहते हैं, " इस बात का कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि कौन किस तरह के आर्थिक बैकग्राउंड का है. हमारा जुनून और हिम्मत सबसे बड़ी चीज है. कोरोना के वक्त भी मैंने सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान दिया और मेरे शिक्षकों ने मेरी पूरी मदद की."
शिक्षा को एक दशक से भी ज्यादा वक्त से कवर कर रही रिंकू झा कहती हैं, " जब से मैं एजुकेशन बीट को कवर कर रही हूं, ये पहला मौका है जब कला संकाय के स्टूडेंट को इतने नंबर मिले हैं."
दिलचस्प है कि इस बार आर्ट्स संकाय के टॉपर को विज्ञान और कॉमर्स संकाय के टॉपर से ज्यादा नंबर मिले है.
पेशे से ई-रिक्शा चालक जर्नादन साह के बेटे संगम राज कहते है, " मैट्रिक में मैं ज़िला टॉपर होकर रह गया था. उस वक्त जो मैनें गलतियां की थीं, उसको मैंने नहीं दोहराया. सिलेबस को बार बार पढ़ा , उसे रिवाइज़ किया और सवालों के जवाब कैसे लिखें, इस बात पर फोकस किया."
लड़कियां भी किसी से कम नहीं
मधेपुरा के सिंहेश्वर की रितिका रत्ना अपने इलाके का आकर्षण बन चुकी है. वो इंटर आर्टस की तीसरी टॉपर है. उन्हें 94 फ़ीसदी अंक मिले हैं.
शिक्षक पिता शशि शंकर यादव की बेटी रितिका बीबीसी से बताती हैं, " मैंने सेल्फ स्टडी की और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रही. कुछ समस्या होती थी तो ज़रूर यू-ट्यूब देखती थी. मैं आईएएस बनकर लड़कियों के लिए काम करना चाहती हूं."
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